रायपुर। छत्तीसगढ़ में कथित जिला खनिज न्यास (DMF) घोटाले की जांच एक बार फिर तेज हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राज्य के पांच जिलों में एक साथ छापेमारी कर कई कारोबारियों, सप्लायरों और कांग्रेस से जुड़े नेताओं के ठिकानों की जांच की। कार्रवाई के दौरान एक करोड़ रुपये से अधिक नकदी मिलने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य भी अपने कब्जे में लिए हैं।
पांच जिलों में एक साथ छापेमारी
ED की टीमों ने रायपुर, धमतरी, दुर्ग, कोरबा और अंबिकापुर में कुल नौ स्थानों पर दबिश दी। इनमें चार आवासीय परिसर और पांच व्यावसायिक प्रतिष्ठान शामिल थे। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, सबसे अधिक नकदी कोरबा और धमतरी के ठिकानों से बरामद हुई है। हालांकि बरामद राशि और अन्य जब्ती का विस्तृत ब्यौरा जांच एजेंसी की आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।
कई कारोबारी और कांग्रेस नेता जांच के दायरे में
जांच के दौरान जिन लोगों के परिसरों में तलाशी ली गई, उनमें कृषि, सप्लाई और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े कई प्रमुख नाम शामिल बताए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, कारोबारी प्रकाश सालुंके, किशोर एग्रो समूह से जुड़े शाश्वत लुणावत, मानसून एग्रो से जुड़े कारोबारी और कांग्रेस नेता राकेश गुप्ता तथा व्यवसायी दीपेश गांधी से जुड़े परिसरों की भी जांच की गई।
राकेश गुप्ता का नाम विशेष रूप से चर्चा में है क्योंकि वे कृषि विभाग से जुड़े बड़े सप्लायरों में गिने जाते हैं। इसके अलावा, वे सरगुजा क्षेत्र में कांग्रेस संगठन से भी जुड़े रहे हैं। जांच एजेंसियां पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में विभिन्न विभागों को की गई आपूर्ति और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन की भी पड़ताल कर रही हैं।
सुरक्षा के बीच चला तलाशी अभियान
ED की कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती गई। कई स्थानों पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवान तैनात किए गए थे, ताकि तलाशी प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी की जा सके। अधिकारियों ने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंकिंग दस्तावेज और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए हैं, जिनका अब तकनीकी विश्लेषण किया जाएगा।
क्या है DMF फंड? क्यों है यह विवाद में?
जिला खनिज न्यास (District Mineral Foundation) एक विशेष फंड है, जिसे खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए बनाया गया था। इस फंड का उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, सड़क, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं पर किया जाना होता है। आरोप है कि कुछ क्षेत्रों में इस फंड के उपयोग में अनियमितताएं हुईं और सरकारी धन का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया।
इन्हीं आरोपों के आधार पर आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW), भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) और बाद में ED ने मामले की जांच शुरू की थी।
कमीशनखोरी के आरोपों की भी जांच
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां सरकारी ठेकों और परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया में कथित कमीशनखोरी के आरोपों की भी जांच कर रही हैं। आरोप है कि कुछ मामलों में परियोजनाओं की स्वीकृति और भुगतान के बदले 25 से 40 प्रतिशत तक कमीशन वसूला जाता था। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है।
पहले भी कई बड़े नाम आ चुके हैं जांच के घेरे में
DMF मामले में इससे पहले भी कई चर्चित नाम सामने आ चुके हैं। जांच एजेंसियों ने पूर्व कोरबा कलेक्टर रानू साहू, पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया और कथित बिचौलिया सूर्यकांत तिवारी सहित कई व्यक्तियों की भूमिका की जांच की है। पिछले कुछ वर्षों में इस मामले को लेकर कई बार छापेमारी और पूछताछ की कार्रवाई हो चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया तलाशी अभियान में मिले दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जांच को नया मोड़ दे सकते हैं। यदि वित्तीय लेन-देन में नए नाम सामने आते हैं, तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल
ED की कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति भी गरमा गई है। भाजपा ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई बताया है, जबकि कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि केंद्रीय एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि जांच एजेंसी ने अभी तक किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं किया है और मामले की जांच जारी है।
फिलहाल सभी की नजर ED की अगली रिपोर्ट पर टिकी हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बरामद नकदी, कारोबारी लेन-देन और DMF फंड के बीच कितना सीधा संबंध स्थापित होता है। लेकिन इतना तय है कि इस कार्रवाई ने छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित DMF घोटाले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है, और आम लोगों की नजर अब इस सवाल पर है कि क्या इस बार इस घोटाले में शामिल बड़े लोग भी कानून के घेरे में आएंगे या फिर यह एक और राजनीतिक बहस बनकर रह जाएगा।

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