रायपुर में आज से सफाई ठेकेदारों की हड़ताल, 70 वार्डों में व्यवस्था प्रभावित होने के आसार; 4 महीने से भुगतान नहीं मिलने का आरोप

 

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रायपुर की साफ-सफाई एक बार फिर दांव पर लग गई है। शहर के 70 वार्डों में सफाई का जिम्मा संभालने वाले ठेकेदारों ने अचानक हड़ताल कर दी है। उनका आरोप है कि नगर निगम प्रशासन ने पिछले चार महीनों से उनका भुगतान नहीं किया है। जब हर तरफ से दरकिनार किया गया तो मजबूरन उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। अब इसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ सकता है, क्योंकि हड़ताल से घर-घर कचरा उठाने से लेकर सड़कों और बाजारों की सफाई तक, सब कुछ प्रभावित होगा।

क्या है पूरा मामला? ठेकेदार क्यों हैं नाराज़?

रायपुर नगर निगम में सफाई व्यवस्था ठेका प्रणाली पर निर्भर है। निगम के सभी 70 वार्डों की सफाई के लिए अलग-अलग ठेकेदार लगे हैं। ये ठेकेदार कर्मचारियों को वेतन देने, वाहन संचालन, डीजल, रखरखाव और अन्य खर्चों को अपने स्तर पर वहन करते हैं। लेकिन जब उन्हें समय पर भुगतान नहीं मिलता, तो पूरी व्यवस्था चरमराने लगती है।

ठेकेदारों का कहना है कि पिछले चार महीने से उनका लाखों रुपये का बकाया है। वे लगातार निगम के अधिकारियों से मिल रहे थे, ज्ञापन दे रहे थे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब जबकि उनके सामने कर्मचारियों के वेतन और अन्य देनदारियों का संकट खड़ा हो गया, तो उन्होंने यह कदम उठाने का फैसला किया।

एक ठेकेदार ने बताया – "हमने कई बार निवेदन किया, लेकिन हमारी बात किसी ने नहीं सुनी। अब हमने काम बंद कर दिया है। जब तक हमारा बकाया नहीं मिलता, सफाई नहीं होगी।"

हड़ताल का असर कहाँ-कहाँ होगा?

हड़ताल का सीधा असर पूरे शहर की सफाई व्यवस्था पर पड़ेगा। घर-घर से कचरा उठाने वाले वाहन नहीं निकलेंगे, सड़कों पर झाड़ू नहीं लगेगी, नालों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई ठप हो जाएगी। कुछ ही दिनों में शहर के कोने-कोने में कचरे के ढेर लगना शुरू हो जाएंगे।

खास बात यह है कि यह हड़ताल ऐसे समय हुई है जब रायपुर में मानसून से पहले सफाई अभियान चलाने की योजना बनाई जा रही थी। नालों और जल निकासी मार्गों को साफ करना इस मौसम में सबसे ज्यादा जरूरी होता है, ताकि बारिश में जलभराव की समस्या न हो। लेकिन अब इस काम पर भी संकट आ गया है।

पहले भी हो चुके हैं हंगामे

रायपुर में सफाई व्यवस्था को लेकर यह पहली बार नहीं है कि कोई विवाद खड़ा हुआ हो। इससे पहले कचरा उठाने वाले वाहनों के चालक और हेल्पर भी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर चले गए थे। तब लगातार कई दिनों तक गंदगी के ढेर शहर की शोभा बने रहे थे। लोगों को जबरदस्त परेशानी उठानी पड़ी थी। इस बार ठेकेदारों के हड़ताल पर जाने से स्थिति और गंभीर हो सकती है, क्योंकि व्यवस्था की पूरी कमान उनके हाथ में है।

निगम प्रशासन का क्या कहना है?

नगर निगम प्रशासन का कहना है कि वे इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और जल्द से जल्द समाधान निकालने का प्रयास कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, वित्तीय प्रक्रियाओं और कुछ तकनीकी औपचारिकताओं के कारण भुगतान में देरी हुई हो सकती है। एक अधिकारी ने कहा – "जिन ठेकेदारों का भुगतान लंबित है, उनकी सूची तैयार कर ली गई है। जल्द ही प्रक्रिया पूरी कर राशि जारी कर दी जाएगी।"

हालाँकि ठेकेदारों का कहना है कि उन्हें बार-बार ऐसे आश्वासन मिलते रहे हैं, लेकिन हकीकत नहीं बदली। इस बार वे आश्वासन के बजाय ठोस कार्रवाई चाहते हैं।

नागरिक परेशान, मानसून से पहले बढ़ी चिंता

रायपुरवासी इस हड़ताल की खबर सुनकर चिंता में पड़ गए हैं। लोगों का कहना है कि शहर में पहले से ही सफाई व्यवस्था में ढिलाई रहती है, और अब हड़ताल के चलते स्थिति और बिगड़ सकती है। एक स्थानीय निवासी ने कहा – “गर्मी का मौसम चल रहा है। अगर कचरा नहीं उठा तो बीमारियाँ फैलने लगेंगी। और ऊपर से मानसून आ रहा है, तब तो हालात और भी खराब हो जाएंगे।”

वहीं, कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि प्रशासन को समय से ठेकेदारों का भुगतान करना चाहिए था। देरी से उन्हें मजबूरन यह कदम उठाना पड़ा है, और इसका दोष निगम पर ही जाता है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल ठेकेदारों और निगम प्रशासन के बीच बातचीत की संभावना बनी हुई है। शहर के 70 वार्डों की सफाई ठप होने से पहले अगर कोई ठोस पहल नहीं हुई, तो रायपुर एक बार फिर उसी दुर्गंध और गंदगी के घेरे में आ सकता है, जिससे हर साल मानसून से पहले जूझना पड़ता है।

नगर निगम के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती बकाए का भुगतान करना और ठेकेदारों को समझाना है। दूसरी तरफ, ठेकेदार अपनी जमीन पर अडे हुए हैं – जब तक पैसा नहीं मिलता, काम नहीं होगा। बीच में फंसी जनता है, जो साफ सड़कें और समय पर कचरा उठाने की उम्मीद करती है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस संकट को कैसे सुलझाता है। क्योंकि एक ओर वित्तीय प्रक्रिया की पेचीदगियाँ हैं, तो दूसरी ओर लाखों लोगों की रोजमर्रा की सुविधा और स्वास्थ्य का सवाल। फिलहाल, सबकी निगाहें बैठक के अगले दौर और उसके परिणाम पर टिकी हैं।

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