रायपुर में वेट लॉस दवाओं का काला कारोबार: छापे के बाद भी नहीं थमी हेराफेरी, जानिए पूरा मामला

 

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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में वजन घटाने वाली दवाओं के अवैध कारोबार का एक बड़ा मामला सामने आया है। ड्रग प्रशासन ने शहर के कई इलाकों में छापेमारी कर इस धंधे का पर्दाफाश तो किया, लेकिन हैरानी की बात यह है कि कार्रवाई के कुछ ही घंटों बाद फिर से वहीं दवाएं बिना पर्ची के खुलेआम बेची जा रही थीं। आइए इस मामले को विस्तार से समझते हैं।

आखिर क्या है पूरा मामला?

दरअसल, पिछले कुछ समय में फिटनेस का क्रेज इतना बढ़ गया है कि लोग तेजी से वजन कम करने के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। इसी का फायदा उठाकर कुछ मेडिकल स्टोर और सप्लायर बिना डॉक्टर की सलाह के वेट लॉस दवाओं की बिक्री कर रहे थे। खासतौर पर 'मौनजारो' नाम के इंजेक्शन की जमकर कालाबाजारी हो रही थी।

गौरतलब है कि यह दवा मूल रूप से डायबिटीज के मरीजों के लिए बनाई गई थी, लेकिन अब लोग इसका इस्तेमाल सिर्फ वजन कम करने के लिए कर रहे हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने साफ निर्देश दिया है कि यह दवा सिर्फ डॉक्टर के पर्चे पर ही बेची जाएगी। लेकिन रायपुर के कई मेडिकल स्टोर इस नियम को ताक पर रखकर कारोबार कर रहे थे।

ड्रग विभाग ने की बड़ी कार्रवाई

शिकायतों के बाद सोमवार को खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने शहर के कई मेडिकल स्टोरों पर छापेमारी की। टीम ने पांडरी, देवेंद्र नगर, पुरानी बस्ती और फाफड़ीह इलाकों में दुकानों की जांच की। अधिकारियों ने मौनजारो इंजेक्शन के स्टॉक और बिक्री रिकॉर्ड को परखा।

इस दौरान कई दुकानों पर बड़ी अनियमितताएं पाई गईं। कहीं फार्मासिस्ट ही मौजूद नहीं था, तो कहीं एनडीपीएस दवाओं का रिकॉर्ड तक नहीं रखा गया था। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कई जगहों पर भौतिक स्टॉक और कंप्यूटर इन्वेंट्री में भारी अंतर पाया गया।

फ्रैंक रॉस फार्मेसी की शाखा सील

ड्रग विभाग ने इसी मामले में देवेंद्र नगर स्थित फ्रैंक रॉस फार्मेसी की शाखा को सील कर दिया है। जांच में पता चला कि यहां न तो कोई पंजीकृत फार्मासिस्ट मौजूद था और न ही दवाओं का सही रिकॉर्ड रखा गया था। वहीं खमहरडीह स्थित अशोक रतन शाखा में भी फार्मासिस्ट नहीं मिला, जिसके बाद वहां दवाओं की बिक्री तुरंत रोकने के निर्देश दे दिए गए।

छापे के बाद भी नहीं रुका धंधा

सबसे हैरान करने वाला मामला तब सामने आया जब दैनिक भास्कर की टीम ने देर शाम फिर से जांच की। पता चला कि जिन दुकानों पर दिनभर छापेमारी हुई थी, वहां शाम होते ही फिर से वही दवाएं बिना पर्चे के बेची जाने लगीं।

पांदरी कपड़ा मार्केट के पास एक दुकान पर जब रिपोर्टर ने मौनजारो इंजेक्शन मांगा तो दुकानदार ने बिना कोई पर्चा मांगे ही अपने कर्मचारी को दवा निकालने को कहा। उसने फायदे के बारे में बताते हुए कहा कि इससे काफी वजन कम होता है और आजकल इसकी काफी डिमांड है।

