गौरेला में ओवरब्रिज की मांग को लेकर बढ़ा जनआक्रोश: 7 दिन में जवाब नहीं मिला तो उग्र आंदोलन की चेतावनी

 


छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में गोरखपुर रेलवे फाटक को लेकर लोगों का धैर्य अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। वर्षों से लंबित पड़ी इस समस्या ने अब आक्रोश का रूप ले लिया है। सोमवार को स्थानीय नागरिकों और नगर संघर्ष समिति ने पेंड्रा रोड रेलवे स्टेशन पहुंचकर रेलवे प्रबंधक को एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में साफ शब्दों में चेतावनी दी गई है – सात दिन में ओवरब्रिज या अंडरब्रिज की कोई ठोस पहल नहीं हुई, तो 30 मई को उग्र आंदोलन किया जाएगा। इस आंदोलन में हजारों लोगों के शामिल होने की संभावना है, और इसमें रेल रोकने की कार्रवाई भी शामिल होगी।

क्या है गोरखपुर रेलवे फाटक की समस्या?

गोरखपुर रेलवे फाटक गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के सबसे व्यस्त रास्तों में से एक है। यहां एक साथ तीन रेलवे लाइनें गुजरती हैं, जिसके कारण फाटक दिनभर में बार-बार और लंबे समय के लिए बंद होता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, हर थोड़ी देर में फाटक बंद हो जाता है, जिससे सुबह से शाम तक वाहनों की लंबी कतारें लगी रहती हैं। यह फाटक शहर को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय और आसपास के कई गांवों से जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है। रोजाना हजारों लोग इस रास्ते पर आते-जाते हैं। स्कूली बच्चे, कॉलेज छात्र, नौकरीपेशा लोग, मरीज, और एंबुलेंस – सभी इसी फाटक पर घंटों फंसे रहते हैं।





“पुराना अंडरब्रिज बेकार, नए निर्माण की जरूरत”

ज्ञापन में एक और महत्वपूर्ण बात उठाई गई है। फाटक से कुछ दूरी पर पहले से ही एक अंडरब्रिज बना हुआ है, लेकिन वह पूरी तरह अनुपयोगी साबित हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उस अंडरब्रिज तक पहुंचने का रास्ता न के बराबर है। बिना पक्की सड़क के उस अंडरब्रिज तक पहुंचना आम लोगों के लिए संभव नहीं है। यह अंडरब्रिज केवल कागजों पर ही अस्तित्व में है, हकीकत में कोई फायदा नहीं देता। लोगों की मांग है कि उपयोगी स्थान पर नए ओवरब्रिज या अंडरब्रिज का निर्माण किया जाए, जो आम जनता की जरूरतों को पूरा कर सके।

आंदोलन की कमान संभालने वाला युवा चेहरा

इस पूरे आंदोलन और ज्ञापन कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा युवा मोर्चा के महामंत्री, मंडल सेमरा के युवा नेता अमन दुबे ने की। उन्होंने साफ कहा कि यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा और सुविधा का मामला है। उनके अनुसार, लंबे समय से इस फाटक पर जाम की समस्या बनी हुई है और आम लोग रोजाना परेशानी झेल रहे हैं। अमन दुबे ने कहा – “हमने बार-बार आवाज उठाई, हर बार आश्वासन दिया गया, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं हुआ। अब हम कोई और आश्वासन नहीं सुनना चाहते। हमें काम चाहिए। सात दिन में अगर कोई ठोस कदम नहीं उठा, तो जनता के साथ मिलकर रेलवे फाटक पर प्रदर्शन करेंगे और रेल रोकेंगे।”

30 मई को होगा बड़ा आंदोलन

नगर संघर्ष समिति ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि सात दिनों के भीतर रेलवे प्रशासन की ओर से कोई ठोस आश्वासन या कार्रवाई सामने नहीं आती है, तो 30 मई 2026 को बड़ा आंदोलन किया जाएगा। समिति के अनुसार इस आंदोलन में करीब पांच हजार लोग शामिल हो सकते हैं। आंदोलन के तहत रेलवे फाटक पर जमकर प्रदर्शन किया जाएगा और रेल सेवा को बाधित करने की भी चेतावनी दी गई है। समिति का कहना है कि जब बात ही नहीं सुनी जाती, तो मजबूरन जनता को यह रास्ता अपनाना पड़ता है।

