रायपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: BP मशीन के बॉक्स में छुपाकर भेजी जा रही थी कोकीन, दिल्ली से 2 तस्कर गिरफ्तार

 

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रायपुर। अक्सर हम सोचते हैं कि ड्रग्स तस्करी कोई 'फिल्मी' अपराध है, जो दूर बॉर्डर या महानगरों में होता है। लेकिन छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में हुई एक घटना ने इस सोच को पूरी तरह बदल कर रख दिया है। यहाँ ड्रग्स तस्कर इतने शातिर और चालाक हैं कि वे ब्लड प्रेशर (BP) मशीन के बॉक्स जैसी आम-सी दिखने वाली वस्तु के अंदर कोकीन छुपाकर भेज रहे थे। मानो कोई मरीज घर पर अपना बीपी चेक करने के लिए मशीन मंगवा रहा हो, असल में उसी बॉक्स में करोड़ों का 'सफेद खतरा' दबा होता था।

रायपुर पुलिस ने इस सुनियोजित साजिश का पर्दाफाश करते हुए दिल्ली से दो अंतरराज्यीय तस्करों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई ने उन लोगों भी हैरान कर दिया, जो मानते थे कि छत्तीसगढ़ में सिर्फ देशी शराब या महुआ की तस्करी होती है। यह मामला अब तक के सबसे चौंकाने वाले ड्रग्स मामलों में से एक बन गया है।

जब 'लाइफ बचाने वाली' मशीन बन गई 'जान लेने वाले' का हथियार

यकीन करना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन यह सच है। तस्करों ने बीपी मशीन के बॉक्स को अपना नया हथियार बनाया था। वे कोकीन को छोटे-छोटे पैकेटों में बंद करते, फिर उसे बिल्कुल सटीक तरीके से ब्लड प्रेशर मशीन के अंदर छुपा देते थे। इसके बाद इस बॉक्स को कोरियर के जरिए रायपुर भेजा जाता था।

उनकी योजना थी कि एक मेडिकल डिवाइस होने के कारण किसी को भी इस बॉक्स पर संदेह नहीं होगा। उन्होंने सोचा था कि पुलिस या कोरियर एजेंसी BP मशीन के बॉक्स को कभी नहीं खोलेगी। लेकिन रायपुर पुलिस की आंखों में चूना लगाना इतना आसान नहीं था।

मार्च की सर्द रात में बिखरा जाल

इस पूरे खेल की शुरुआत मार्च के महीने में हुई, जब रायपुर के देवेंद्र नगर इलाके में पुलिस की एक रूटीन चेकिंग के दौरान एक संदिग्ध युवक हाथ आ गया। उसके पास से मात्र 4.55 ग्राम कोकीन बरामद हुई थी। कीमत के लिहाज से यह तो छोटी मात्रा थी, लेकिन पुलिस को शक था कि यह सिर्फ एक 'छोटी मछली' है, जिसके पीछे कोई बहुत बड़ा जाल है।

उसी आरोपी से कड़ाई से पूछताछ की गई। पुलिस ने उसकी कॉल डिटेल, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और उसके सोशल मीडिया के दोस्तों तक को खंगाला। तब जाकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि यह कोकीन सिर्फ लोकल लेवल पर नहीं, बल्कि दिल्ली में बैठे मास्टरमाइंड्स द्वारा सप्लाई की जा रही थी। और तरीका था — बीपी मशीन का बॉक्स।

दिल्ली तक पहुंची जांच, फिर गिरा गिरोह

रायपुर पुलिस ने यहीं रुकना मंजूर नहीं किया। एंटी क्राइम और साइबर यूनिट की एक टीम दिल्ली के लिए रवाना हुई। पुलिस ने कई दिनों तक सूत्रों की सूचना पर सरगर्मी से निगरानी रखी और अंत में उस समय छापेमारी की जब आरोपी नई सप्लाई की तैयारी में थे। इस दौरान दो शातिर तस्करों को धर दबोचा गया।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में एक भारतीय और एक विदेशी नागरिक शामिल है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, विदेशी आरोपी का संबंध नाइजीरिया से बताया जा रहा है। रिकॉर्ड चेक करने पर पता चला कि यह शख्स कोई पहली बार यह सब नहीं कर रहा था, बल्कि पहले भी वह आपराधिक मामलों में जेल जा चुका है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर का नेटवर्क, लेकिन पुलिस से कम नहीं

इसके बाद पुलिस जांच में रोचक तथ्य सामने आए। यह मामला केवल दिल्ली-रायपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार विदेश तक फैले हुए हैं। पूरे नेटवर्क की कमान एक विदेशी मास्टरमाइंड के हाथ में थी, जो शायद भारत में नहीं बल्कि कहीं और बैठकर ऑपरेशन संभाल रहा था। उसके इस गेम में भारतीय साथी स्थानीय स्तर पर ड्रग्स पहुंचाने का काम करते थे।

सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई कि लेन-देन के लिए वे बैंक खातों का इस्तेमाल कर रहे थे। यानी सीधे नकदी के नाम पर, उनके बैंक खातों में अवैध कमाई ट्रांसफर हो रही थी। और बदले में वे एक-दूसरे को कमीशन देते थे। यह बिल्कुल किसी कॉर्पोरेट कंपनी की तरह व्यवस्थित था, बस काम था — जिंदगियां बर्बाद करने का।

समाज के लिए बढ़ता खतरा: अब हर घर में ड्रग्स?

रायपुर जैसे शहर में कोकीन जैसी महंगी ड्रग्स का मिलना, और उसे भी इतनी शातिर तरीके से मंगवाया जाना, यह एक गंभीर संकेत है। जब तस्कर BP मशीन के बक्से का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो कल को वो बच्चों के खिलौने, गीता की किताब या फिर दान के बक्सों का इस्तेमाल करने लगेंगे - तो फिर पहचान करना और भी मुश्किल हो जाएगा। खास बात यह है कि इस मामले में विदेशी कनेक्शन होना यह दिखाता है कि अब छत्तीसगढ़ भी अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स माफिया के राडार पर है।

पुलिस की मेहनत रंग लाई, लेकिन चुनौती बरकरार

रायपुर पुलिस ने इस मामले में जो तत्परता और शातिराना तरीके से काम किया है, उसकी जितनी तारीफ की जाए, कम है। स्थानीय स्तर पर 4.55 ग्राम कोकीन पकड़ने से लेकर दिल्ली में बैठे नाइजीरियाई तस्कर तक पहुंचने की यह जांच किसी जासूसी कहानी से कम नहीं है।

हालांकि पुलिस की सख्ती से एक बड़ी कड़ी तो टूटी है, लेकिन ड्रग्स के खिलाफ यह जंग अभी खत्म नहीं हुई है। जरूरत इस बात की है कि हम सिर्फ पुलिस पर भरोसा न करें, बल्कि खुद भी आसपास हो रही गड़बड़ियों पर नजर रखें। क्योंकि जब कोई बीपी मशीन का बॉक्स बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के आता है, तो शायद उसे खोलना थोड़ा जरूरी भी है।

रायपुर पुलिस की इस सफल सर्जिकल स्ट्राइक ने साफ कर दिया है कि ड्रग्स माफिया चाहे जितना भी मास्क पहन लें, पुलिस उनकी पोल खोल कर ही रहेगी। अब उम्मीद है कि आने वाले समय में इस मामले में कई और बड़े नाम सामने आएंगे, और दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जाएगी।

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