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भारत और दक्षिण कोरिया के बीच रक्षा सहयोग को नई मजबूती मिली है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की सियोल यात्रा के दौरान दोनों देशों ने एक अहम रणनीतिक समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं .
यह समझौता 19 मई को राजनाथ सिंह और उनके दक्षिण कोरियाई समकक्ष आह्न ग्यू-बैक के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक के दौरान साइन किया गया . यह सात साल में किसी भारतीय रक्षा मंत्री की दक्षिण कोरिया की पहली आधिकारिक यात्रा है .
किन क्षेत्रों में बढ़ेगा सहयोग?
इस समझौते के तहत भारत और दक्षिण कोरिया कई अहम क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे :
डिफेंस साइबर सिक्योरिटी – बढ़ते साइबर खतरों से निपटने और सैन्य नेटवर्क की सुरक्षा के लिए सहयोग
इंटेलिजेंस शेयरिंग – रक्षा सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए संस्थागत तंत्र मजबूत किया जाएगा
मिलिट्री इंफॉर्मेशन एक्सचेंज – दोनों देशों के बीच स्थितिजन्य जागरूकता और क्षेत्रीय सुरक्षा बढ़ाने पर फोकस
इसके अलावा, दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना मिशन में सहयोग और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालयों के बीच साझेदारी पर भी समझौतों का आदान-प्रदान किया .
रक्षा उद्योग सहयोग को मिलेगी गति
दोनों रक्षा मंत्रियों ने पिछले सहयोग की सराहना की, खासकर K9 वज्र-टी स्व-चालित हॉवित्जर परियोजना को सफल उदाहरण के तौर पर देखा गया . अब इस साझेदारी को और नई ऊंचाइयों तक ले जाने पर सहमति बनी है .
KIND-X पहल पर भी हुई चर्चा
राजनाथ सिंह ने दक्षिण कोरिया के रक्षा अधिग्रहण प्रशासन (DAPA) प्रमुख ली योंग-चुल के साथ बैठक में KIND-X (Korea-India Defence Innovation & Accelerator Ecosystem) पहल पर चर्चा की . इसका उद्देश्य दोनों देशों के डिफेंस स्टार्टअप्स, यूनिवर्सिटी और कंपनियों को जोड़कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ड्रोन सिस्टम जैसे फ्यूचर टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ाना है .
इंडो-पैसिफिक में रणनीतिक संदेश
राजनाथ सिंह ने इस अवसर पर कहा कि वह "रणनीतिक सैन्य सहयोग को गहरा करने, रक्षा औद्योगिक साझेदारी को मजबूत करने और समुद्री सहयोग बढ़ाने" पर फोकस करेंगे, ताकि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा मिल सके .
कोरियाई युद्ध में भारत के योगदान को भी किया याद
राजनाथ सिंह ने सियोल नेशनल कब्रिस्तान में कोरियाई युद्ध में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि दी. गौरतलब है कि भारत ने कोरियाई युद्ध (1950-53) के दौरान 60वीं पैराशूट फील्ड एंबुलेंस के तहत 627 चिकित्सा कर्मियों की टुकड़ी भेजी थी – जो किसी भी देश की ओर से भेजा गया सबसे बड़ा चिकित्सा सहायता दल था .
निष्कर्ष
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच हुआ यह रक्षा समझौता दोनों देशों के 'विशेष रणनीतिक साझेदारी' संबंधों को नई ऊंचाई देने वाला कदम माना जा रहा है . यह न केवल सैन्य सहयोग को बढ़ाएगा, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा को भी मजबूत करेगा .

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