बंगाल में 9 मई को सत्ता-परिवर्तन, BJP सरकार के शपथ ग्रहण की तैयारी, ममता-अभिषेक की सुरक्षा में कटौती; तमिलनाडु में विजय ने पेश किया दावा

 

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पश्चिम बंगाल की राजनीति में इतने बड़े उलटफेर के बाद अब लगभग तय हो चुका है कि 9 मई को राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली नई सरकार शपथ लेगी। एक तरफ बंगाल में सत्ता-परिवर्तन की तैयारियों के बीच पूर्व सीएम ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा में कटौती का मामला गरमाया हुआ है, वहीं दूसरी ओर तमिलनाडु में अभिनेता-नेता विजय ने कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया है। लेकिन तमिलनाडु के इस घटनाक्रम का भाजपा की सेहत से कोई सीधा संबंध नहीं है – यह बात साफ कर देना जरूरी है।

बंगाल में 9 मई: भाजपा की शपथ तय, व्यापक बदलाव के संकेत

पश्चिम बंगाल के सियासी समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं। करीब एक दशक से सत्ता में रही ममता बनर्जी की सरकार को अब विपक्ष में जाना होगा। सूत्रों के अनुसार, 9 मई को भाजपा की नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह होगा, जो राज्य के लिए एक ऐतिहासिक पल होगा। प्रशासन ने इस कार्यक्रम को लेकर तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। हालाँकि, अभी यह साफ नहीं है कि सीएम की कुर्सी पर कौन बैठेगा – केंद्रीय नेतृत्व इस पर अंतिम फैसला करेगा।

ममता-अभिषेक की सुरक्षा घटने पर बवाल

जैसे ही सत्ता परिवर्तन की अटकलें तेज हुईं, राज्य प्रशासन ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा में कटौती कर दी। यह एक रूटीन प्रोटोकॉल बदलाव है – जैसे ही कोई मुख्यमंत्री पद से हटता है, उन्हें वीआईपी सुरक्षा की जगह सामान्य Z+ सुरक्षा मिलती है – लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने इसे लेकर जमकर हंगामा किया है।

तृणमूल नेताओं का कहना है कि यह “बदले की राजनीति” है और ममता बनर्जी को देखते हुए उनकी सुरक्षा कम नहीं करनी चाहिए। वहीं, नई सरकार के समर्थकों का तर्क है कि नियमों के तहत ही यह कदम उठाया गया है, इसमें कोई व्यक्तिगत मंशा नहीं है। आने वाले दिनों में यह मामला और गर्मा सकता है।

तमिलनाडु: विजय का सरकार बनाने का दावा – कैसा है असली समीकरण?

अब बात करते हैं तमिलनाडु की। अभिनेता विजय ने अपनी पार्टी ‘तमिलक्कम’ के साथ सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है। उन्हें कांग्रेस का समर्थन हासिल है, लेकिन इस दावे को लेकर सियासी गलियारों में खूब चर्चा है।

एक बात साफ है: इस घटनाक्रम का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि भाजपा मजबूत होगी। दरअसल, विजय की विचारधारा भाजपा से काफी अलग है। आइए समझते हैं यह फर्क:

पहलूभाजपाविजय (तमिलक्कम)
मुख्य एजेंडाहिन्दुत्व, राष्ट्रीय एकता, उदारवादी अर्थव्यवस्थातमिल राष्ट्रवाद, सामाजिक न्याय, द्रविड़ विचारधारा से जुड़ाव
केंद्र-राज्य संबंधमजबूत केंद्र सरकार में विश्वासराज्य की अधिक स्वायत्तता के पक्षधर
हिंदी पर रुखहिंदी को बढ़ावादो-भाषा नीति (तमिल अनिवार्य, हिंदी पर जोर नहीं)
गठबंधन इतिहासएआईएडीएमके, पीएमके जैसे दलों से गठबंधनअभी नया दल, कांग्रेस के साथ समर्थन का दावा

विशेषज्ञों का मानना है कि विजय भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोलने की कोशिश कर रहे हैं, उनके साथ गठबंधन करने की नहीं। इसलिए तमिलनाडु में भाजपा को विजय से मजबूती मिलने की संभावना लगभग शून्य है।

क्या है आम आदमी की राय?

कोलकाता के एक चाय विक्रेता ने कहा, “बस अब शांति चाहिए, जो भी आए, हमें बस रोज़गार चाहिए।” वहीं, चेन्नई का एक युवा कहता है, “विजय में दम है, मगर वह भाजपा के साथ कभी नहीं आएगा – हम तमिल हैं, हम अपनी अलग पहचान चाहते हैं।”

पश्चिम बंगाल में 9 मई को भाजपा का शपथ ग्रहण लगभग तय माना जा रहा है, जो देश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव है। वहीं, तमिलनाडु में विजय का सरकार बनाने का दावा एक नई राजनीतिक लहर पैदा कर सकता है, लेकिन इस लहर का रुख भाजपा की तरफ नहीं है। दोनों की विचारधाराओं में ज़मीन-आसमान का फर्क है। मीडिया और विश्लेषकों को इसी फर्क को समझना होगा और रिपोर्टिंग उसी हिसाब से करनी होगी।

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