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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में अवैध शराब के धंधे और बढ़ते नशे के कारोबार को लेकर अब राजनीति और प्रशासन, दोनों स्तरों पर बहस तेज हो गई है। वरिष्ठ भाजपा नेता और सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने पुलिस प्रशासन को बीच बैठक में जमकर फटकार लगाई और सख्त शब्दों में कहा कि छोटे-मोटे कार्रवाई से कुछ नहीं होगा, जब तक “बड़े लोगों को उठाकर बंद नहीं किया जाता”, तब तक इस अवैध कारोबार पर विराम नहीं लगेगा।
बैठक में क्यों भड़के बृजमोहन अग्रवाल?
दरअसल, रायपुर में कानून व्यवस्था, बढ़ते नशे के मामलों और अवैध गतिविधियों की समीक्षा के लिए एक अहम बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। इसी दौरान बृजमोहन अग्रवाल ने बिना लाग-लपेट के अपनी बात रखी। उन्होंने सीधे अधिकारियों से पूछा – “शहर के कोने-कोने में अवैध शराब बिकती है, आपको इसकी खबर क्यों नहीं होती?”
उन्होंने कहा कि आम जनता जब शिकायत कर सकती है, तो पुलिस तंत्र को खुद सक्रिय होना चाहिए। वहीं उन्होंने इस बात पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी कि अब तक जो कार्रवाई हुई है, वह केवल निचले स्तर पर हुई है। न तो किसी बड़े सप्लायर को गिरफ्तार किया गया, न ही उनके नेटवर्क को तोड़ा गया।
“बड़े लोगों को उठाकर बंद करो” – क्यों बोले ऐसा?
बृजमोहन अग्रवाल ने साफ कहा कि अवैध शराब का कारोबार कोई एक-दो लोगों का खेल नहीं है। इसके पीछे संगठित गिरोह काम कर रहे हैं और कई बड़े चेहरे इससे जुड़े हैं। उन्होंने अफसरों से कहा – “छोटे लोगों को पकड़ने से कुछ नहीं होगा। आप बड़े लोगों को उठाकर बंद कीजिए। जब उनका सप्लाई सिस्टम ही ध्वस्त हो जाएगा, तो नीचे का बाजार अपने आप ठप हो जाएगा।”
उनका यह बयान साफ संकेत देता है कि अब प्रशासन पर न सिर्फ कार्रवाई करने का, बल्कि पूरे नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने का दबाव बढ़ गया है।
नशे के बढ़ते मामले – चिंता का विषय
रायपुर में पिछले कुछ समय से सड़क दुर्घटनाओं, हिंसक झगड़ों और नाबालिगों के नशे में पकड़े जाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इनमें से कई मामले अवैध शराब और नशीले पदार्थों से जुड़े हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस प्रवृत्ति को जल्द नहीं रोका गया, तो यह शहर के युवाओं के लिए बड़ा संकट बन सकती है।
कई सामाजिक संगठनों ने भी स्कूलों और कॉलोनियों के आसपास अवैध शराब की बिक्री की शिकायतें प्रशासन को भेजी हैं। लेकिन आम आदमी का मानना है कि समस्या का स्थायी समाधान तब तक संभव नहीं, जब तक बड़े तस्कर और उनकी सप्लाई चेन को तोड़ा न जाए।
सोशल मीडिया पर बयान का असर
बृजमोहन अग्रवाल का यह बयान सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। एक तरफ लोग उनकी खुलकर बात कहने की तारीफ कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ कई लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि जब इतने दिनों से अवैध कारोबार हो रहा था, तो प्रशासन कहां था?
रेडिट और ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म्स पर लोग इस मुद्दे पर अपनी राय दे रहे हैं। कुछ ने लिखा – “अब कार्रवाई केवल निचले स्तर पर नहीं होनी चाहिए, बड़े खिलाड़ी भी पुलिस की रडार पर होंगे।” तो कई यूजर्स ने यह भी कहा – “राजनीति के बजाय अब ठोस एक्शन दिखना चाहिए।”
पुलिस और प्रशासन पर बढ़ा दबाव
हालांकि पुलिस की ओर से अवैध शराब कारोबार को लेकर कई बार दबिशें और अभियान चलाए गए हैं, लेकिन हर बार सवाल यही उठता है कि बड़े नाम इससे क्यों बच जाते हैं। बृजमोहन अग्रवाल के बयान के बाद अब अधिकारियों पर और अधिक सख्ती बरतने और जड़ से समस्या खत्म करने का दबाव बढ़ गया है।
बैठक में अधिकारियों को सख्ती से यह भी कहा गया कि अब सिर्फ औपचारिकता निभाने से काम नहीं चलेगा। नियमित अंतराल पर निगरानी रखी जाए और संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए।
आगे क्या होगा? जनता की उम्मीदें
अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन कितनी गंभीरता से इस मामले पर काम करता है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों का कहना है कि शहर के कई इलाकों में खुलेआम अवैध शराब की बिक्री होती है। पुलिस को वहां पहले सख्ती बरतनी चाहिए। साथ ही, सूचना देने वालों की पहचान गुप्त रखी जाए, ताकि लोग बिना किसी डर के शिकायत कर सकें।
बृजमोहन अग्रवाल की सख्त टिप्पणी के बाद प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा है। अब देखना यह होगा कि क्या रायपुर में अवैध शराब कारोबार के खिलाफ वाकई कोई बड़ी और जड़ से कार्रवाई होती है, या यह फिर से राजनीतिक बयानबाजी का एक मामला बनकर रह जाता है।
केवल बयान नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए
रायपुर में अवैध शराब कारोबार पर बृजमोहन अग्रवाल का बयान यह साबित करता है कि अब बड़े राजनेता भी इस मुद्दे को गंभीरता से उठाने लगे हैं। उनका सीधा सवाल और पुलिस पर सख्ती लोकतंत्र में जवाबदेही की एक अच्छी मिसाल है। लेकिन असली सवाल यही है – क्या इस बार कार्रवाई सिर्फ दिखावा होगी या असली जड़ों तक जाएगी? फिलहाल, पूरे रायपुर की नजर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है। क्योंकि नशे से बचना सिर्फ कानून की बात नहीं, बल्कि हर परिवार की चिंता और हर मां की फरियाद है।
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