छत्तीसगढ़ में बड़ा गैस चोरी कांड: 1.5 करोड़ की LPG हेराफेरी, पेट्रोकेमिकल कंपनी पर केस दर्ज

 

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महासमुंद: सरकारी संपत्ति, खासकर जब वह जब्त की गई हो, उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी जाए किसी कंपनी को, और फिर वही कंपनी उसी संपत्ति को चुराकर बाजार में बेच डाले—यकीनन यह किसी सस्पेंस थ्रिलर से कम नहीं है। लेकिन यह फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में सामने आया एक सच्चा और चौंकाने वाला औद्योगिक घोटाला है। यहाँ एक पेट्रोकेमिकल कंपनी ने करीब 1.5 करोड़ रुपये की LPG गैस चोरी करके प्रशासन को चुनौती दे दी। अब इस मामले में पुलिस ने कंपनी के मालिकों समेत कई लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

कैसे खुली पोल? थी तो LPG, मगर मिला तो सिर्फ धुआं

मामला तब सामने आया जब पुलिस और प्रशासन को लगातार इस बात का संदेह होने लगा कि जब्त गैस के रिकॉर्ड में कुछ गड़बड़ है। नियमित जांच के दौरान जब गोदाम का निरीक्षण किया गया, तो चौंकाने वाली बात सामने आई—इतनी बड़ी मात्रा में गैस गायब थी मानो जमीन हो गई हो! बता दें कि यह वही गैस थी, जिसे कानूनी कार्यवाही के तहत पहले पुलिस ने जब्त किया था और बाद में इसे सुरक्षित रखने के लिए इसी पेट्रोकेमिकल कंपनी के प्लांट में रखवा दिया गया था। करीब 90 मीट्रिक टन गैस, जिसकी कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये थी, बस हवा में उड़ गई।

‘लीकेज' नहीं, 'डकैती' थी योजना

जब प्रशासन ने सख्ती दिखाई और गैस के गुम होने पर सवाल उठाए, तो कंपनी वालों ने "तकनीकी खराबी" और "लीकेज" का बहाना बनाया। उनका कहना था कि स्टोरेज टैंक में कहीं सेंध लग गई, जिससे गैस रिस गई। लेकिन जब तकनीकी विशेषज्ञों ने इसकी जांच की, तो पता चला कि इतनी बड़ी मात्रा में बिना किसी धमाके या हादसे के गैस का रिसना लगभग नामुमकिन है। यह साफ हो गया कि गैस को सुनियोजित तरीके से चुराया गया था। यह कोई आकस्मिक रिसाव नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित साजिश थी। गैस को छोटे-छोटे सिलेंडरों में भरकर, टैंकरों में डालकर कालाबाजारी की गई।

कागजों में भी मिली हेराफेरी

जैसे-जैसे जांच गहरी हुई, कंपनी के दांव-पेंच और साफ होते गए। जांच टीम ने कंपनी के खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड खंगाले तो बड़ा खुलासा हुआ। आपको गणित थोड़ी समझ आती होगी—जितनी गैस खरीदी, उतनी ही बिकनी चाहिए, बीच में कुछ खर्च हो तो अलग बात है। लेकिन यहाँ तो रिकॉर्ड में खरीद कम दिखाई गई और बिक्री का आंकड़ा अचानक से कई गुना ज्यादा था। यानी कंपनी डिजिटल और कागजी अकाउंटिंग में इतनी माहिर थी कि हर चोरी को खरीद-फरोख्त के जाल में छुपा रही थी। शक होने पर कुछ जरूरी दस्तावेजों को गायब या नष्ट भी कर दिया गया, ताकि पूरे नेटवर्क को पर्दे के पीछे रखा जा सके।

छापेमारी में मिले कड़े सबूत

प्रशासन ने जब कंपनी के ठिकानों पर अचानक छापेमारी की, तो वहां से ढेरों सबूत बरामद हुए। गैस से भरे टैंकर, अवैध रूप से भरे जा रहे सैकड़ों सिलेंडर, बड़ी स्टोरेज टंकियां और साथ ही कंप्यूटर व डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए, जिनसे पूरे हिसाब-किताब की पड़ताल की जा रही है। पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में यह स्पष्ट है कि यह गैस धीरे-धीरे निकालकर एक बड़े नेटवर्क के जरिए बाजार में बेची गई।

आरोपी फरार, मगर एक कड़ी हाथ लगी

मामला दर्ज होने के बाद कंपनी का मालिक और डायरेक्टर फरार हो गए हैं। पुलिस की कई टीमें उनकी तलाश में लगातार दबिश दे रही हैं। हालाँकि, जांच के दौरान एक कर्मचारी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जिससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि इस कर्मचारी के माध्यम से गैस चोरी के पूरे रैकेट का खुलासा हो सकता है और यह पता लग सकेगा कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में गैस किन-किन लोगों को सप्लाई की गई। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

सवाल: क्यों हो रही है सरकारी प्रॉपर्टी की लूट?

यह पूरा मामला सिर्फ एक कंपनी की गलती नहीं, बल्कि पूरी निगरानी व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। यह गैस कोई मामूली सामान नहीं, बल्कि एक खतरनाक और कीमती सरकारी प्रॉपर्टी थी। तो क्या यह भरोसा करना गलती थी कि कंपनी समझदारी से गैस की सुरक्षा करेगी? क्या सरकारी विभागों की निगरानी इतनी कमजोर है कि डेढ़ करोड़ रुपये की गैस आसानी से गायब हो सकती है? अगर समय रहते कड़ी जांच नहीं हुई होती, तो शायद यह घोटाला कभी उजागर नहीं होता।

सरकार का रुख: 'बर्दाश्त नहीं होगा'

प्रशासन के अधिकारियों ने इस पूरे मामले पर सख्त रुख अपनाया है। उनका कहना है कि सरकारी संपत्ति के साथ इस तरह की छेड़छाड़ और वित्तीय हेराफेरी को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों ने यह भी आश्वासन दिया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी प्रणाली को और मजबूत बनाया जाएगा।

यह सबक सीखना होगा

छत्तीसगढ़ का यह गैस चोरी कांड एक ऐसा उदाहरण है, जो दिखाता है कि कैसे लालच में लोग सरकारी भरोसे का फायदा उठाना नहीं भूलते। लेकिन अब सख्त कार्रवाई की उम्मीद है। अगर इस मामले में दोषियों को सजा मिलती है, तो यह सिर्फ एक सजा नहीं, बल्कि भविष्य के ऐसे अपराधों पर लगाम कसने का एक मजबूत संदेश होगा। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस चोरी के तारों को पूरी तरह बेनकाब कर पाता है और सरकारी खजाने को लूटने वालों को सलाखों के पीछे पहुंचा पाता है।

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