अगले दशक में भारत की स्पेस इकॉनमी 45 अरब डॉलर तक पहुँचेगी, 400+ स्टार्टअप्स बनेंगे ग्रोथ का इंजन: डॉ. जितेंद्र सिंह

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सरकार के सहयोग और निजी क्षेत्र की भागीदारी से तेज़ी पकड़ रहा भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र, वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत स्थिति


नई दिल्ली। भारत की स्पेस इकॉनमी तेजी से नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रही है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि आने वाले दशक में भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 45 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की राह पर है। इस विकास में 400 से अधिक स्पेस स्टार्टअप्स अहम भूमिका निभा रहे हैं, जो देश के अंतरिक्ष क्षेत्र को अगले स्तर तक ले जाने के लिए तैयार हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में भारत के स्पेस सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां यह क्षेत्र मुख्य रूप से सरकारी एजेंसियों तक सीमित था, वहीं अब निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। इससे इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और निवेश के नए रास्ते खुले हैं।

भारत सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों के जरिए निजी कंपनियों के लिए दरवाजे खोले हैं। इसके तहत लॉन्च सर्विसेज, सैटेलाइट मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सर्विसेज और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में स्टार्टअप्स को काम करने का मौका मिला है। यही वजह है कि आज भारत में 400 से ज्यादा स्पेस स्टार्टअप्स सक्रिय हैं, जो नए-नए समाधान विकसित कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का स्पेस सेक्टर वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाली सेवाएं प्रदान करने की क्षमता भारत को अन्य देशों से अलग बनाती है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भी भारतीय स्पेस सेक्टर के साथ सहयोग करने में रुचि दिखा रही हैं।

इस ग्रोथ के पीछे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की बड़ी भूमिका रही है। ISRO ने न केवल कई सफल मिशनों को अंजाम दिया है, बल्कि देश में स्पेस टेक्नोलॉजी के विकास की मजबूत नींव भी रखी है। अब निजी क्षेत्र के साथ मिलकर यह विकास और तेज होने की उम्मीद है।

सरकार का फोकस अब स्पेस सेक्टर को एक बड़े आर्थिक इंजन के रूप में विकसित करने पर है। इसके लिए नीतिगत सुधार, निवेश को बढ़ावा और स्टार्टअप्स को सपोर्ट देने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। इससे न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि भारत की वैश्विक स्थिति भी मजबूत होगी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि भारत की युवा प्रतिभा और तकनीकी क्षमता इस क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है। स्टार्टअप्स की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि देश में इनोवेशन का माहौल मजबूत हो रहा है।

कुल मिलाकर, भारत की स्पेस इकॉनमी आने वाले समय में देश की आर्थिक प्रगति का एक अहम स्तंभ बन सकती है। अगर मौजूदा गति बनी रही, तो भारत न केवल अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभरेगा।

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