बीजापुर में मिला नक्सलियों का बड़ा बंकर: डी-माइनिंग के बाद सुरक्षित खोला गया, भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद

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बीजापुर: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के घने जंगलों में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। नक्सल विरोधी अभियान के दौरान जवानों ने नक्सलियों के एक गुप्त बंकर का पता लगाया। लेकिन इस बंकर को खोलना आसान नहीं था। कहीं ऐसा न हो कि वहाँ विस्फोटक लगे हों या जाल बिछाया गया हो। इसलिए पहले पूरे इलाके को स्कैन किया गया, फिर डी-माइनिंग की गई। जब सब कुछ सुरक्षित हो गया, तब जाकर बंकर खोला गया। और अंदर का नज़ारा देखकर जवानों के होश उड़ गए - भारी मात्रा में हथियार, विस्फोटक और अन्य नक्सली सामान बरामद हुआ।


इस कार्रवाई को सुरक्षा एजेंसियाँ नक्सल नेटवर्क के खिलाफ एक बड़ी उपलब्धि मान रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह सब सामग्री इस्तेमाल होती अगर सुरक्षाबलों पर कोई बड़ा हमला होता या फिर किसी IED ब्लास्ट में, जिसमें कई निर्दोष लोगों की जान जा सकती थी।


जंगल के अंदर छिपा था बंकर


दरअसल, सुरक्षाबलों को इलाके में कुछ संदिग्ध हरकतों की सूचना मिली थी। ऐसे में DRG, CRPF और बम निरोधक दस्ते (बीडीडी) की एक संयुक्त टीम मौके पर पहुँची और जंगल में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया।


जब जवान गहरे जंगल में आगे बढ़ रहे थे, तो उनकी नज़र एक जगह पर ज़मीन के अंदर बनी संदिग्ध संरचना पर पड़ी। ऐसे में अंदेशा हुआ कि कहीं वहाँ IED या कोई विस्फोटक तो नहीं लगा। आखिर नक्सलियों की यही तो पुरानी चाल है कि कहीं भी जाल बिछाकर छोड़ देते हैं।


इसलिए बिना समय गँवाए, पहले डी-माइनिंग शुरू की गई - यानी पूरे इलाके को बम और विस्फोटक से मुक्त कराया गया। घंटों की मशक्कत के बाद जब क्षेत्र को सुरक्षित घोषित कर दिया गया, तब बंकर को खोला गया।


बंकर से क्या-क्या मिला?


बंकर के अंदर जो देखने को मिला, उसने सुरक्षाबलों को भी चौंका दिया। मानो नक्सलियों ने यहाँ अपना छोटा-सा जखीरा बना रखा था। बरामद सामान की लिस्ट काफी लंबी है, लेकिन कुछ अहम चीज़ें हैं:


· बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री

· हथियारों से जुड़ा साजो-सामान

· डेटोनेटर (बिस्फोटक जलाने वाला उपकरण)

· बारूद

· सुरंग निर्माण में इस्तेमाल होने वाले तार और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण

· एक जनरेटर और कई बैटरियाँ

· सोलर पैनल (जंगल में बिजली के लिए)

· साथ ही नक्सलियों के इस्तेमाल का दैनिक सामान


अधिकारियों का कहना है कि नक्सली लंबे समय तक जंगलों में टिके रहने और बड़े हमलों की तैयारी के लिए ऐसे ही बंकर बनाते हैं। यहाँ वे न सिर्फ हथियार छिपाते हैं, बल्कि संचार उपकरण और रहने-सहने का सामान भी रखते हैं।


डी-माइनिंग क्यों थी जरूरी?


नक्सल प्रभावित इलाकों में बिना डी-माइनिंग के कदम रखना जानलेवा साबित हो सकता है। नक्सली अक्सर सुरक्षाबलों को निशाना बनाने के लिए IED और प्रेशर बम लगाकर छोड़ते हैं। यहाँ भी ऐसी ही आशंका थी।


बम निरोधक दस्ते ने पहले पूरे क्षेत्र को मशीनों से स्कैन किया, हर गड़बड़ी को चिह्नित किया। कहीं कोई संदिग्ध वस्तु दिखी, तो उसे बेहद सावधानी से निष्क्रिय किया गया। कई घंटों की मेहनत के बाद जाकर बंकर को सुरक्षित खोला जा सका।


अगर थोड़ी सी भी जल्दबाजी की जाती, तो बड़ा हादसा हो सकता था। ऐसे ऑपरेशन में हर कदम दाँतों से रेत पीसकर उठाना पड़ता है।


