छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में दवा कारोबारियों का विरोध अब तेवर दिखाने लगा है। ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियों के बढ़ते दबदबे और लगातार हो रही नियमों की अनदेखी से परेशान मेडिकल स्टोर संचालकों ने 20 मई को पूरे देश में बंद का आह्वान किया है। रायपुर के केमिस्ट और ड्रगिस्ट भी इस बंद को पूरा समर्थन देंगे। कई दुकानें उस दिन बंद रहेंगी। लेकिन सबसे बड़ी बात — अब इस विवाद में एक नया मोड़ आ गया है: AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए बन रहे फर्जी प्रिस्क्रिप्शन।
व्यापारियों का कहना है कि अब लोग AI टूल्स की मदद से नकली डॉक्टर की पर्ची बनाकर ऑनलाइन दवाएं मंगा रहे हैं। और ई-फार्मेसी कंपनियां मात्र औपचारिकता भर के लिए इन प्रिस्क्रिप्शन को देखकर दवाएं भेज दे रही हैं। यह खेल अब सिर्फ व्यापार का नहीं, बल्कि मरीजों की जान का मामला बन गया है।
ऑनलाइन दवा बिक्री पर क्यों भड़के हैं कारोबारी?
रायपुर के मेडिकल स्टोर संचालकों के अनुसार, ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियां भारी छूट और डिस्काउंट के जाल बिछाकर बाजार पर कब्जा करने की कोशिश कर रही हैं। स्थानीय दुकानदार टैक्स, लाइसेंस, कर्मचारियों की सैलरी, बिजली बिल और दर्जनों नियमों का पालन करते हुए मुश्किल से गुजारा कर रहे हैं। वहीं, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म कई बार इन नियमों से बचकर कारोबार कर रहे हैं।
लेकिन असली चिंता का विषय बिना वैध प्रिस्क्रिप्शन के संवेदनशील दवाओं की बिक्री है। कई ऐसी दवाएं (जैसे एंटीबायोटिक्स, स्टेरॉयड, पेनकिलर) जिन्हें डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए, वे आसानी से ऑनलाइन मिल रही हैं। व्यापारियों का कहना है कि इससे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस (यानी दवा का असर न करना) और ड्रग्स के दुरुपयोग का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
एक रायपुर स्थित फार्मासिस्ट ने चिंता जताते हुए कहा – "अब लोग AI से बना प्रिस्क्रिप्शन दिखाकर कफ सिरप से लेकर पेनकिलर तक ऑर्डर कर रहे हैं। ऑनलाइन दवा देने वाले उसे सिर्फ औपचारिकता समझकर पास कर देते हैं। यह बहुत खतरनाक है।"
AI से फर्जी प्रिस्क्रिप्शन – नया डिजिटल खतरा
AI टूल्स अब इतने उन्नत हो चुके हैं कि कोई भी व्यक्ति किसी भी डॉक्टर का असली प्रिस्क्रिप्शन लेकर उसे एडिट कर सकता है – दवा बदल सकता है, खुराक बढ़ा सकता है, या पूरी तरह से नया नकली प्रिस्क्रिप्शन जेनरेट कर सकता है। कई ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म पर इन दस्तावेजों की वास्तविक जांच के लिए न तो तकनीकी व्यवस्था है, न ही समय और संसाधन। नतीजा – गलत दवा, गलत मात्रा में, गलत व्यक्ति तक पहुंच रही है।
मेडिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। जिस तरह नकली नोटों पर RBI सख्ती दिखाती है, उसी तरह नकली प्रिस्क्रिप्शन पर भी सख्त कानून और जांच प्रणाली होनी चाहिए।
एक जाने-माने डॉक्टर ने बताया – "हमारे पास ऐसे मामले आ रहे हैं जहां मरीज ने ऑनलाइन दवा लेने के बाद साइड इफेक्ट्स से हॉस्पिटल में भर्ती हुआ। जब हमने पर्ची देखी तो वह पूरी तरह फर्जी निकली। यह बहुत चिंता की बात है।"
