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छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में मंगलवार को एक बेहद अहम बैठक हुई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें चार राज्यों – छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड – के मुख्यमंत्री शामिल हुए। ये सभी नाम अपने-अपने राज्यों में नक्सलवाद और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए जाने जाते हैं। बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मौजूद रहे।
गृह मंत्री ने बैठक में साफ शब्दों में कहा कि अब सिर्फ सुरक्षा अभियानों से काम नहीं चलेगा, बल्कि विकास और विश्वास के जरिए नक्सलवाद की जड़ों तक पहुंचना होगा। यह बैठक उस बदलाव की शुरुआत का संकेत है, जिसमें बस्तर को हिंसा की धरती से उठाकर विकास की नई पहचान दी जा रही है।
सुरक्षा के साथ अब विकास पर जोर
बैठक के दौरान सबसे बड़ा जोर इस बात पर रहा कि नक्सल प्रभावित इलाकों में कैसे विकास कार्यों को तेजी से पहुंचाया जाए। छत्तीसगढ़ के CM विष्णु देव साय ने बैठक में अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि बस्तर में सुरक्षा बलों के साथ-साथ प्रशासनिक तंत्र भी अब ज्यादा सक्रिय हो गया है। वहीं उत्तर प्रदेश के CM योगी आदित्यनाथ ने राज्यों के बीच इंटेलिजेंस शेयरिंग को और मजबूत बनाने पर जोर दिया।
मध्य प्रदेश के CM मोहन यादव और उत्तराखंड के CM पुष्कर सिंह धामी ने भी अपने-अपने राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों में नक्सल गतिविधियों की समीक्षा रिपोर्ट रखी। सभी मुख्यमंत्रियों ने सुरक्षा एजेंसियों, इंटेलिजेंस ब्यूरो और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की।
अमित शाह ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि राज्यों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान और तेज किया जाए, ताकि नक्सली नेटवर्क को दोबारा पैर जमाने का मौका न मिले।
रेल-सड़क कनेक्टिविटी: बस्तर की किस्मत बदलने की कुंजी
बैठक में एक और अहम बात यह उठी कि बस्तर में अधूरी पड़ी रेल और सड़क परियोजनाओं को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। जगदलपुर-रावघाट रेल लाइन जैसी परियोजनाओं को प्राथमिकता देने पर सहमति बनी। CM विष्णु देव साय ने विशेष तौर पर बस्तर क्षेत्र में सड़क निर्माण में आ रही बाधाओं को प्राथमिकता से हटाने का अनुरोध किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक बस्तर के जंगलों में अच्छी सड़कें और रेल लाइनें नहीं पहुंचेंगी, विकास अधूरा रहेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से न सिर्फ सुरक्षा बलों की आवाजाही आसान होगी, बल्कि स्थानीय लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार तक पहुंचने में भी मदद मिलेगी।
गृह मंत्री ने कहा कि जिन इलाकों में कभी प्रशासन पहुंचना मुश्किल था, वहां अब सड़क, बिजली, पानी, स्कूल और बैंकिंग सुविधाएं तेजी से पहुंच रही हैं। उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस मौके पर कहा कि उनके राज्य के बुंदेलखंड क्षेत्र में भी इसी तरह के विकास मॉडल को अपनाया जा रहा है।
आत्मसमर्पण करने वालों के पुनर्वास पर फोकस
बैठक में यह भी तय किया गया कि जिन नक्सलियों ने हथियार डालकर मुख्यधारा में वापसी की है, उनके पुनर्वास पर और प्रभावी तरीके से काम किया जाएगा। मध्य प्रदेश के CM मोहन यादव ने इस मुद्दे पर कहा कि पुनर्वास योजनाओं को और अधिक आकर्षक और रोजगारोन्मुखी बनाने की आवश्यकता है।
उत्तराखंड के CM पुष्कर सिंह धामी ने सुझाव दिया कि पर्वतीय और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में डिजिटल शिक्षा और टेलीमेडिसिन सुविधाओं का तेजी से विस्तार होना चाहिए, ताकि युवा मुख्यधारा से जुड़ सकें।
