
Image Source : FB/Vikalshrivastava
राजनांदगांव। आमतौर पर जंगलों की बात होती है तो तेंदूपत्ते की, लेकिन इस बार चर्चा थी उन बच्चों की, जिनके परिवार इन्हीं पत्तों से रोजी-रोटी कमाते हैं। स्पीकर हाउस में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों के बच्चों को छात्रवृत्ति प्रदान कर उनकी शिक्षा को नई राह दिखाने की कोशिश की गई। यह आयोजन उन बच्चों के लिए था, जिनके हाथों ने कभी तेंदूपत्ता बीनना सीखा है, लेकिन जिनकी आँखें डॉक्टर, इंजीनियर और IAS बनने के सपने देखती हैं।
“हमारे हाथों की लकीरें नहीं, हमारी मेहनत हमारी पहचान है”
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, अभिभावक, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। यहाँ उन बच्चों के चेहरे पर न सिर्फ शिक्षा की चमक थी, बल्कि संघर्ष की वो कहानियाँ भी थीं, जिन्हें शब्दों में बयां करना मुश्किल है।
कई बच्चों ने बताया कि उनके घरों तक अच्छे स्कूल नहीं हैं, किताबें जुटाना भी चुनौती है, लेकिन उन्होंने पढ़ने का जुनून कभी कम नहीं होने दिया। छात्रवृत्ति मिलने से अब उनके लिए आगे बढ़ना थोड़ा आसान हो गया है।
“बेटी भी बनेगी आर्म्स अधिकारी, सपना अब साकार होता दिखा”
कार्यक्रम में एक छात्रा ने कहा – “पापा तेंदूपत्ता बीनने जाते हैं, मैं चाहती हूँ कि एक दिन मैं उनके लिए भारत माता के लिए वर्दी धारण करूं। यह छात्रवृत्ति मेरे लिए उस सपने की पहली सीढ़ी है।” उसकी बात सुनकर आँखें नम हो गईं और वहाँ तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी।
इसी तरह कई अन्य विद्यार्थियों ने भी अपने सपने साझा किए। किसी का सपना शिक्षक बनने का था, तो किसी का नर्स, वकील या प्रशासनिक अधिकारी बनने का। यह कार्यक्रम उम्मीदों और संकल्पों का संगम बन गया।
शिक्षा ही बदलाव की कुंजी – वक्ताओं ने कहा, ‘आगे बढ़ो, संघर्ष करो, बस रुकना नहीं’
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा वह हथियार है, जिससे गरीबी की हर परत को चीरा जा सकता है। तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों के बच्चे अक्सर सीमित संसाधनों में भी शानदार प्रदर्शन करते हैं। बस उन्हें सही प्रोत्साहन और थोड़ा सहारा चाहिए, जो सरकार इन योजनाओं के जरिए दे रही है।
एक अतिथि ने कहा – “तुम्हारी मेहनत ही तुम्हारी सबसे बड़ी पूंजी है। यह छात्रवृत्ति केवल पैसे नहीं है, यह तुम्हारी उस लगन को सलाम है, जो तुम्हें क्लास में लाने से लेकर सपने देखने तक प्रेरित करती है।”
सरकार की योजनाओं का सकारात्मक असर
छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता संग्रहण लाखों परिवारों की आजीविका का मुख्य साधन है। हाल ही में प्रदेश के हजारों विद्यार्थियों के खातों में करोड़ों रुपए की छात्रवृत्ति और शिक्षा प्रोत्साहन राशि हस्तांतरित की गई थी, जिससे वनांचल क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिली है। राज्य सरकार और लघु वनोपज सहकारी संघ के माध्यम से संग्राहक परिवारों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चल रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी छात्रवृत्ति योजनाएं बच्चों को स्कूल से जोड़े रखने और उन्हें उच्च शिक्षा की ओर प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
अभिभावकों ने जताया आभार
कार्यक्रम के दौरान अभिभावक भी बेहद भावुक नजर आए। एक पिता ने कहा – “मैं दिनभर धूप में पत्ते बीनता हूँ ताकि मेरे बच्चों की किताबों का खर्च निकल सके। लेकिन कई बार हाथ खाली भी लौटना पड़ता है। जब हम सोचते थे कि अब पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ेगी, तब ये छात्रवृत्ति हाथ आ गई। ये हमारे लिए वरदान से कम नहीं है।”
एक माँ ने आंखों में आंसू लिए कहा – “बेटा, हम नहीं पढ़ सके, पर तुम्हें पढ़ाएंगे। ये छात्रवृत्ति तुम्हारे जज्बे की जीत है।”
अब हर सपना होगा पूरा, बस थोड़ा सहारा चाहिए
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी गईं। वक्ताओं ने उनसे कहा कि वे इस अवसर को अपना हथियार बनाएं और अपने जिले, प्रदेश और देश का नाम रोशन करें।
इस आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों और सरकारें सही दिशा में सहयोग करें, तो वनांचल के बच्चे भी किसी से कम नहीं हैं। तेंदूपत्ते की टोकरियों में अब उम्मीदों के फूल खिलने लगे हैं। ये बच्चे अब सपने देखते हैं – और उन सपनों को पूरा करने के लिए उनके पास अब एक नया हौसला है।
राजनांदगांव की धरती पर हुआ यह कार्यक्रम सिर्फ छात्रवृत्ति बांटने का नहीं था, यह उस नई सुबह का वादा था, जब तेंदूपत्ता का हर बच्चा अपनी मेहनत के बूते किसी भी मुकाम पर पहुंच सके। बस जरूरत है – हमारे विश्वास और प्रोत्साहन की।
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