5 महीने से अटकी 22 लाख लोगों की पेंशन! पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने राज्यपाल से की हस्तक्षेप की मांग

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छत्तीसगढ़ में सामाजिक सुरक्षा पेंशन एक बार फिर सियासी और प्रशासनिक बहस का केंद्र बन गई है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने आरोप लगाया है कि प्रदेश के लाखों पेंशनधारियों को पिछले कई महीनों से उनकी पेंशन नहीं मिल पाई है। इस मामले में उन्होंने राज्यपाल को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन पर निर्भर लाखों परिवार अब आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे हैं।

पांच महीने का बकाया, 22 लाख से अधिक परिवार प्रभावित

मोहम्मद अकबर ने अपने पत्र में दावा किया है कि प्रदेश के लगभग 22 लाख 70 हजार पेंशनधारी पिछले पांच महीने से नियमित भुगतान नहीं मिलने की समस्या से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा – “जब बुजुर्ग अपनी दवा के लिए पैसे नहीं जुटा पाते, जब विधवा महिलाओं के पास राशन लेने के भी पैसे नहीं होते, तो सरकार को इसकी गंभीरता समझनी चाहिए।”

अकबर का कहना है कि वर्तमान महंगाई और बढ़ती जीवन-यापन लागत के बीच पेंशन की राशि ही कई गरीब परिवारों का प्रमुख और एकमात्र सहारा होती है। लगातार पेंशन न मिलने से उनके सामने न सिर्फ खाने की समस्या है, बल्कि दवा, इलाज और बच्चों की पढ़ाई जैसे बुनियादी काम भी अटक गए हैं।

राज्यपाल से की हस्तक्षेप की मांग, संविधान के अनुच्छेद 154 का उल्लेख

पूर्व मंत्री ने राज्यपाल को लिखे पत्र में संविधान के अनुच्छेद 154 का हवाला भी दिया है, जिसके तहत राज्य की कार्यपालिका शक्तियां राज्यपाल में निहित होती हैं। उन्होंने कहा है कि राज्यपाल इस मामले में संबंधित विभागों को निर्देश जारी कर सकते हैं। उन्होंने आग्रह किया कि लाखों हितग्राहियों की पीड़ा को देखते हुए इस मुद्दे पर तत्काल संज्ञान लिया जाए और पेंशन भुगतान सुनिश्चित कराया जाए।

अकबर ने पत्र में लिखा है – “महामहिम, यह मामला केवल राशि वितरण का नहीं है। यह उन लाखों बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांग लोगों के अस्तित्व से जुड़ा है, जो राज्य की इसी पेंशन पर अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं।”

आखिर क्यों नहीं मिल रही पेंशन? सरकार क्या कहती है?

सरकार की ओर से पेंशन भुगतान में देरी के लिए तकनीकी और प्रशासनिक कारण बताए जा रहे हैं। कुछ अधिकारियों का कहना है कि लाभार्थियों के बैंक खातों का सत्यापन, केवाईसी प्रक्रिया और डेटा अपडेट में समय लग रहा है। वहीं विपक्ष का आरोप है कि यह महज बहाना है और सरकार वास्तविक समस्या को नजरअंदाज कर रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ा आक्रोश, बुजुर्ग बोले – “हमें भूखे मरने से कोई बचाए”

ग्रामीण क्षेत्रों में इस बीच पेंशन न मिलने का आक्रोश साफ देखा जा सकता है। एक बुजुर्ग ने बताया – “मेरे पांव नहीं चलते। बेटा शहर में मजदूरी करता है। मेरी पेंशन ही मेरी दवा और खाने का जरिया थी। अब तीन महीने से पैसा नहीं आया है। ऊपर से बीमारी, दवा नहीं ले पा रहा।”

एक विधवा महिला ने आंखें नम करते हुए कहा – “पति की पेंशन से ही गुजारा था। अब वह भी बंद हो गई। बेटी की पढ़ाई रुक गई है। हम किससे कहें? सरकार को हमारी सुननी चाहिए।”

पेंशन बंद होना मजबूरियों का हिस्सा या सरकारी लापरवाही?

विशेषज्ञों का मानना है कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का सबसे अहम पहलू समय पर भुगतान है। यदि लाभार्थियों को महीनों तक राशि नहीं मिलती है तो योजना का मूल उद्देश्य ही खत्म हो जाता है। कई सामाजिक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि पेंशन भुगतान प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न आए।

एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा – “जब पेंशन बंद होती है, तो परिवार टूटता है। बुजुर्ग अपना इलाज छोड़ देते हैं। विधवाएं हाथ फैलाने को मजबूर हो जाती हैं। यह सिर्फ देरी नहीं, यह एक मानवीय त्रासदी है।”

राजनीतिक मोर्चे पर भी मुद्दा गरमाया

राजनीतिक रूप से भी यह मामला तेजी से गर्म हो रहा है। कांग्रेस लगातार सरकार पर दबाव बना रही है और इस मसले को सदन के साथ-साथ सड़क तक ले जाने की तैयारी में है। वहीं सत्तारूढ़ दल के कुछ नेताओं ने इसे तकनीकी और प्रशासनिक समस्या बताते हुए कहा है कि जल्द ही सब ठीक हो जाएगा। लेकिन बुजुर्ग और दिव्यांग इस ‘जल्द’ का इंतजार अब बर्दाश्त नहीं कर सकते।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल राज्यपाल को लिखे गए पत्र के बाद प्रशासन में हलचल बढ़ गई है। वित्त विभाग और सामाजिक कल्याण विभाग को स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही बकाया राशि एकमुश्त जारी की जा सकती है।

लेकिन जब तक वह नहीं होता, सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों की बढ़ती बेचैनी को शांत करना है। फिलहाल लाखों पेंशनधारियों की नजरें इस मामले पर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं, और वे कह रहे हैं – “हमने सरकार पर भरोसा किया था। अब वही भरोसा न टूटने दें।”

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