कार की सीट के नीचे मिला 9 करोड़ का गोल्ड: महासमुंद में गुजरात के 3 तस्कर धरे गए, अंबिकापुर में 95 किलो चांदी और सैकड़ों मोबाइल जब्त

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छत्तीसगढ़ पुलिस ने अवैध तस्करी के खिलाफ एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए तस्करों के खेल का पर्दाफाश किया है। प्रदेश के दो अलग-अलग जिलों में पुलिस को जबरदस्त सफलता मिली है। महासमुंद में एक लग्जरी कार के सीट के नीचे बने गुप्त चेंबर से 9 करोड़ रुपए से अधिक का सोना बरामद किया गया है, वहीं अंबिकापुर में 95 किलो चांदी और सैकड़ों पुराने मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। दोनों ही मामलों में तस्करों को गिरफ्तार कर लिया गया है और अब जांच एजेंसियां इस बड़े नेटवर्क के तार ढूंढने में जुटी हैं।

कार में क्या था – पुलिस को सीट के नीचे छिपा मिला खजाना

महासमुंद जिले के सिंघोड़ा थाना क्षेत्र की बात है। यहाँ ओडिशा सीमा के पास रेहटीखोल चेक पोस्ट पर पुलिस हमेशा की तरह वाहनों की जांच कर रही थी। तभी गुजरात नंबर की एक लग्जरी Volkswagen Virtus कार वहाँ आई। जैसे ही पुलिस वालों ने कार को रोका, अंदर बैठे तीन युवकों के चेहरे के हाव-भाव बदल गए। उनकी घबराहट देखते ही जवानों को कुछ तो शक हुआ।

शुरुआत में तो कार की सामान्य तलाशी ली गई, लेकिन जब जवानों को कुछ खास नहीं मिला, तो उन्होंने कार को बारीकी से खंगालना शुरू किया। तभी पीछे की सीट के नीचे एक ऐसा हिस्सा नज़र आया, जो सामान्य से थोड़ा उभरा हुआ था। जिज्ञासा बढ़ी और जब उस हिस्से को खोला गया, तो अंदर एक गुप्त चेंबर मिला – ठीक वैसा ही, जैसा कि फिल्मों में दिखाया जाता है।

इस चेंबर से कई बैग निकले, जिनमें प्लास्टिक के डिब्बों में भारी मात्रा में सोने के आभूषण छिपाकर रखे गए थे। पुलिस ने जब उन्हें बाहर निकाला तो सब हैरान रह गए – करीब साढ़े सात किलो से अधिक सोना, जिसकी कीमत 9.17 करोड़ रुपए आंकी गई।

कौन हैं तीनों तस्कर और क्यों नहीं दिखा पाए कागजात?

पुलिस ने गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों की पहचान गुजरात के राजकोट निवासी जयेश अकबरी, सुनीत करेना और रुशी अग्रवाट के रूप में की है। जब उनसे सोने के संबंध में कोई कागजात या बिल मांगा गया, तो वे एक भी वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सके। न तो जीएसटी का बिल था, न ट्रांसपोर्ट रिकॉर्ड, न खरीद की कोई रसीद।

पुलिस के अनुसार इन तीनों से अब यह पूछताछ की जा रही है कि यह सोना कहाँ से लाया गया और किसे दिया जाना था। क्या यह टैक्स चोरी का मामला है या फिर अंतरराज्यीय तस्करी का कोई बड़ा नेटवर्क? यही वह सवाल है, जिसे सुलझाने के लिए अब Income Tax Department और Directorate of Revenue Intelligence (DRI) को भी मामले की सूचना दे दी गई है।

अंबिकापुर में भी बड़ी कार्रवाई – चांदी और मोबाइल की बरामदगी

महासमुंद से लगभग 300 किलोमीटर दूर सरगुजा संभाग के अंबिकापुर में भी पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। गांधीनगर थाना पुलिस ने बनारस रोड के पास एक Omni वैन को रोककर जांच की तो उसमें से 95.5 किलो पुरानी चांदी की पायल और 760 पुराने मोबाइल फोन बरामद हुए।

यहाँ पर पुलिस ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के पांच लोगों को गिरफ्तार किया है – सेंटू शेख, गफ्फार शेख, आसिम शेख, इब्राहिम शेख और माशदुल शेख। इनमें से कोई भी चांदी या मोबाइल के संबंध में कोई सही जवाब नहीं दे सका।

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि 760 पुराने मोबाइल फोन – यह संख्या छोटी नहीं है। एजेंसियों को शक है कि कहीं इन फोन का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड या ऑनलाइन ठगी के लिए तो नहीं किया जाने वाला था। फिलहाल सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

क्या यह कोई बड़ा नेटवर्क है?

एक तरफ गुजरात से लग्जरी कार में सोना, दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल से छत्तीसगढ़ में चांदी और मोबाइल – यह देखकर साफ है कि अंतरराज्यीय तस्करी का जाल काफी व्यापक हो सकता है। पुलिस अब दोनों मामलों के आपसी संबंधों की भी जांच कर रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि महासमुंद और अंबिकापुर के पास से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग तस्करों के लिए लंबे समय से पसंदीदा रूट रहे हैं। चोरी-छुपे सोने-चांदी को एक राज्य से दूसरे राज्य ले जाने के लिए ऐसे गुप्त चेंबरों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।

अब पुलिस और एजेंसियां अलर्ट मोड पर

दोनों मामलों के सामने आने के बाद पूरे प्रदेश में सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी गई है। पुलिस अब हर संदिग्ध वाहन की जांच कर रही है, खासकर उन राज्यों के नंबर वाली गाड़ियों की जो तस्करी के लिए जाने जाते हैं।

गिरफ्तार तस्करों से लगातार पूछताछ की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि डिजिटल जांच, मोबाइल लोकेशन और बैंक ट्रांजैक्शन से यह पता लगाया जा सकेगा कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं। साथ ही यह भी जाना जाएगा कि पकड़ी गई चांदी और मोबाइल फोन की असली सप्लाई किसे होनी थी।

तस्करों के खेल पर लगी लगाम

महासमुंद में 9 करोड़ का सोना और अंबिकापुर में 95 किलो चांदी – यह बरामदगी दिखाती है कि छत्तीसगढ़ पुलिस किसी से कम नहीं है। एक तरफ आम आदमी महंगाई से परेशान है, वहीं दूसरी तरफ तस्कर बेशर्मी से सोने-चांदी के ऐसे खेल खेल रहे थे। लेकिन अब पुलिस की चेकिंग और एजेंसियों की मुस्तैदी से इनकी नींद उड़ गई है।

जांच एजेंसियों के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि इस बरामदगी के बाद भी ऐसा कितना माल देश के अलग-अलग हिस्सों में घूम रहा है। अगर यह पूरा नेटवर्क खुलता है, तो छत्तीसगढ़ पुलिस के लिए यह बड़ी उपलब्धि होगी। तब तक, तस्करों के हौसले पस्त हैं और पुलिस की नज़रें हर उस वाहन पर हैं, जो कुछ ज्यादा ही शक्ल-सूरत बनाकर चल रहा है।

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