देशभर में पेट्रोल-डीजल ₹3 महंगा, विपक्ष हमलावर; अखिलेश यादव बोले- अब साइकिल चलाइए



देशभर में सुबह उठते ही आम आदमी को एक बड़ा झटका लगा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3-3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद कई राज्यों में पेट्रोल की कीमत ₹110 प्रति लीटर के पार पहुंच गई है। लोगों की जेब पर यह बोझ बढ़ते ही राजनीतिक घमासान मच गया है। विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए इसे 'जनता पर नया महंगाई का काला कर्ज़' करार दिया है।


किस राज्य में कितना हुआ पेट्रोल?


नई कीमतों के बाद सोशल मीडिया पर एक लिस्ट तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें अलग-अलग राज्यों के पेट्रोल के दाम बताए गए हैं। इस लिस्ट के मुताबिक, आंध्र प्रदेश में पेट्रोल सबसे महंगा हो गया है। यहाँ कीमत लगभग ₹113.03 प्रति लीटर पहुँच गई है। उसके बाद तेलंगाना में ₹110.89, केरल में ₹110.58 प्रति लीटर दर्ज किया गया है। मध्य प्रदेश में भी पेट्रोल ₹109.71, पश्चिम बंगाल में ₹108.70 और बिहार में ₹108.55 का हो गया है।


राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों में भी कीमतों ने नया रिकॉर्ड बनाया है। राजस्थान में अब पेट्रोल ₹107.97 और महाराष्ट्र में ₹106.68 प्रति लीटर मिलेगा। वहीं छत्तीसगढ़ में यह कीमत करीब ₹103.56 और तमिलनाडु में ₹103.67 प्रति लीटर है। हालाँकि दिल्ली में पेट्रोल अब भी तुलनात्मक रूप से सस्ता है – ₹97.77 प्रति लीटर। उत्तर प्रदेश में ₹97.55 और हरियाणा में ₹98.95 का भाव है।


विपक्ष का सियासी हमला: 'चुनाव खत्म, वसूली शुरू'


इस बढ़ोतरी के तुरंत बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया। पार्टी नेताओं का कहना है कि जैसे ही चुनावी माहौल खत्म हुआ, सरकार ने जनता से 'वसूली' का खेल शुरू कर दिया। उनका तर्क है कि चुनाव से ठीक पहले कीमतें स्थिर रखी गईं, लेकिन अब जब सरकार सत्ता में वापस आ गई है, तो महंगाई का बोझ एक साथ आम लोगों पर डाला जा रहा है।


कांग्रेस नेता सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने का असर सिर्फ गाड़ी वालों पर ही नहीं पड़ता, बल्कि इससे रोटी, सब्जी, दूध, राशन — हर चीज़ महंगी हो जाती है। क्योंकि ट्रक और टेंपो चलाने वालों का खर्च बढ़ता है, तो उसकी मार आम आदमी को खानी पड़ती है।


अखिलेश का तंज: 'अब साइकिल ही सहारा'


समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव भी इस मुद्दे पर पीछे नहीं रहे। उन्होंने अपने बयान में तंज कसते हुए कहा कि अब लोगों के पास साइकिल चलाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। यानी, इतने महंगे पेट्रोल से आम आदमी की गाड़ी चलाने की औकात नहीं रही, अब सिर्फ पैदल या साइकिल ही सस्ता साधन बचा है। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर मीम्स और राजनीतिक पोस्ट का तांता लग गया है। कुछ लोग उनके व्यंग्य को सच्चाई करार दे रहे हैं, तो कुछ इसे सिर्फ राजनीतिक दांवपेच बता रहे हैं।


आम आदमी की जेब पर क्या असर पड़ेगा?


बात सिर्फ कार और बाइक वालों की नहीं है। पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने का सीधा असर आपके किचन में पड़ता है। सोचिए, जब ट्रांसपोर्ट महंगा हो जाता है, तो सब्जी लाने वाले ठेले वाले का खर्च बढ़ता है, आटा पहुंचाने वाले ट्रक का खर्च बढ़ता है। और यह बढ़ा हुआ खर्च आखिर में आपको ही देना पड़ता है — चाहे आप सब्जी खरीदें या दूध का पैकेट। ऑटो-टैक्सी वाले भी फिलहाल परेशान हैं। उनका कहना है कि जब पेट्रोल का किराया ही इतना बढ़ जाएगा, तो किराया न बढ़े, ये नामुमकिन है। और किराया बढ़ा तो सवारी कम होगी, यानी उनकी कमाई घटेगी। यह एक ऐसा चक्र है, जो हर आम आदमी को घेर लेता है।


सरकार का पक्ष क्या है?


केंद्र सरकार की तरफ से इस बढ़ोतरी पर तत्काल कोई बड़ा बयान नहीं आया है। लेकिन पहले सरकार यही तर्क देती रही है कि देश में पेट्रोल-डीजल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत और एक्साइज ड्यूटी पर निर्भर करते हैं। तेल कंपनियां वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के हिसाब से दाम तय करती हैं। हालाँकि, विपक्ष का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें अब उतनी नहीं रही, फिर भी रिटेल कीमतों में बढ़ोतरी क्यों हो रही है?


ग्रामीण भारत पर बड़ा खतरा


इस बढ़ोतरी का सबसे बुरा असर देहात पर पड़ेगा, जहाँ ट्रैक्टर से खेत जोतने से लेकर फसल मंडी पहुंचाने तक के लिए डीजल चाहिए। डीजल महंगा होगा तो खेती की लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा मतलब है कि अनाज और सब्जियाँ और महंगी होंगी। सरकार के लिए यह बड़ी चिंता है क्योंकि महंगाई बढ़ी तो उसका खामियाजा सबसे पहले गरीब और मिडिल क्लास को भुगतना पड़ता है।


सोशल मीडिया पर मचा बवाल


फिलहाल सोशल मीडिया पर यह मुद्दा छाया हुआ है। लोग अलग-अलग राज्यों के भावों की लिस्ट शेयर कर रहे हैं और सरकार से पूछ रहे हैं — 'इतना टैक्स किसलिए? पेट्रोल से ज्यादा टैक्स क्या हम अपनी सरकार को खिलाते हैं?' कई लोगों ने कटाक्ष में लिखा है कि अब पैदल चलना ही सबसे अच्छी एक्सरसाइज है। मीम्स की बाढ़ आ गई है। एक तरफ गाड़ी खाली खड़ी है, दूसरी तरफ परिवार साइकिल पर सवार है — इस तरह की तस्वीरें खूब वायरल हो रही हैं।


 अब आगे क्या होगा?


पेट्रोल-डीजल की कीमतों में यह बढ़ोतरी तय करती है कि आने वाले दिनों में दूध, सब्जी, राशन, कपड़े और ट्रांसपोर्ट — सब कुछ महंगा होने वाला है। अभी तो बढ़ोतरी का नोटिस मिला है, असर कुछ हफ्तों में दिखना शुरू हो जाएगा। अब देखने वाली बात यह है कि सरकार इस पर कोई राहत पैकेज देती है या फिर कीमतें और बढ़ती हैं। अभी तो विपक्ष गरम है, लेकिन आम जनता की परेशानी असली है। इस बढ़ोतरी से सबसे ज्यादा नुकसान मिडिल क्लास और लोअर क्लास को होगा, जिनकी पूरी जिंदगी हर महीने बढ़ते खर्च के बीच किसी तरह चलती है। आशा करते हैं कि सरकार इस मामले पर जल्द कोई कदम उठाए, वरना आने वाला समय और मुश्किल हो सकता है।

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