चीन के PLA मिसाइल साइलो और प्रशिक्षण क्षेत्र: सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा बड़ा विस्तार, जानें पूरा मामला

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हाल के वर्षों में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) अपने परमाणु हथियारों के भंडारण और मिसाइल ढांचे को लगातार बढ़ा रही है। खास बात यह है कि इसकी ज्यादातर जानकारी चीन ने खुद नहीं, बल्कि दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों और ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) ने सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए निकाली है।

आइए, जानते हैं कि चीन कहां-कहां ये साइलो बना रहा है और इसका क्या मतलब है.

प्रमुख स्थान और उनका महत्व

1. युमेन (युमेन) – गांसु प्रांत
यह चीन का सबसे बड़ा और पहला मिसाइल साइलो फील्ड है। 2021 में सबसे पहले इसी जगह पर निर्माण देखा गया था

  • आकार: लगभग 424 वर्ग मील (करीब 1100 वर्ग किमी) में फैला यह साइलो फील्ड 120 मिसाइल साइलो को होस्ट कर सकता है

  • पुष्टि: अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने भी अपनी रिपोर्ट में पुष्टि की है कि चीन ने यहां DF-31 जैसी इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) तैनात कर दी है

2. हामी (हामी) – शिनजियांग
युमेन से लगभग 380 किमी उत्तर-पश्चिम में स्थित, यह दूसरा बड़ा साइलो फील्ड है

  • आकार: यह क्षेत्र भी लगभग 396 वर्ग मील में फैला है और इसमें करीब 110 साइलो बनाए गए हैं

  • सुरक्षा घेरा: सबसे खास बात यह है कि हाल ही में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों में हामी साइलो के आसपास 80 से अधिक लॉन्च पैड और संचार केंद्र बनते दिखे हैं, जिनका मकसद इन साइलो को हमले से बचाना है

3. जिलानताई (Jilantai) – इनर मंगोलिया
यह जगह चीन के लिए ट्रेनिंग और टेस्टिंग हब की तरह काम करती है।

  • कार्य: यहां मिसाइल परीक्षण और सैन्य अभ्यास होते हैं। दिलचस्प बात यह है कि इसी ट्रेनिंग एरिया में करीब 12 साइलो बनाए गए, जो संभवतः प्रशिक्षण के लिए हैं

4. हैंगिन बैनर (Hanggin Banner) – इनर मंगोलिया
यह तीसरा बड़ा साइलो क्लस्टर है।

  • आकार: यह करीब 321 वर्ग मील में फैला है। हालांकि यह युमेन और हामी से थोड़ा छोटा है, फिर भी इसमें करीब 90 साइलो हैं

  • रणनीतिक अहमियत: यह साइट मंगोलिया की सीमा के बिल्कुल करीब है। इससे पहले इस इलाके में PLA रॉकेट फोर्स की कोई बड़ी मौजूदगी नहीं थी

चीन ऐसा क्यों कर रहा है? (रणनीतिक मायने)

चीन ने पहले ही सार्वजनिक तौर पर कहा रखा है कि वह "कोई पहला परमाणु हमला नहीं करेगा" (No First Use Policy)। उसकी नीति न्यूनतम लेकिन विश्वसनीय प्रतिशोध क्षमता (Minimum Credible Deterrence) की रही है

लेकिन इतने बड़े स्तर पर साइलो बनाने के पीछे तीन मुख्य रणनीतियाँ नजर आती हैं:

1. प्रतिशोध क्षमता बढ़ाना
घनी आबादी वाले इलाकों के बजाय इन सुदूर रेगिस्तानों में सैकड़ों साइलो बनाकर, चीन यह सुनिश्चित कर रहा है कि अगर कोई दुश्मन उसके खिलाफ पहला हमला करता है, तब भी उसके पास जवाबी हमला करने के लिए पर्याप्त मिसाइलें बची रहें। विशेषज्ञों के अनुसार, चीन 2030 तक अपने परमाणु हथियारों का भंडार बढ़ाकर 1,000 वारहेड्स तक पहुंचा सकता है

2. संरक्षण और उत्तरजीविता (Survivability)
हाल ही में हामी क्षेत्र में जो ऑक्टागोनल स्ट्रक्चर (अष्टकोणीय संरचनाएं) और लॉन्च पैड बने हैं, वे एक एयर डिफेंस सिस्टम का हिस्सा हैं। अमेरिकी विश्लेषक हैन्स क्रिस्टेंसन का कहना है कि उन्होंने इस तरह की सुरक्षा व्यवस्था पहले कभी नहीं देखी। इसका मतलब है कि चीन अपने साइलो को दुश्मन के हमले से बचाने के लिए उनके चारों तरफ मोबाइल लॉन्चर और एंटी-एयरक्राफ्ट गन तैनात कर रहा है

3. डीकॉय (Decoy) यानी नकली साइलो का खेल
चीन में पिछले कुछ सालों से 'शेल गेम' रणनीति का इस्तेमाल देखा जा रहा है। इस रणनीति में असली मिसाइलों को कई सारे नकली साइलो (Decoys) के बीच छुपा दिया जाता है। आसमान से एक जैसे दिखने वाले सैकड़ों साइलो को देखकर दुश्मन के लिए यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि असली वारहेड कहां है, जिससे वह सभी को निशाना बनाने को मजबूर हो जाता है

क्या यह जानकारी पूरी तरह सच है?

  • तथ्य (Fact): इन साइलो फील्ड्स का मौजूद होना और उनका लगातार विस्तार होना पूरी तरह सत्य है। सैटेलाइट तस्वीरों में साफ तौर पर यह दिखता है और पेंटागन की रिपोर्ट भी इसकी पुष्टि करती है

  • सावधानी (Caution): हालांकि रक्षा विशेषज्ञ अच्छी तरह मानते हैं कि ये साइलो DF-41 या DF-31 जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों के लिए हैं, लेकिन चीन ने आधिकारिक तौर पर इन साइलो में तैनात हथियारों के बारे में कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। 80 लॉन्च पैड वाला डिफेंस सिस्टम भी एक "बड़ी संभावना" है, हालांकि चीनी सरकार ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है

निष्कर्ष (सीधी बात)

युमेन, हामी और इनर मंगोलिया में चीन द्वारा मिसाइल साइलो का यह विस्तार किसी रहस्य की तरह नहीं है। यह सैटेलाइट के जरिए दुनिया को साफ दिख रहा है। दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते परमाणु शस्त्रागार के रूप में, चीन अपनी सैन्य क्षमताओं का एक नया मानदंड स्थापित कर रहा है।

हालांकि इन साइलो में क्या है, इस पर अभी बहस जारी है, लेकिन इतना तय है कि वैश्विक सुरक्षा संतुलन को देखते हुए यह एक बहुत बड़ा बदलाव है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर है।

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