छत्तीसगढ़: MBBS इंटर्न्स के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग को लेकर IMA ने सौंपा ज्ञापन, 30 हजार रुपये का उठाया मुद्दा


रायपुर | 5 जून 2026

छत्तीसगढ़ में एमबीबीएस इंटर्न्स के स्टाइपेंड को लेकर हड़कंप मच गया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के नेतृत्व में मेडिकल छात्रों और इंटर्न्स ने राज्य सरकार से स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग की है। इंटर्न्स का कहना है कि मौजूदा स्टाइपेंड बेहद कम है और इसे बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है।

क्या है मांग?

इंटर्न्स वर्तमान में 15,900 रुपये प्रति माह का स्टाइपेंड प्राप्त कर रहे हैं। छात्रों की मांग है कि इसे लगभग 30,000 रुपये प्रति माह किया जाए।

क्यों उठी मांग?

इस मांग के पीछे कई गंभीर कारण हैं:

  • भारी कार्यभार: इंटर्न्स को अस्पतालों में लंबी ड्यूटी करनी पड़ती है, जिसमें उनकी जिम्मेदारी बहुत अधिक होती है।

  • राष्ट्रीय औसत से कम: छत्तीसगढ़ में इंटर्न्स को मिलने वाला स्टाइपेंड अन्य राज्यों के मुकाबले काफी कम है।

  • बढ़ता खर्च: महंगाई और बढ़ते रहन-सहन के खर्च को देखते हुए यह राशि अपर्याप्त है।

  • पुरानी व्यवस्था: पिछले कई वर्षों से स्टाइपेंड में कोई खास वृद्धि नहीं हुई है।

क्या है वर्तमान स्थिति?

वर्तमान में, छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा MBBS इंटर्न्स को 15,900 रुपये प्रति माह का स्टाइपेंड दिया जाता है। पहले यह 12,600 रुपये था, जिसे बढ़ाकर 2023 में 15,900 रुपये किया गया था। हालांकि, यह राशि अभी भी कम मानी जा रही है।

FYI: यहां एक और बात ध्यान देने वाली है। मध्य प्रदेश में इंटर्न्स का स्टाइपेंड 14,337 रुपये है, जबकि छत्तीसगढ़ में यह उससे थोड़ा अधिक 15,900 रुपये है। हालांकि, दोनों राज्यों में इंटर्न्स इसे कम ही मान रहे हैं। पीजी डॉक्टरों को छत्तीसगढ़ में पहले 53,550 से 59,200 रुपये मिलते थे, जिन्हें बढ़ाकर 67,500 से 74,600 रुपये कर दिया गया था

क्या कहते हैं छात्र?

इंटर्न्स का कहना है कि अस्पतालों में वे मरीजों की सेवा में अहम भूमिका निभाते हैं लेकिन उनका भुगतान उचित नहीं है। एक छात्र ने कहा, "इतने काम के बावजूद स्टाइपेंड बहुत कम है। हमें सम्मानजनक भुगतान मिलना चाहिए। सरकार जल्द निर्णय ले, यही हमारी मांग है।"

छात्रों की चेतावनी

छात्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी मांगें जल्द ही पूरी नहीं की गईं, तो वे हड़ताल या कार्य बहिष्कार जैसे कदम उठाने को मजबूर होंगे। इससे राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं, क्योंकि इंटर्न्स अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ होते हैं।

आगे क्या?

IMA के इस कदम के बाद अब सरकार पर स्टाइपेंड बढ़ाने का दबाव बढ़ गया है। फिलहाल, सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। देखना यह होगा कि क्या सरकार छात्रों की इस मांग पर सहमति जताती है या मामला और गरम होता है।

Post a Comment

0 Comments