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लाहौर | 28 मई 2026
ईद-उल-अजहा के मौके पर पाकिस्तान के लाहौर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने एक बार फिर से पाकिस्तान की आतंकवाद के खिलाफ कथित कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खबरों के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के संस्थापक हाफिज सैयद के बेटे तल्हा सईद ने गद्दाफी स्टेडियम के बाहर बड़े जमावड़े के साथ ईद की नमाज अदा की।
यह वही स्टेडियम है जो पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के मुख्यालय के लिए जाना जाता है, लेकिन इस दिन यह लश्कर-ए-तैयबा के प्रदर्शन का केंद्र बन गया।
कौन हैं तल्हा सईद और क्यों है मामला गंभीर?
तल्हा सईद कोई साधारण धार्मिक व्यक्ति नहीं हैं। भारत के गृह मंत्रालय ने उन्हें 'व्यक्तिगत आतंकी' घोषित किया है। उन पर लश्कर-ए-तैयबा के लिए फंड जुटाने, युवाओं को भर्ती करने और भारतीय नागरिकों के खिलाफ हमलों की साजिश रचने के गंभीर आरोप हैं।
उनके पिता, हाफिज सैयद, 26/11 मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हैं और उन्हें संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका द्वारा वैश्विक आतंकी घोषित किया गया है। हालांकि, तल्हा सईद के खिलाफ पाकिस्तान में कोई सार्वजनिक कार्रवाई नहीं हुई है, और वे खुलकर सार्वजनिक समारोहों में शामिल होते हैं।
सिर्फ तल्हा सईद ही नहीं, बल्कि 'पॉलिटिकल सपोर्ट' भी
यह पहली बार नहीं है जब तल्हा सईद सुर्खियों में हैं। इससे कुछ हफ्ते पहले ही वह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के करीबी सहयोगी राणा सना उल्लाह के साथ एक मंच पर नजर आए थे।
उनकी मुलाकात की तस्वीरें वायरल हुई थीं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मच गया था। विश्लेषकों का कहना है कि यह कोई संयोग नहीं है, बल्कि पाकिस्तानी सियासत और आतंकी संगठनों के बीच गहरे संबंधों का सबूत है।
लश्कर-ए-तैयबा में 'बाप-बेटे' की सत्ता का खेल?
सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान प्रतिष्ठान (Establishment) अब तल्हा सईद को लश्कर-ए-तैयबा का औपचारिक प्रमुख बनाने पर विचार कर रहा है।
दरअसल, 75 वर्षीय हाफिज सैयद की उम्र और सेहत को देखते हुए, यह माना जा रहा है कि तल्हा सईद 'डी फैक्टो' (वास्तविक) प्रमुख बन चुके हैं। उनके नेतृत्व में सोशल मीडिया और नई तकनीकों का इस्तेमाल करके नई पीढ़ी को कट्टरपंथी बनाने की रणनीति पर काम हो रहा है।
भारत और दुनिया की प्रतिक्रिया
भारत लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि पाकिस्तान अपनी जमीन पर आतंकी संगठनों को पनाह दे रहा है। गद्दाफी स्टेडियम में हुई इस भव्य सभा ने इन आरोपों को और मजबूत किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पाकिस्तान वाकई में आतंकवाद के खिलाफ है, तो सबसे पहले उसे अपने यहां के इन 'नामी' आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी। फिलहाल, यह घटनाक्रम यही संकेत देता है कि पाकिस्तान की सत्ता में आतंकियों का प्रभाव कम होने के बजाय और मजबूत होता दिख रहा है।
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