NEET परीक्षा में बड़ा बदलाव: अगले साल से ऑनलाइन होगा एग्जाम, सरकार ने पहली बार माना पेपर लीक

 


देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर केंद्र सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके दो अहम बातें कहीं – पहली, कि अगले साल से NEET अब ऑनलाइन मोड में आयोजित की जाएगी, और दूसरी, कि इस बार जो परीक्षा रद्द हुई थी, वह 21 जून को दोबारा ली जाएगी। सबसे बड़ी बात – सरकार ने पहली बार खुलकर स्वीकार किया कि पेपर लीक की घटना हुई थी।


पेपर लीक के बाद अब सरकार ने खोली पोल


पिछले कई हफ्तों से NEET परीक्षा को लेकर पूरे देश में बवाल मचा हुआ था। छात्र सड़कों पर उतरे थे, सोशल मीडिया पर #NEETPaperLeak लगातार ट्रेंड कर रहा था। कई राज्यों से परीक्षा केंद्रों में गड़बड़ी और पेपर लीक की शिकायतें आई थीं। मगर सरकार की तरफ से अब तक साफ तौर पर कुछ नहीं कहा गया था। अब आखिरकार शिक्षा मंत्री ने मान लिया कि परीक्षा के साथ छेड़छाड़ हुई है। यह कबूलनामा लाखों उन छात्रों के लिए एक तरह से राहत भी है और गुस्सा भी, जिन्होंने पूरे साल मेहनत करके परीक्षा दी थी, लेकिन बेईमानी के कारण उनका भविष्य अधर में लटक गया।


अब अगले साल से NEET होगी ऑनलाइन


सरकार ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक ठोस कदम उठाने का ऐलान किया है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि अगले साल से NEET परीक्षा ऑनलाइन मोड में कराई जाएगी। यानी अब कागज और पेन की जगह कंप्यूटर और स्क्रीन होंगे। इसके लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पूरे देश में तकनीकी ढांचा तैयार करेगी।


ऑनलाइन परीक्षा के पक्ष में सबसे बड़ा तर्क यही है कि इससे पेपर लीक जैसी संभावनाएं लगभग खत्म हो जाती हैं। प्रश्नपत्र केंद्रों तक पहुंचाने, छपाई और वितरण की प्रक्रिया में जितने जोखिम थे, वे अब नहीं रहेंगे। हर चीज डिजिटली सुरक्षित होगी। हालांकि विशेषज्ञ यह भी कह रहे हैं कि इतने बड़े स्तर पर ऑनलाइन परीक्षा कराना आसान नहीं होगा, खासकर ग्रामीण इलाकों में।


ग्रामीण छात्रों को लेकर चिंता और सरकार के सामने चुनौती


जहां शहरों के छात्र ऑनलाइन परीक्षा को सुरक्षित कदम मान रहे हैं, वहीं देहात और छोटे कस्बों के विद्यार्थियों के मन में तरह-तरह के सवाल हैं। क्या हर जगह अच्छा इंटरनेट होगा? क्या कंप्यूटर की सुविधा सबको मिल पाएगी? क्या तकनीकी गड़बड़ी के कारण किसी छात्र का भविष्य नहीं डूबेगा? ये सभी वाजिब सवाल हैं, और इनका जवाब देना अब सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि वे इस दिशा में काम कर रहे हैं और आने वाले महीनों में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।


21 जून को होगी पुनः परीक्षा, दोबारा मौका मिलेगा छात्रों को


इस साल के उन छात्रों के लिए जिनकी परीक्षा रद्द करनी पड़ी, सरकार ने राहत की खबर दी है। 21 जून को यह परीक्षा दोबारा कराई जाएगी। अब देखना यह होगा कि इस बार पुलिस से लेकर खुफिया एजेंसियां किस तरह परीक्षा केंद्रों पर नजर रखती हैं। सरकार का दावा है कि हर केंद्र पर सख्त निगरानी, डिजिटल ट्रैकिंग और सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती की जाएगी, ताकि पेपर लीक जैसा कोई मामला दोबारा न हो।


छात्रों का मनोबल टूटा, भरोसा बहाल करना बड़ी चुनौती


जो छात्र पूरे साल रात-दिन पढ़ाई करके परीक्षा केंद्र पर पहुंचे थे, उनका भरोसा टूट चुका है। कई माता-पिता ने अपनी जमा-पूंजी लगाकर बच्चों का कोचिंग में एडमिशन कराया था। पेपर लीक की खबर ने उनकी सारी मेहनत पर पानी फेर दिया। अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन छात्रों का खोया हुआ भरोसा लौटाना है। शिक्षा मंत्री ने यह जरूर कहा है कि दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी और कई गिरफ्तारियां पहले ही हो चुकी हैं।


नए सिस्टम पर भरोसा या नहीं? विशेषज्ञों की राय अलग-अलग


शिक्षा जानकारों की दो राय हैं। एक पक्ष कहता है कि ऑनलाइन परीक्षा ही आखिरी उपाय है, क्योंकि पेन-पेपर मोड में सुरक्षा के जितने भी पैमाने बना लो, एक न कमी रह ही जाती है। दूसरा पक्ष चेताता है कि बिना तैयारी के ऑनलाइन परीक्षा लागू करना उतना ही बड़ा जोखिम हो सकता है, क्योंकि साइबर अटैक और डिजिटल धोखाधड़ी के मामले भी कम नहीं हैं।


लेकिन इतना तय है कि इस बार के हंगामे ने सरकार की नींद उड़ा दी है, और अब वे नए सिरे से सिस्टम खड़ा करने में जुट गई है।


अंत में – उम्मीद और चुनौती के बीच छात्र


फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि 21 जून को होने वाली परीक्षा कैसी होगी और क्या सच में ऑनलाइन परीक्षा से पेपर लीक की समस्या खत्म हो पाएगी। लाखों छात्रों का भविष्य इस पर टिका है। जितना यह फैसला साहसिक है, उतना ही जिम्मेदारी भरा भी। उम्मीद करते हैं कि सरकार तकनीकी तैयारियों के साथ-साथ छात्रों की मानसिक स्थिति को भी समझे और हर संभव मदद करे। तब जाकर NEET का नाम सुनते ही छात्रों के मन में डर की जगह भरोसा आएगा।

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