देवेंद्र नगर के एक मेडिकल स्टोर पर जब यह इंजेक्शन नहीं मिला तो दुकानदार ने दूसरा विकल्प सुझाया। उसने एक गोली के बारे में बताया और दावा किया कि इसका फार्मूला इंजेक्शन जैसा ही है और इससे भी अच्छा असर होता है।

पुरानी बस्ती इलाके में तो दुकानदार ने पहले ही खुराक पूछ ली और खुद 2 मिलीग्राम वाली दवा लेने की सलाह दी। कीमत पूछने पर उसने ग्राहक को गोदाम ले जाकर कीमत बताने को कहा, यानी पूरा खेल छुप-छुपाकर खेला जा रहा था।

फाफड़ीह में एक दुकान पर दवा मौजूद नहीं थी, लेकिन दुकानदार ने कहा कि एक घंटे के अंदर मंगवा देगा। उसने नंबर लेकर होम डिलीवरी का आश्वासन भी दिया, जो पूरी तरह नियमों का उल्लंघन है।

क्यों खतरनाक हैं ये दवाएं?

डॉ. आर.के. पटेल, जो औषधि विशेषज्ञ हैं, बताते हैं कि ये दवाएं मूल रूप से इंसुलिन आधारित होती हैं, जिनका उपयोग शुगर को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। हालांकि, लोग इनका इस्तेमाल वजन घटाने के लिए करने लगे हैं। पहले ये दवाएं काफी महंगी हुआ करती थीं, लेकिन अब पेटेंट मुक्त होने के बाद इनकी कीमत कम हो गई है, जिससे बाजार में इनकी उपलब्धता बढ़ गई है।

लेकिन इनका सेवन सिर्फ डॉक्टर की सलाह और देखरेख में ही किया जाना चाहिए। ये दवाएं भूख कम करती हैं, जिससे शरीर को जरूरी विटामिन और मिनरल्स नहीं मिल पाते। इससे स्थायी कमजोरी आ सकती है। वहीं जरूरत से ज्यादा सेवन करने पर उल्टी, पेट की समस्याएं और हार्मोनल असंतुलन जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।

विभाग ने लोगों से की यह अपील

ड्रग विभाग के सहायक नियंत्रक बेनीराम साहू ने साफ किया है कि इस मामले में कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में एक परिपत्र भी जारी किया गया है। उनका कहना है, 'अगर हमें कहीं से भी ऐसी शिकायतें मिलती हैं तो हम तुरंत कार्रवाई करेंगे। आप भी हमें स्थान बताएं, हम कार्रवाई करेंगे।'

विभाग ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा न लें। हमेशा अधिकृत मेडिकल स्टोर से ही दवा खरीदें और जो दवाएं सस्ती या ज्यादा असरदार बताकर बेची जा रही हों, उनसे सतर्क रहें।

क्या है आगे की योजना?

ड्रग प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह कार्रवाई सिर्फ शुरुआत है। आने वाले दिनों में और भी कई मेडिकल स्टोरों की जांच की जाएगी। जो भी दुकानदार नियमों का उल्लंघन करता पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। लाइसेंस रद्द करने से लेकर जुर्माना तक की कार्रवाई हो सकती है।

रायपुर में वेट लॉस दवाओं का यह मामला चिंताजनक है। एक तरफ ड्रग विभाग छापेमारी कर रहा है, तो दूसरी तरफ दुकानदार बेधड़क नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। जरूरत इस बात की है कि प्रशासन और सख्ती बरते और लोगों को भी जागरूक होना होगा। याद रखिए, सेहत के मामले में कोई शॉर्टकट काम नहीं करता। वजन कम करना है तो एक्सपर्ट की सलाह लें, संतुलित खाना खाएं और एक्सरसाइज करें। बिना सोचे-समझे दवाओं का इस्तेमाल आपकी जान पर भारी पड़ सकता है।

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