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घटना के बाद से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। विपक्ष ने सरकार की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए तंज कसना शुरू कर दिया है। खास बात यह है कि यह घटना उस वक्त हुई, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ दौरे पर हैं और राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं।
यह इतनी अचानक हुई कि 74 वर्षीय कौशिक कुछ समझ पाते, उससे पहले ही बदमाश निकल चुके थे। कुछ राहगीरों ने पीछा करने की कोशिश जरूर की, लेकिन बाइक सवार आरोपी तेजी से मौके से गायब हो गए। गनीमत यह रही कि इस घटना में कौशिक को किसी तरह की चोट नहीं आई।
साथ ही, मोबाइल की लोकेशन ट्रेस करने के लिए साइबर सेल से भी मदद ली जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह संदेह जताया जा रहा है कि यह घटना किसी पेशेवर झपटमार गिरोह का काम हो सकता है, जो पहले भी शहर के सुनसान इलाकों में वारदात को अंजाम देता रहा है।
उन्होंने लिखा:
*"आप डायल 112 को झंडी दिखाते रहिए, उधर धरम लाल कौशिक जी का मोबाइल छीनकर चोर 9-2-11 हो गए।"*
बघेल ने आगे कहा कि जब देश का गृह मंत्री छत्तीसगढ़ में मौजूद है और सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे हो रहे हैं, उसी दौरान राजधानी में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष का मोबाइल उड़ जाना कथित 'सुशासन' पर एक करारा तमाचा है।
बघेल के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस समर्थक इसे सरकार की 'फेल' कानून व्यवस्था का नतीजा बता रहे हैं, जबकि भाजपा प्रवक्ताओं ने अभी इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
आम लोग अब इन्हीं घटनाओं से डरकर निकलते हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कई इलाकों में पुलिस पेट्रोलिंग न के बराबर है। जब खुद एक पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता इस तरह लूटे जा सकते हैं, तो आम आदमी की क्या मजाल?
एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा – "हम तो आए दिन ऐसी खबरें पढ़ते हैं, लेकिन जब नेताओं के साथ ऐसा होता है, तब पुलिस को जल्दी याद आती है।"
लेकिन इस घटना ने उन दावों पर पानी फेर दिया है। विपक्ष का सवाल है कि जब सिविल लाइन जैसे संवेदनशील इलाके में सुबह-सुबह वारदात हो सकती है, तो फिर 'डायल-112' जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं का क्या फायदा?
पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी सहायता से जल्द ही आरोपियों तक पहुंचा जाएगा। फिलहाल पुलिस ने घटना स्थल के आसपास के संदिग्ध लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है।
आम जनता में डर और असुरक्षा
धरमलाल कौशिक जैसे वरिष्ठ नेता के साथ यह घटना होने के बाद रायपुर के लोगों में डर का माहौल है। सुबह टहलने वाले बुजुर्ग और महिलाएं अब सड़कों पर निकलने से पहले सोच रहे हैं। कई लोगों ने पुलिस से अपील की है कि वह सुनसान और संवेदनशील इलाकों में नियमित गश्त बढ़ाए।
सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के साथ हुई मोबाइल लूट की यह घटना छत्तीसगढ़ सरकार के लिए एक 'वेक-अप कॉल' है। यह बताता है कि कैसे राजधानी रायपुर में कानून व्यवस्था चरमरा रही है। अब सरकार को सिर्फ दावे नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई दिखानी होगी।
लोगों की निगाहें अब पुलिस और प्रशासन पर टिकी हैं – कि वे कितनी जल्दी दोषियों को पकड़ते हैं और कैसे राजधानी के अपराधों पर लगाम लगाते हैं। तब तक, रायपुर की सड़कें पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की लूट की इस घटना को याद रखेंगी – एक ऐसी घटना, जिसने सुशासन के चेहरे पर दाग लगा दिया।


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