IED गतिविधियों का बड़ा केंद्र बीजापुर


बस्तर संभाग का बीजापुर जिला पिछले कई वर्षों से नक्सल गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। खास बात यह है कि देशभर में जितने भी IED बरामद होते हैं, उनमें से एक बहुत बड़ा हिस्सा अकेले बीजापुर क्षेत्र से ही मिलता है।


सुरक्षा एजेंसियाँ बताती हैं कि समय के साथ नक्सलियों की रणनीति बदली है। अब वे सीधे मुठभेड़ से बचते हैं। उनकी कोशिश होती है कि छुपकर, दूर से या फिर भूमिगत विस्फोटकों से सुरक्षाबलों को नुकसान पहुँचाया जाए। इस बंकर की खोज ने उनकी इस योजना को बड़ा झटका दिया है।


नक्सलियों के नेटवर्क को बड़ा नुकसान


विशेषज्ञों का मानना है कि इस बंकर के मिल जाने से नक्सलियों के हथियारों और विस्फोटकों के लॉजिस्टिक नेटवर्क को गहरा नुकसान पहुँचा है।


बरामद सामग्री देखते ही यह साफ हो जाता है कि इलाके में कोई बड़ी वारदात की तैयारी चल रही थी। हो सकता है कि किसी सुरक्षा कैंप या जवानों की टुकड़ी पर हमले की साजिश रची जा रही थी। अब वह सब पानी फिर गया।


सुरक्षा एजेंसियाँ अब आसपास के इलाकों में भी सर्च ऑपरेशन तेज कर रही हैं, ताकि ऐसे किसी और बंकर या छिपे ठिकाने का पता लगाया जा सके।


स्थानीय लोगों से सतर्क रहने की अपील


पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके के ग्रामीणों से अपील की है कि वे सतर्क रहें। अक्सर नक्सली विस्फोटक सामग्री प्लास्टिक ड्रम, पुराने बर्तनों या जमीन के अंदर दबाकर छोड़ देते हैं। ऐसे में जरा सी चूक जानलेवा साबित हो सकती है।


अगर आसपास कहीं कोई संदिग्ध चीज़ दिखे या आवाज आए, तो कृपया खुद उसे छेड़ें नहीं और तुरंत पुलिस को सूचना दें। नक्सली चाहते हैं कि लोग डरे रहें, लेकिन सतर्कता और सूझबूझ ही सबसे बड़ा हथियार है।


सुरक्षाबलों की लगातार कार्रवाई


पिछले कई महीनों में सुरक्षाबलों ने बस्तर इलाके में एक के बाद एक कई बड़े ऑपरेशन चलाए हैं। कई नक्सली ठिकाने तोड़े गए हैं, कई हथियार बरामद हुए हैं। इसके अलावा अब ड्रोन निगरानी, तकनीकी खुफिया जानकारी और आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ाया गया है।


केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त रणनीति के तहत जंगलों में लगातार नए कैंप बन रहे हैं, जिससे नक्सलियों की आवाजाही पर पहले से ज्यादा नियंत्रण हो रहा है।


बदल रही नक्सल रणनीति, तो बदलता है हमारा हथियार भी


पहले नक्सलियों के खुले कैंप और बड़े प्रशिक्षण केंद्र हुआ करते थे, जो अब कम हो गए हैं। अब वे छोटे-छोटे, गुप्त ठिकाने बनाते हैं। लेकिन सुरक्षाबल भी पीछे नहीं हैं। तकनीक और जानकारी के दम पर ऐसे बंकरों का पता लगाना पहले से कहीं आसान हुआ है।


बीजापुर में मिला यह बंकर भी उसी रणनीति का हिस्सा था। उसे नष्ट करके सुरक्षाबलों ने साफ कर दिया कि जंगल गहरे हों या चालें पुरानी, नक्सलियों के गुप्त इरादों को जल्दी या बाद में पकड़ ही लिया जाएगा।


अंत में…


बीजापुर में नक्सली बंकर का खुलासा सुरक्षाबलों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद होने से साफ है कि नक्सली संगठन अब भी अपनी गतिविधियों को जारी रखना चाहता है।


लेकिन सुरक्षाबलों की सतर्कता और लगातार चल रहे ऑपरेशन की बदौलत नक्सली नेटवर्क को एक के बाद एक झटके लग रहे हैं। आने वाले दिनों में बस्तर क्षेत्र में और भी बड़े सर्च अभियान चलाए जाने की संभावना है। ये लगातार कार्रवाइयाँ ही हैं जो एक दिन इस समस्या का पूर्ण खात्मा करेंगी।

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