नई दिल्ली | 4 जून 2026
भारत और वेनेजुएला के बीच बुधवार को नई दिल्ली में एक अहम द्विपक्षीय बैठक हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने इस दौरान कई अहम मुद्दों पर बातचीत की और दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई।
कौन हैं डेल्सी रोड्रिगेज?
डेल्सी रोड्रिगेज वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की कार्यवाहक राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति हैं। वह भारत को अपनी 'गुड विल' (सद्भावना) यात्रा पर आई हैं। विपक्षी नेता जुआन गुइडो को कुछ देशों ने कार्यवाहक राष्ट्रपति माना था, लेकिन मादुरो की सरकार को भारत और रूस जैसे कई देशों का समर्थन हासिल है।
बैठक में क्या हुआ?
विदेश मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस बैठक में दोनों नेताओं ने व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि, स्वास्थ्य और रक्षा सहित कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाने पर चर्चा की। खासतौर पर ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी और महत्वपूर्ण खनिजों के सहयोग को लेकर भी बात हुई।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को अपना 'विश्वसनीय भागीदार' बताते हुए वेनेजुएला के साथ दोस्ती और 'ग्लोबल साउथ' के साझा एजेंडे को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
'ग्लोबल साउथ' पर क्यों फोकस?
'ग्लोबल साउथ' (वैश्विक दक्षिण) एक ऐसा मंच है जिसे भारत ने विकासशील देशों के हितों की आवाज उठाने के लिए बनाया है। पीएम मोदी ने साल 2023 में पहली बार इस समूह की बैठक की अध्यक्षता की थी। वेनेजुएला को भारत का सहयोग इसलिए भी अहम है क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से वहां की अर्थव्यवस्था मुश्किलों से गुजर रही है। ऐसे में भारत जैसे देश के साथ संबंध उनके लिए आर्थिक और राजनयिक रूप से बेहद फायदेमंद साबित हो सकते हैं।
बता दें कि वेनेजुएला, दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार वाला देश है। हालांकि उत्पादन में गिरावट के बाद वह अब सऊदी अरब, ईरान और कनाडा जैसे देशों से पीछे चला गया है। भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है, ऐसे में वेनेजुएला के साथ रणनीतिक साझेदारी दोनों देशों के लिए ही फायदेमंद साबित हो सकती है।
इस बैठक के बाद भारत ने वेनेजुएला को मानवीय सहायता के तौर पर 20 मेट्रिक टन दवाएं और चिकित्सा उपकरण भी भेंट किए हैं।
आगे क्या?
यह बैठक दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा दे सकती है। अब देखना होगा कि भारत, वेनेजुएला के साथ अपने व्यापार और ऊर्जा संबंधों को कैसे आगे बढ़ाता है और क्या इसका असर दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ता है। फिलहाल, सभी की निगाहें इस साझेदारी के ठोस नतीजों पर टिकी हैं।

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