छत्तीसगढ़ में महिलाओं के नाम रजिस्ट्री पर 50% छूट, सैनिकों को भी राहत – एक करोड़ की प्रॉपर्टी पर बचेंगे 3.12 लाख रुपए

 


रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने और संपत्ति के मामले में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए एक बेहद अहम फैसला लिया है। अब प्रदेश में कोई भी महिला अपने नाम से प्रॉपर्टी रजिस्ट्री कराएगी, तो उसे पंजीयन शुल्क में 50 फीसदी की छूट मिलेगी। यानी जहां पहले 4 फीसदी शुल्क देना पड़ता था, वहीं अब सिर्फ 2 फीसदी में काम हो जाएगा।

सरकार ने इस आशय की अधिसूचना बुधवार को जारी कर दी थी, और गुरुवार से सॉफ्टवेयर अपडेट होने के बाद यह व्यवस्था पूरी तरह लागू हो गई है। यह बदलाव आम परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, खासकर उनके लिए जो शहर या गांव में अपना घर या प्लॉट खरीदने का सपना देख रहे हैं।

इतनी होगी सीधी बचत

आइए समझते हैं असली फायदा। मान लीजिए आप 1 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं। पहले इस पर पंजीयन शुल्क 4 फीसदी यानी 4 लाख रुपए लगता था। अब यह घटकर 2 फीसदी यानी 2 लाख रुपए रह गया है। इस तरह अकेले पंजीयन शुल्क में ही 2 लाख रुपए की बचत हो जाती है। लेकिन असली बचत तब और बढ़ जाती है जब इसमें स्टांप ड्यूटी और दूसरे छोटे-मोटे शुल्क को भी जोड़कर देखा जाए। विशेषज्ञों के मुताबिक, करीब-करीब 1 करोड़ की संपत्ति पर कुल मिलाकर 3.12 लाख रुपए तक कम खर्च आएगा। यह रकम किसी मध्यमवर्गीय परिवार के लिए छोटी नहीं है।

सरकार पहले ही 0.60 फीसदी का उपकर (सेस) खत्म कर चुकी है, जिससे रजिस्ट्री का बोझ पहले से थोड़ा कम था। अब महिलाओं को आधा पंजीयन शुल्क देने की सुविधा मिलने से यह फर्क और साफ नजर आने लगा है।

महिलाओं को ताकत देने वाला फैसला

आमतौर पर हमने देखा है कि घर-परिवार में ज़्यादातर संपत्तियां पुरुषों के नाम पर होती हैं। इसकी एक वजह यह भी थी कि रजिस्ट्री के नाम पर काफी खर्च आ जाता था, इसलिए परिवार एक ही नाम से काम चला लेते थे। लेकिन अब जब महिलाओं के नाम पर रजिस्ट्री सस्ती हो गई है, तो परिवारों को लगेगा कि क्यों न घर-जमीन या फिर दुकान का कागज बेटी, पत्नी या मां के नाम कर दिया जाए। इससे महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा तो बढ़ेगी ही, साथ ही उन्हें आत्मनिर्भरता का एक बड़ा सहारा भी मिलेगा।

सैनिकों के लिए भी बड़ी राहत

सरकार ने सिर्फ महिलाओं पर ही ध्यान नहीं दिया है, बल्कि उन जवानों को भी याद रखा है जो सीमा पर देश की सुरक्षा करते हैं। प्रदेश ने तय किया है कि सैनिकों और पूर्व सैनिकों को प्रॉपर्टी रजिस्ट्री पर 25 फीसदी छूट दी जाएगी। यह फैसला उनके सम्मान में लिया गया है, और इससे सेना से जुड़े परिवारों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। अब वे कम खर्च में अपनी बस्ती, शहर या गांव में मकान या जमीन खरीद सकेंगे।

रियल एस्टेट बाजार में आएगी रौनक?

इस फैसले का असर सिर्फ परिवारों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे प्रदेश का रियल एस्टेट बाजार भी गर्मा सकता है। राजधानी रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, रायगढ़ जैसे शहरों में पहले से ही प्रॉपर्टी की मांग बनी रहती है। अब जब महिलाओं के नाम रजिस्ट्री सस्ती हो गई है, तो बिल्डर और संपत्ति कारोबारी नई योजनाओं के साथ आ सकते हैं। वहीं, कम बजट वाले परिवार भी बेहिचक महिलाओं के नाम से प्रॉपर्टी लेने के बारे में सोच सकते हैं। बस एक डर था – रजिस्ट्री के ऊंचे शुल्क का, वो अब काफी हद तक कम हो गया है।

डिजिटल सिस्टम से निपटारा होगा आसान

इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए रजिस्ट्रेशन विभाग ने अपना सॉफ्टवेयर भी अपडेट कर दिया है। अब जब कोई महिला या सैनिक अपनी प्रॉपर्टी रजिस्ट्री कराएगा, तो सिस्टम अपने आप कम शुल्क की गणना करेगा। यानी किसी तरह की गड़बड़ी या भ्रम की गुंजाइश नहीं रहेगी। लोगों को दफ्तरों के चक्कर भी कम लगाने पड़ेंगे, क्योंकि ज्यादातर काम ऑनलाइन हो जाएगा।

आम लोगों में खुशी, लेकिन थोड़ा इंतजार

प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों ने इस फैसले का स्वागत किया है। महिलाएं खासतौर पर इसे अपने लिए एक सशक्त कदम मान रही हैं। कई परिवारों ने तो बातचीत करनी शुरू कर दी है कि आने वाले दिनों में कोई नई प्रॉपर्टी या पुरानी प्रॉपर्टी ट्रांसफर करते समय क्या पत्नी या बेटी के नाम कर दी जाए। हालांकि, कुछ लोग अब भी सोच में हैं कि स्टांप ड्यूटी और अन्य शुल्क में कोई कमी होगी या नहीं, लेकिन फिलहाल जो राहत मिली है, उसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

नजर सामाजिक और आर्थिक दोनों बदलावों पर

छत्तीसगढ़ सरकार की यह पहल सिर्फ कागजी राहत भर नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। एक तरफ महिलाएं आर्थिक रूप से सुरक्षित होंगी, तो दूसरी तरफ पूरे रियल एस्टेट सेक्टर में एक सकारात्मक हलचल पैदा होगी। सैनिकों को दी गई छूट प्रदेश की उस परंपरा को भी मजबूत करती है जहां रक्षा कर्मियों को सम्मान देना हमेशा से प्राथमिकता रही है।

फिलहाल सरकार ने यह बदलाव कर दिया है। अब देखना यह है कि आने वाले महीनों में कितनी महिलाएं इसका फायदा उठाती हैं, और कितनी प्रॉपर्टीज़ उनके नाम होती हैं। एक बात तो तय है – छत्तीसगढ़ की महिलाओं के हाथ अब थोड़ा और मजबूत हुए हैं, और मकान-जमीन के कागजात पर उनकी साख बढ़ी है।



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