जनता के जीवन पर पड़ता गंभीर असर

स्थानीय लोगों ने बताया कि गोरखपुर रेलवे फाटक पर हर रोज घंटों जाम लगता है। सुबह ऑफिस जाने वाले और शाम को लौटने वाले लोगों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ती है। स्कूली बच्चों को देर से स्कूल पहुंचना पड़ता है, तो कई बार तो एंबुलेंस भी इसी फाटक में फंसकर मरीज तक समय पर नहीं पहुंच पाती। एक स्थानीय व्यापारी ने बताया – “हमारा काम दिल्ली और रायपुर के मार्केट पर निर्भर है। फाटक पर लगने वाला जाम सीधा हमारे व्यापार को प्रभावित करता है। माल समय पर नहीं पहुंचता, तो हमें भारी नुकसान उठाना पड़ता है।”

एक अन्य नागरिक ने कहा – “बारिश के दिनों में तो हालात और खराब हो जाते हैं। सड़क कीचड़युक्त हो जाती है, फाटक पर लगी कतारें और लंबी हो जाती हैं। हमने कई बार विधायक और एमएलसी से शिकायत की, लेकिन कोई स्थाई समाधान नहीं निकला।”

ज्ञापन पर किन-किन के हस्ताक्षर?

ज्ञापन में केवल राजनीतिक लोग ही शामिल नहीं हैं, बल्कि क्षेत्र के ग्राम पंचायत प्रतिनिधि, जिला पंचायत सदस्य, किसान संगठनों के पदाधिकारी और सामाजिक संगठनों के लोग भी शामिल हैं। कुल मिलाकर यह आंदोलन अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है। किसी विशेष दल से हटकर, यह मुद्दा हर उस शख्स से जुड़ा है जो इस फाटक का उपयोग करता है।

सोशल मीडिया पर भी उठ रही आवाज

अब सोशल मीडिया पर भी लोग इस मुद्दे को उठाने लगे हैं। फेसबुक और व्हाट्सएप पर गोरखपुर फाटक की तस्वीरें और जाम की वीडियो वायरल हो रही हैं। लोग टैग करके अधिकारियों से जवाब मांग रहे हैं। कुछ युवाओं ने तो ऑनलाइन पिटिशन भी शुरू कर दी है, जिसमें हजारों लोग साइन कर चुके हैं। यह साफ हो गया है कि इस बार आंदोलन सिर्फ थोड़े से लोगों का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र का है।

रेलवे प्रशासन चुप, जवाब का इंतजार

रेलवे प्रशासन की ओर से फिलहाल इस मामले पर कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है। ज्ञापन मिलने के बाद स्टेशन मास्टर ने इसे उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने की बात कही है। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यही “पहुंचाएंगे, विचार करेंगे” वाली प्रक्रिया वर्षों से चल रही है, और अब इससे काम नहीं चलेगा। उन्हें अब केवल काम चाहिए – ओवरब्रिज या अंडरब्रिज, जो भी हो, लेकिन समाधान चाहिए।

अब देखना यह है कि 7 दिन में क्या होता है

अब सबकी निगाहें 7 दिन की समयसीमा पर टिकी हैं। क्या रेलवे प्रशासन इस बार गंभीर होगा? क्या गोरखपुर फाटक पर ओवरब्रिज बनाने की कोई ठोस पहल होगी? या फिर 30 मई को गौरेला में बड़ा आंदोलन देखने को मिलेगा? लोग उम्मीद से लेकर आक्रोश तक – हर भावना को समेटे हुए हैं। अब प्रशासन की बारी है कि वह इस जनआक्रोश को गंभीरता से लेते हुए ठोस कदम उठाए, नहीं तो गौरेला में एक जबरदस्त प्रदर्शन देखने को मिल सकता है, जो शायद कई और मुद्दों को जन्म दे दे।

Post a Comment

0 Comments