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| Photo: Provided by Rafik Memon |
कोरबा (छत्तीसगढ़) | 13 मई 2026
कोरबा जिले के रहने वाले मोहम्मद रफीक मेमन, जो एक योजनाकार और टैक्स एडवोकेट हैं, ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक लिखित सुझाव भेजा है। यह पत्र उन्होंने जिला कलेक्टर के जरिए भेजा है।
इस पत्र में उन्होंने देश में ‘राष्ट्रीय संयम एवं संसाधन संरक्षण अभियान’ चलाने का आइडिया दिया है। यानी 6 महीने के लिए एक ऐसा अभियान, जिसमें लोग थोड़ी समझदारी और संयम से काम लें, तो देश को बहुत फायदा हो सकता है।
दरअसल, हाल ही में प्रधानमंत्री ने खुद लोगों से पेट्रोल-डीजल बचाने, फिजूलखर्ची कम करने और आत्मनिर्भर बनने की अपील की थी। इन्हीं बातों से प्रभावित होकर मेमन ने यह सुझाव तैयार किया।
मेमन के सुझावों में क्या-क्या है?
उन्होंने अपने पत्र में कई छोटे-बड़े, लेकिन जरूरी सुझाव दिए हैं। आइए, उन्हें एक-एक करके समझते हैं:
₹200 से ज्यादा के पेट्रोल-डीजल पर डिजिटल पेमेंट जरूरी हो – इससे पैसे की नकदी पर कंट्रोल होगा और टैक्स चोरी पर भी लगाम लगेगी।
सोना-चांदी और महंगे गहने भी डिजिटली खरीदे जाएं – इससे धन का सही हिसाब रखा जा सकेगा।
पेट्रोल पंपों पर ईंधन बचत और देशहित के संदेश लिखे जाएं – जैसे ‘एक लीटर बचाओ, देश को बचाओ’ जैसे छोटे-छोटे नारे।
मंत्रियों और VIP काफिलों में गाड़ियों की संख्या सीमित की जाए – इससे न सिर्फ पैसा बचेगा, बल्कि सादगी का संदेश भी जाएगा।
अनावश्यक विदेश यात्राओं पर रोक लगाई जाए – इससे विदेशी मुद्रा (फॉरेन करेंसी) बचाई जा सकती है।
सरकारी योजनाओं में अपात्र लोगों की जांच के लिए विशेष अभियान चलाया जाए – ताकि सही लाभ सही लोगों तक पहुंचे।
सोशल मीडिया पर फैलने वाली आर्थिक अफवाहों पर नियंत्रण किया जाए – कई बार अफवाहों से बाजार में घबराहट फैल जाती है, इससे बचा जा सकेगा।
सिर्फ भारत नहीं, दुनिया के लिए भी एक अपील
मोहम्मद रफीक मेमन का एक सुझाव वैश्विक शांति से जुड़ा हुआ है। उन्होंने प्रधानमंत्री से यह भी अनुरोध किया है कि वे पूरी दुनिया के लोगों से एक बड़ा संदेश भेजने की अपील करें।
उनका कहना है कि दुनिया भर के नागरिक X (जिसे पहले ट्विटर कहते थे) और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर अमेरिका के राष्ट्रपति और इजराइल के प्रधानमंत्री को यह संदेश भेजें – “युद्ध नहीं, बातचीत चाहिए।”
पत्र में यह लाइन भी शामिल है:
“Please choose peace talks over war for the sake of global economy and humanity.”
मेमन कहते हैं कि जब दुनिया के लाखों-करोड़ों लोग एक साथ यही बात कहेंगे, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय नेताओं पर जरूर पड़ेगा। और इससे दुनिया की अर्थव्यवस्था भी बचेगी और इंसानियत भी।
जिम्मेदार नागरिकता की अपील
मेमन ने यह भी कहा कि अगर हर नागरिक थोड़ी देर के लिए ही सही, लेकिन संयम और सादगी अपनाए, तो भारत और मजबूत, आत्मनिर्भर और सुरक्षित बन सकता है।
यह पूरी पहल सिर्फ पैसे बचाने की बात नहीं है। इसमें आर्थिक सुधार, सामाजिक जागरूकता और वैश्विक शांति – तीनों की बात है। यानी एक साथ देश और दुनिया दोनों के लिए कुछ अच्छा करने की सोच।
यह सुझाव अभी निजी है, लेकिन अगर इसे गंभीरता से लिया गया तो कई मायनों में देश के लिए लाभकारी हो सकता है। फिलहाल, पीएम कार्यालय से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इस तरह की सोच निश्चित रूप से एक सकारात्मक पहल है।

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