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बिलासपुर: शहर में इन दिनों एक बात की खूब चर्चा है – नकली मसालों की। और यह कोई मामूली मामला नहीं है। खाद्य विभाग ने पिछले दिनों एक ट्रांसपोर्ट कंपनी के गोदाम में छापा मारा तो अधिकारियों के होश उड़ गए। वहाँ से करीब 50 हज़ार रुपए का "एवरेस्ट" ब्रांड का मसाला बरामद हुआ। पर असली बात तो यह है कि यह एवरेस्ट नहीं, बल्कि उसकी फर्जी कॉपी थी।
और सबसे हैरान करने वाली बात – छापे के दौरान माल का कोई मालिक वहाँ नहीं था। जैसे कोई भूतिया सामान हो। सवाल उठ रहे हैं – आखिर यह सब कौन कर रहा था? कब से चल रहा था यह खेल?
गोदाम में मिला माल, मगर मालिक नहीं
यह पूरा मामला श्री मारुति गुड्स गैरेज नाम के ट्रांसपोर्ट परिसर का है। विभाग को पहले से ही सूचना मिली थी कि यहाँ किसी बड़े व्यापारी का स्टॉक छिपाकर रखा गया है। सूचना के आधार पर जब टीम ने दबिश दी, तो देखते ही देखते गोदाम से पैकेटों के पहाड़ निकलने लगे।
अब यहाँ जो बात अधिकारियों को बहुत अजीब लगी, वह यह थी कि पूरे गोदाम में इतना माल पड़ा था, मगर मालिक का नाम तक पूछने वाला कोई नहीं था। सबसे ऐसे बातें कर रहे थे, जैसे "हमें कुछ नहीं पता, हम तो गाड़ीवाले हैं।"
खाद्य विभाग ने यह देखते ही तुरंत सारा माल अपने कब्जे में ले लिया। अब ट्रांसपोर्टर से पूरे दस्तावेज़ माँगे गए हैं – कि आखिर किसका माल था, कहाँ से आया था और कहाँ जाना था। अब उम्मीद यही है कि इन कागजों से ज़रूर कुछ सुराग मिलेंगे।
एवरेस्ट जैसा पैकेट, पर असली कहीं नहीं
जब अधिकारियों ने इन पैकेटों को गौर से देखना शुरू किया, तो वे भी हैरान रह गए। पैकेट पर "एवरेस्ट मीट मसाला" लिखा था। रंग, डिज़ाइन, फ़ॉन्ट – सब कुछ बिल्कुल एवरेस्ट जैसा। किसी आम ग्राहक के लिए यह पहचानना मुश्किल था कि यह असली है या नकली।
लेकिन विभाग की टीम के लिए यह मुश्किल नहीं था। बैच नंबर, पैकिंग की क्वालिटी और कुछ बारीक चीज़ों को देखते ही उनका शक पक्का हो गया कि यह बिल्कुल नकली है।
असली चिंता सेहत की है
अब यहाँ असली सवाल माल के नकली होने का नहीं, बल्कि लोगों की सेहत का है। विशेषज्ञ कहते हैं कि नकली मसालों में ऐसे रसायन और मिलावटें होती हैं जो धीरे-धीरे शरीर को अंदर से खोखला कर देती हैं।
एक डॉक्टर से जब इस बारे में बात की गई, तो उन्होंने बताया – "इन नकली मसालों में अक्सर यूरिया, स्टार्च, यहाँ तक कि मिट्टी का पाउडर तक मिला होता है। लंबे समय तक इससे पेट, किडनी और लीवर पर गंभीर असर पड़ता है। कुछ केसों में यह कैंसर का कारण भी बन सकता है।"
यह सोचकर ही दिल दहल जाता है कि हमारे घर की रसोई में जो मसाला डल रहा था, वह कहीं हमारी सेहत के लिए जहर तो नहीं बन रहा था।
कब से चल रहा था यह खेल? कोई जवाब नहीं
यह वो सवाल है, जिसका जवाब अभी तक किसी के पास नहीं है। अधिकारी खुद स्वीकार कर रहे हैं कि यह सिर्फ एक गोदाम है। असली नेटवर्क कहीं और है, शायद कई शहरों, कई राज्यों में फैला हुआ है।
विभाग ने अब ट्रांसपोर्टर से सारी जानकारी निकालनी शुरू कर दी है। पिछले कई महीनों की बुकिंग डिटेल मँगवाई गई है। आशंका जताई जा रही है कि बिलासपुर के साथ-साथ रायपुर, दुर्ग, कोरबा और आसपास के शहरों में भी यह माल पहुँच चुका होगा।
व्यापारी परेशान, ग्राहक डरे हुए
इस न्यूज़ के आने के बाद बिलासपुर के सब्जी मंडी और किराना बाज़ार में काफी हड़कंप मचा है। एक दुकानदार ने बताया – "हम भी अब अपने गोदामों में रखा सारा माल चेक कर रहे हैं। पता नहीं कहाँ से कौन सा नकली माल आ गया हो।"
वहीं एक ग्राहक, जो सालों से एवरेस्ट का ही मसाला इस्तेमाल कर रही थीं, ने दुख जताया – "हम तो ब्रांड नाम देखकर उठा लेते थे। कभी सोचा नहीं था कि इतनी बड़ी कंपनी का भी नकली माल मार्केट में आ सकता है। अब तो मन में डर बैठ गया है।"
हैरानी तो इस बात की है कि लोग ब्रांडेड सामान खरीदते हैं तो ज्यादा पैसे देते हैं क्योंकि उन्हें भरोसा होता है कि उन्हें अच्छी चीज़ मिलेगी, पर यहाँ तो उनके भरोसे का फायदा उठाकर उल्टा जहर थमा दिया जा रहा था।
थोड़ी सी सतर्कता बचा सकती है बड़ा नुकसान
प्रशासन ने लोगों से कुछ सीधी-सादी अपील की है। असली और नकली में फर्क पहचानना कोई रॉकेट साइंस नहीं है। बस थोड़ी सी सजगता चाहिए।
अब आगे क्या होगा?
विभाग की टीमें दिन-रात इस मामले की जांच में जुटी हैं। ट्रांसपोर्टर से बारीक पूछताछ हो रही है। अब देखना यह है कि यह नेटवर्क कितना गहरा और कितना चौड़ा है। अगर सबूत मिल गए तो कॉपीराइट और ट्रेडमार्क उल्लंघन के मामले भी बनेंगे।
विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने साफ शब्दों में कहा है – "मिलावटखोरी करने वालों को बिल्कुल बख्शा नहीं जाएगा। अभी तो शुरुआत है, आगे और भी बड़े अभियान चलेंगे।"
बात सिर्फ मसाले की नहीं है
सच कहिए तो यह मामला सिर्फ एक ब्रांड या एक ट्रांसपोर्टर का नहीं है। यह हमारी खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर उठता एक बहुत बड़ा सवाल है। जब नकली ब्रांड इतनी आसानी से बाजार में आ सकता है और लोगों की थाली तक पहुँच सकता है, तो समझ लीजिए कि सिस्टम में कोई न कोई बड़ी सेंध जरूर है।
अब अगली नज़र लैब रिपोर्ट पर है। उसके बाद ही साफ होगा कि आखिर मसाला कितना नकली और कितना खतरनाक था। तब तक, फिलहाल इतना कहा जा सकता है कि अगली बार मसाला खरीदने से पहले एक बार पैकेट जरूर पलट कर देख लीजिए। जरा सी सतर्कता बहुत कुछ बचा सकती है।

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