ऑफलाइन दुकानों की मजबूती – फार्मासिस्ट की सतर्कता
रायपुर के फार्मासिस्ट बताते हैं कि स्थानीय मेडिकल स्टोर में दवा देने से पहले एक अनकहा लेकिन पक्का नियम होता है – पर्ची पढ़ना, मरीज से दो शब्द पूछना, और दवा की उचितता सुनिश्चित करना। यह वह सुरक्षा कवच है, जो ऑनलाइन सिस्टम में अब तक नहीं बैठाया जा सका है।
एक मेडिकल स्टोर मालिक ने सीधे शब्दों में कहा – "दवा कोई सब्जी या कपड़े नहीं है। यह जान भी दे सकती है और ले भी सकती है। ऑनलाइन सिस्टम को बिना ठोस नियमों के अनुमति देना आत्मघाती होगा।"
20 मई का बंद – पूरे देश में एक साथ आवाज
पूरे देश में मेडिकल व्यापारियों ने 20 मई को देशव्यापी बंद का आह्वान किया है। रायपुर के स्थानीय संगठनों ने भी इसे पूरा समर्थन देने का फैसला किया है। हालांकि यह भी तय किया गया है कि अस्पतालों, नर्सिंग होम और इमरजेंसी सेवाओं के आसपास दवाएं उपलब्ध रहेंगी, ताकि किसी भी मरीज को परेशानी न हो। सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए मजबूत तर्क देकर दुकानें बंद रखी जाएंगी।
आम लोगों की दो राय
इस मुद्दे को लेकर आम उपभोक्ताओं के बीच मतभेद साफ नजर आता है। एक तरफ युवा और सोशल मीडिया पर सक्रिय लोग कहते हैं कि ऑनलाइन दवा से समय, पैसा और मेहनत तीनों बचती है। घर बैठे मंगाओ और डिस्काउंट पाओ – यह आधुनिकता का तरीका है।
लेकिन दूसरी तरफ अधेड़ और बुजुर्ग उपभोक्ता भी हैं, जिनका कहना है – "हम भले ही ऑनलाइन खाना मंगा लें, लेकिन दवा के लिए अब भी दुकान पर जाना ही सुरक्षित लगता है। पर्ची दिखाना, दवा समझना और फार्मासिस्ट से बात करना किसी काम से कम नहीं है।"
सोशल मीडिया पर AI प्रिस्क्रिप्शन के मुद्दे ने लोगों की चिंता को हवा दे दी है। कई लोग पोस्ट कर रहे हैं – "पहले नकली नोट थे, अब नकली प्रिस्क्रिप्शन... क्या अस्पताल जाने का भरोसा भी टूटेगा?"
विशेषज्ञों की राय – डिजिटल हेल्थ पर नियंत्रण जरूरी
विशेषज्ञ मानते हैं कि दोनों मॉडल – ऑनलाइन और ऑफलाइन – के अपने फायदे और नुकसान हैं। लेकिन फिलहाल सबसे बड़ी जरूरत डिजिटल प्रिस्क्रिप्शन को सत्यापित करने की तकनीक और उसके लिए कड़े नियम बनाने की है। AI से बने फर्जी प्रिस्क्रिप्शन को पहचानने वाला सॉफ्टवेयर, वैलिडेशन सिस्टम और रियल-टाइम चेकिंग – ये अब जरूरत बन चुके हैं।
सरकार को भी इस मामले में स्पष्ट नीति लानी होगी। तब तक, 20 मई का बंद और मेडिकल कारोबारियों का यह विरोध दिखाएगा कि आखिर देश में दवा बेचने के जिस पेशे में ‘जिम्मेदारी’ सबसे बड़ी दवा है, उसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म कितना संभाल पाता है।
दवा का कारोबार व्यापार से अधिक सेवा है। रायपुर में मेडिकल स्टोर संचालकों का यह विरोध और 20 मई का देशव्यापी बंद यही कहना चाहता है कि दवा बिना जांच और सतर्कता के नहीं बेची जानी चाहिए। चाहे ऑफलाइन दुकान हो या ऑनलाइन मंच – एक जैसे ही कड़े नियम और जांच हर किसी पर लागू होने चाहिए।
जब तक AI बनाये नकली प्रिस्क्रिप्शन और बिना जांच के बंद हो रही डिलीवरी पर नियंत्रण नहीं होता, तब तक मरीजों की सुरक्षा खतरे में बनी रहेगी। यह वह लड़ाई है जहां एक तरफ बिजनेस है, तो दूसरी तरफ जिम्मेदारी। सरकार को अब चुप रहने का कोई अधिकार नहीं रह गया है।

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