छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की बैलाडीला पहाड़ियाँ। यहाँ की धरती लोहे से भरपूर है। देश के सबसे बड़े लौह अयस्क भंडारों में से एक यह क्षेत्र कभी खनन कंपनियों की सक्रियता और विकास के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यहीं पर अवैध खनन और खनिज चोरी का एक बड़ा मामला सामने आया है। ग्रामीणों की शिकायत के बाद प्रशासन हरकत में आया और जब जांच टीम पहुंची, तो उसने देखा कि पहाड़ियों के आसपास लौह अयस्क के पहाड़ जैसे ढेर लगे हुए हैं।
एक किलोमीटर में 40 डंप, हर ढेरी पर लाखों का माल
अधिकारियों ने बताया कि करीब एक वर्ग किलोमीटर के दायरे में अवैध रूप से जमा किए गए लौह अयस्क के 40 से अधिक डंप मिले हैं। यह कोई छोटी मात्रा नहीं है। हर ढेरी इतनी बड़ी है कि उसमें लाखों रुपये का खनिज छिपा हो सकता है। स्थानीय स्तर पर प्रारंभिक अनुमान के अनुसार प्रत्येक डंप की कीमत लगभग 2 लाख रुपये बताई जा रही है। यानी अकेले इस एक इलाके में करोड़ों रुपये का अवैध खनिज जमा था।
ग्रामीणों ने बताया कि रातों-रात यह माल इकट्ठा किया जा रहा था। बड़े-बड़े वाहन, मशीनें और लोग – सब मिलकर इस खेल में शामिल थे। लेकिन किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया, या फिर शायद जानबूझकर अनदेखी की गई।
ग्रामीणों की शिकायत के बाद शुरू हुई कार्रवाई
दरअसल, यह पूरा मामला तब उजागर हुआ जब स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन के पास शिकायत दर्ज कराई। उनका कहना था कि पिछले कई महीनों से कुछ लोग रात के अंधेरे में पहाड़ियों से लौह अयस्क निकाल रहे हैं और उसे दूरदराज के जंगलों में छिपा रहे हैं। ग्रामीणों को डर था कि अगर यूं ही चोरी चलती रही, तो यह क्षेत्र पूरी तरह लूट लिया जाएगा।
इसके बाद खनिज विभाग, राजस्व अमला और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीम ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया। जो दृश्य उन्होंने देखा, उसने सभी को चौंका दिया। पहाड़ी के एक ओर जहाँ NMDC की कानूनी खदानें चल रही थीं, वहीं दूसरी ओर जंगलों में चोरी का खनिज ढेर किया जा रहा था।
बैलाडीला – संपदा भी, संवेदनशीलता भी
बैलाडीला क्षेत्र पूरे देश में अपने उच्च कोटि के लौह अयस्क के लिए जाना जाता है। राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (NMDC) की प्रसिद्ध खदानें यहीं स्थित हैं। यहाँ से निकलने वाला अयस्क देश के कई बड़े इस्पात संयंत्रों को पोषण देता है। लेकिन यही अयस्क अवैध तस्करों को भी लुभाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि खनन क्षेत्र होने के बावजूद यहाँ की पहाड़ियाँ बेहद संवेदनशील हैं। एनएमडीसी की सुरक्षा के बावजूद दूरदराज के इलाकों में चोर गिरोह सक्रिय रहते हैं। यह पहली बार नहीं है जब यहाँ अवैध खनन की बात सामने आई हो। पहले भी कई बार ऐसी खबरें आ चुकी हैं, लेकिन इस बार जिस तरह से बड़े पैमाने पर ढेर लगे मिले हैं, वह चिंता का विषय है।
संगठित गिरोह का शक, जांच एजेंसियां सक्रिय
प्रशासन को अब भरोसा हो गया है कि यह अकेले-दुकले लोगों का काम नहीं है। इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा है। जिस तरह से खनिज को निकाला गया, जमा किया गया और छिपाया गया, वह बताता है कि इसमें बड़े खिलाड़ी शामिल हैं।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि:
यह लौह अयस्क कहाँ से निकाला गया?
किसकी देखरेख में इतनी बड़ी मात्रा जमा की गई?
क्या स्थानीय प्रशासन या खनन विभाग के कुछ लोग इससे जुड़े हैं?
आखिर यह अयस्क कहाँ सप्लाई किया जाना था?
इन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं। खनिज विभाग ने पहले ही मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। संभावना है कि जल्द ही इस मामले में एफआईआर दर्ज की जाएगी और कुछ गिरफ्तारियाँ भी हो सकती हैं।
पर्यावरण और स्थानीय समुदाय पर असर
लौह अयस्क की अवैध निकासी सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं है, यह पर्यावरण और स्थानीय समुदाय के जीवन पर भी गहरा प्रभाव डालती है। पहाड़ियों में बिना अनुमति के खुदाई करने से मिट्टी का कटाव होता है, वन्य जीवन प्रभावित होता है और जल स्रोत भी दूषित हो सकते हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि बैलाडीला जैसे संवेदनशील क्षेत्र में अवैध गतिविधियों की सूचना ग्रामीणों ने समय पर दे दी, अन्यात इसका दुष्प्रभाव और गहरा हो सकता था। अब जरूरत है कि आने वाले समय में ऐसी गतिविधियों पर सख्ती से नियंत्रण किया जाए।
स्थानीय लोगों में उम्मीद और डर
घटना की जानकारी मिलने के बाद क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएँ हैं। कुछ लोगों को उम्मीद है कि अब प्रशासन सख्ती दिखाएगा और चोरों पर शिकंजा कसेगा। लेकिन कुछ ग्रामीणों को डर भी है कि कहीं वे लोग, जिनके खिलाफ शिकायत की है, बदले की कार्रवाई न करें।
प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जानकारी देने वालों की पहचान गुप्त रखी जाएगी और कानून के तहत हर संभव कार्रवाई की जाएगी।
अवैध खनन पर लगेगी लगाम?
बैलाडीला में अवैध रूप से जमा लौह अयस्क के इन डंपों ने सरकार और प्रशासन की नींद उड़ा दी है। अब देखना यह होगा कि कार्रवाई कितनी तेज और कितनी गहरी होती है। क्या सिर्फ माल जब्त करने तक ही सीमित रहेगी, या फिर असली तस्करों तक पहुँचा जाएगा।
एक बात तो तय है – खनिज संपदा से भरपूर छत्तीसगढ़ में अवैध खनन की जितनी गंभीरता से बात होनी चाहिए, उतनी हो नहीं पाती। जब तक सजा और निगरानी मजबूत नहीं होगी, तब तक बैलाडीला जैसी पहाड़ियाँ लूटी जाती रहेंगी।
अब लोगों की निगाहें प्रशासन के अगले कदमों पर टिकी हैं। क्योंकि बैलाडीला की मिट्टी सिर्फ लोहा ही नहीं, बल्कि यहाँ के लोगों के सपनों को भी समेटे है।

0 Comments