केंद्र सरकार चाहती है कि मुख्यधारा में लौट चुके युवाओं को रोजगार और प्रशिक्षण देकर स्थायी जीवन उपलब्ध कराया जाए। कई इलाकों में सुरक्षा कैंपों को अब 'विकास केंद्र' के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां स्थानीय लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारी और सुविधाएं मिल सकेंगी।
'नक्सल मुक्त भारत' की ओर बढ़ता कदम
गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक में कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों ने जो रणनीति अपनाई, उससे नक्सल नेटवर्क काफी कमजोर हुआ है। उन्होंने कहा कि देश अब 'नक्सल मुक्त भारत' की ओर तेजी से बढ़ रहा है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने सुरक्षा बलों के मनोबल की प्रशंसा करते हुए कहा कि राज्यों को चाहिए कि वे एक-दूसरे की सफल रणनीतियों से सीखें।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि कैसे तकनीक का इस्तेमाल करके नक्सलियों की लोकेशन और गतिविधियों पर नजर रखी जाए। ड्रोन सर्वेक्षण, सैटेलाइट इमेजरी और संचार नेटवर्क की मॉनिटरिंग जैसे आधुनिक साधनों को और मजबूत करने पर सहमति बनी।
बस्तर की नई पहचान: हिंसा से विकास की ओर
बैठक के बाद प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि अब सरकार का फोकस बस्तर में पर्यटन, उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने पर होगा। बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, झरने, पहाड़ियाँ और आदिवासी संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की योजना है।
CM विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर के विकास के लिए केंद्र सरकार का पूर्ण सहयोग मिल रहा है और आने वाले समय में यह क्षेत्र नक्सलवाद के बदले विकास का एक आदर्श मॉडल बनेगा। जगदलपुर में आयोजित इस बैठक को सिर्फ एक सुरक्षा समीक्षा नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बस्तर के 'पोस्ट-नक्सल डेवलपमेंट मॉडल' की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक संदेश भी, लेकिन असली लड़ाई जमीन पर
यह बैठक राजनीतिक दृष्टि से भी काफी अहम है। चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों – विष्णु देव साय, योगी आदित्यनाथ, मोहन यादव और पुष्कर सिंह धामी – का एक साथ जगदलपुर में आना और नक्सलवाद के खिलाफ संयुक्त रणनीति बनाना, केंद्र सरकार के मजबूत इरादों को दिखाता है। यह पहली बार नहीं है जब ये सभी नेता किसी सुरक्षा बैठक में एक साथ मौजूद रहे हों, लेकिन बस्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इनकी मौजूदगी अपने आप में एक संदेश है।
विपक्षी दलों ने इसे 'चुनावी दिखावा' करार दिया हो, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि पिछले कुछ वर्षों में बस्तर में सुरक्षा बलों ने जो काम किया है, वह बेहद सराहनीय है। हिंसक घटनाओं में कमी, सुरक्षा कैंपों का विस्तार और सड़कों का निर्माण – ये सब बताते हैं कि हालात बदल रहे हैं।
विकास की उम्मीद और बदलता बस्तर
जगदलपुर की इस बैठक ने एक साफ संदेश दिया है – अब बस्तर में सिर्फ 'अभियान' नहीं, बल्कि 'विकास' भी चलेगा। गृह मंत्री अमित शाह और चारों मुख्यमंत्रियों – विष्णु देव साय, योगी आदित्यनाथ, मोहन यादव और पुष्कर सिंह धामी – की यह एकजुटता बस्तर के लोगों को एक नई उम्मीद देती है।
अब यह देखना होगा कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर इन योजनाओं को जमीन पर कैसे उतारती हैं। अगर विकास कार्य गति पकड़ते हैं, तो आने वाले कुछ सालों में बस्तर न सिर्फ नक्सल हिंसा से मुक्त होगा, बल्कि देश के सामने एक मिसाल पेश करेगा – कैसे एक बदहाल क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है।
तब तक, बस्तर की धरती पर बैठे प्रत्येक व्यक्ति की नजर इस बदलाव पर टिकी है – एक ऐसा बदलाव, जो उनके अपने हाथों से लिखा जाएगा।

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