रायपुर। 28 जून का दिन रायपुर के लाखों परिवारों के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी लेकर आ रहा है। इस दिन 0 से 5 वर्ष तक के करीब 3 लाख 45 हजार बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियाँ तेज कर दी हैं। यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि कोई भी बच्चा इस अभियान से छूट न जाए। यह अभियान केवल एक टीकाकरण नहीं, बल्कि ‘दो बूंद जिंदगी की’ के संकल्प को साकार करने की एक बड़ी मुहिम है।
पोलियो मुक्त भारत के सपने को बनाए रखना
भारत को वर्ष 2014 में पोलियो मुक्त घोषित किया गया था। यह उपलब्धि लाखों स्वास्थ्य कर्मियों, आशा-आंगनबाड़ी बहनों और माता-पिता के अथक प्रयासों से हासिल हुई थी। हालाँकि, पोलियो वायरस अभी भी दुनिया के कुछ हिस्सों में मौजूद है। इसलिए पोलियो पर जीत को बरकरार रखने के लिए समय-समय पर पल्स पोलियो अभियान चलाना बेहद जरूरी है। 28 जून को रायपुर में यही किया जाएगा – हर बच्चे की जान में नई रफ्तार भरने का काम।
क्या होगा अभियान में, क्या हैं तैयारियाँ?
रायपुर के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सैकड़ों टीकाकरण बूथ बनाए जाएंगे, जहाँ माता-पिता अपने बच्चों को लेकर पहुँच सकते हैं। लेकिन इस बार पहले से कहीं अधिक सक्रियता दिख रही है। 28 जून को ‘बूथ दिवस’ मनाया जाएगा। इसके बाद स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर जाएंगे और उन बच्चों को भी खुराक देंगे, जो बूथ नहीं पहुँच पाए।
विशेष ध्यान प्रवासी मजदूरों के परिवारों पर होगा, जो निर्माण स्थलों, ईंट-भट्टों और झुग्गियों में रहते हैं। ऐसे क्षेत्रों तक पहुँचना इस अभियान की सबसे बड़ी चुनौती है। स्वास्थ्य विभाग ऐसे क्षेत्रों के लिए अलग से टीमें बना रहा है।
ट्रेन, बस और बाजार – जहाँ भी जाएँ, मिलेगी खुराक
बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और भीड़भाड़ वाले बाजारों में विशेष ट्रांजिट टीमें तैनात रहेंगी। अगर आप यात्रा पर हैं और 5 साल से कम उम्र का बच्चा आपके साथ है, तो आपको स्टेशन या बस स्टैंड पर ही पोलियो की खुराक मिल जाएगी। यह सुनिश्चित करने की कोशिश है कि कोई भी बच्चा बिना टीकाकरण के न रहे, चाहे वह अपने घर पर हो या यात्रा के दौरान।
मितानिनों की तैयारी, नए जोश के साथ
इस अभियान की सबसे अहम कड़ी हैं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन, एएनएम और अन्य स्वास्थ्यकर्मी। वे पिछले कई हफ्तों से घर-घर जा रही हैं, बच्चों की सूची बना रही हैं और माता-पिता को जागरूक कर रही हैं। उनके इस अथक परिश्रम से ही पोलियो अभियान को सफलता मिलती है। विभाग ने सुनिश्चित किया है कि वैक्सीन का स्टॉक और कोल्ड चेन प्रबंधन पूरी तरह दुरुस्त हो।
क्या आपको लगता है कि अब पोलियो का खतरा नहीं है?
शायद आप सोचें कि पोलियो तो खत्म हो गया, फिर यह अभियान क्यों? लेकिन सच यह है कि पोलियो वायरस पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। पड़ोसी देशों में अब भी पोलियो के केस आते रहे हैं। इसलिए जब तक दुनिया से पोलियो का पूर्ण उन्मूलन नहीं हो जाता, तब तक हमें पूरी सतर्कता बरतनी है। और यह सतर्कता ‘दो बूंद’ से ही संभव है।
माता-पिता की भूमिका अहम
स्वास्थ्य विभाग ने माता-पिता से सीधी अपील की है – भले ही आपके बच्चे को पहले टीका लग चुका हो, 28 जून को उसे पोलियो की खुराक अवश्य दिलवाएँ। यह अतिरिक्त सुरक्षा है, जो उसे हमेशा के लिए पोलियो से बचाए रखेगी। एक बार फिर से ‘दो बूंद जिंदगी की’ लेकर, हर माँ-बाप अपने बच्चे को सुरक्षित रख सकते हैं।
शत-प्रतिशत कवरेज का लक्ष्य
रायपुर में 3.45 लाख बच्चे हैं – यह संख्या छोटी नहीं है। लेकिन पिछले अभियानों के अनुभव से यह ज्ञात है कि हर बच्चे तक पहुँचना और शत-प्रतिशत टीकाकरण करना संभव है। बस जरूरत है एकजुटता और जागरूकता की। स्वास्थ्य विभाग ने प्रशासन, स्कूलों, पंचायतों और स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से व्यापक नेटवर्क तैयार किया है।
अब बारी माता-पिता की
आखिरकार, यह अभियान सफल होगा या नहीं, यह आम लोगों के सहयोग पर निर्भर करता है। स्वास्थ्य विभाग ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है – हजारों बूथ, सैकड़ों टीमें, लाखों डोज। अब बारी है घर-घर से अपने बच्चे को लेकर पोलियो केंद्र तक पहुँचने की। यह सिर्फ एक बच्चे की जान बचाने का काम नहीं है, बल्कि पूरे देश की आने वाली पीढ़ी को एक बीमारी से हमेशा के लिए सुरक्षित करने का राष्ट्रीय संकल्प है।
तो 28 जून, रविवार – याद रखिएगा। ‘दो बूंद जिंदगी की’ हर बच्चे को जरूर पिलाइए। क्योंकि एक बच्चे की सुरक्षा का मतलब है – एक परिवार की मुस्कान और एक स्वस्थ भारत का निर्माण।
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