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पाकिस्तान की सेना के मीडिया विंग ISPR ने एक बार फिर भारत पर बड़ा आरोप लगाया है। ISPR के मुख्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने दावा किया है कि भारत लगातार साइबर हमलों के जरिए पाकिस्तान की डिजिटल संपत्तियों को निशाना बना रहा है।
आइए, इस पूरे मामले को सादा भाषा में समझते हैं।
आखिर ISPR ने क्या कहा?
अहमद शरीफ चौधरी के मुताबिक, भारत:
पाकिस्तानी वेबसाइट्स को हैक कर रहा है
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के अकाउंट्स को निशाना बना रहा है
मीडिया प्लेटफॉर्म्स को डिस्रप्ट कर रहा है
उन्होंने इसे "संगठित साइबर गतिविधि" बताया है, जिसका मकसद पाकिस्तान की ऑनलाइन उपस्थिति को कमजोर करना है।
उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में पाकिस्तान ने "मार्का-ए-हक" जैसे अभियानों के जरिए मल्टी-डोमेन संघर्ष (ज़मीन, हवा, समंदर, और साइबर) में खुद को साबित किया है।
साइबर हमलों का ये खेल नया नहीं है
भारत-पाकिस्तान के बीच साइबर युद्ध कोई आज-कल की बात नहीं है। पिछले कुछ महीनों में कई घटनाएँ हुई हैं:
मार्च 2026 में क्या हुआ था?
पाकिस्तान के नेशनल CERT ने कई प्राइवेट टीवी चैनलों और वेबसाइट्स पर हुए साइबर हमलों की जांच शुरू की थी।
कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि इन हमलों के पीछे भारत और इज़राइल की एजेंसियाँ थीं।
जवाब में, पाकिस्तानी साइबर फोर्स ने भारतीय चैनल ABP News को हैक कर लिया और उस पर "पाकिस्तान जिंदाबाद" के नारे लगा दिए थे।
पाकिस्तान के इस दावे की क्या सच्चाई है?
अब यहाँ थोड़ी पेचीदगी हो जाती है।
1. पाकिस्तान का अपना इतिहास
भारतीय खुफाई एजेंसियों के मुताबिक, पाकिस्तान की ISI और ISPR खुद "फॉल्स फ्लैग" (झूठे झंडे) वाले प्रोपेगंडा चलाती रहती हैं। मार्च 2026 में ही एक रिपोर्ट आई थी कि ISI ने बॉट्स और सोशल मीडिया के जरिए एक कोऑर्डिनेटेड डिसइन्फॉर्मेशन कैंपेन चलाया था, जिसमें भारत पर झूठे आरोप लगाए गए थे।
2. "फेक इविडेंस" का खेल
हाल ही में एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक यूजर ने पाकिस्तान के ISPR को कई मामलों में "झूठे सबूत" पेश करने का आरोप लगाया था। उदाहरण के लिए, पहलगाम हमले के मामले में ISPR ने जो ड्रोन दिखाया था, उसे "भारतीय ड्रोन" बताकर पेश किया गया था, लेकिन रिवर्स इमेज सर्च करने पर पता चला कि वह ड्रोन चीनी कंपनी DJI का बना था।
3. AI और डीपफेक का इस्तेमाल
मार्च 2026 में ही भारत सरकार ने एक AI जेनरेटेड डीपफेक वीडियो का पर्दाफाश किया था, जो पाकिस्तानी प्रोपेगंडा अकाउंट्स से वायरल किया गया था। उस वीडियो में झूठा दावा किया गया था कि भारत ने ईरान के युद्धपोत की लोकेशन इज़राइल को दे दी है।
भारत की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं
अभी तक इस मामले पर भारत सरकार या किसी आधिकारिक एजेंसी की ओर से कोई औपचारिक बयान नहीं आया है।
यह कोई नई बात नहीं है। भारत और पाकिस्तान के बीच ऐसे आरोप-प्रत्यारोप का पुराना खेल है – पाकिस्तान आरोप लगाता है, भारत कभी खुलकर जवाब नहीं देता (क्योंकि खुद के नेटवर्क की सुरक्षा का मामला होता है), और मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।
मामला कितना गंभीर है? (विशेषज्ञ क्या कहते हैं)
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच साइबर वॉरफेयर अब कोई नई बात नहीं रह गई है। दोनों देश लगातार एक-दूसरे के साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर पर नजर रखते हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की साइबर एजेंसियों को हाल ही में "क्रिटिकल वीकनेस" का सामना करना पड़ा था, जिसे पाकिस्तानी हैकर्स ने भांप लिया था। हालाँकि, भारत ने दावा किया था कि उसने अपने सिस्टम को अपडेट करते हुए समय रहते सुरक्षा दीवार खड़ी कर ली थी।
लेकिन सवाल यह है कि ISPR के आरोप कितने सच हैं, और कितने प्रोपेगंडा हैं? पिछले रिकॉर्ड देखते हुए, पाकिस्तानी मीडिया विंग के दावों पर आंख मूंदकर भरोसा करना मुश्किल है। उनके पास अतीत में "सबूत" गढ़ने का इतिहास रहा है।
निष्कर्ष – क्या है असली तस्वीर?
सीधी और साफ बात यह है कि:
हाँ, साइबर हमले हो रहे हैं – दोनों तरफ से। यह आधुनिक युद्ध का हिस्सा है।
पर, ISPR का यह दावा पूरी तरह भरोसेमंद नहीं है – क्योंकि पिछले कई मामलों में उनके "सबूत" फर्जी पाए गए हैं।
भारत चुप क्यों है? – साइबर सिक्योरिटी एक नाजुक मामला है। अपनी कमजोरियों या रणनीतियों को उजागर करना खतरनाक हो सकता है।
यह पूरा प्रकरण दिखाता है कि अब जंगें सिर्फ सीमाओं पर नहीं, बल्कि साइबर स्पेस में भी लड़ी जा रही हैं। लेकिन ISPR के दावों को सच मानने से पहले, थोड़ा ठहरिए और सोचिए – आखिर वे इस झूठे प्रोपेगंडा से क्या हासिल करना चाह रहे हैं?
भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब यह है कि वह इन आरोपों को "प्रोपेगंडा" और "अफवाह" के रूप में न सिर्फ नकारे, बल्कि वैश्विक मंच पर अपनी साइबर ताकत का भी प्रदर्शन करे – ताकि कोई उसे कमजोर समझने की भूल न करे।

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