छत्तीसगढ़ में डीजल संकट गहराया: 108-102 एंबुलेंस सेवाओं पर खतरा, कलेक्टरों को जारी हुए इमरजेंसी निर्देश

 

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छत्तीसगढ़ में डीजल की कमी अब एक बड़े संकट का रूप ले चुकी है। आम आदमी की दिक्कतों से शुरू हुआ यह मामला अब राज्य की लाइफलाइन यानी 108 और 102 एंबुलेंस सेवाओं तक जा पहुंचा है। राज्य के कई जिलों, खासकर बिलासपुर संभाग में डीजल की किल्लत के कारण ट्रक और बसें कम हो गई हैं। लेकिन सबसे बड़ा खतरा स्वास्थ्य सेवाओं पर मंडरा रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने सभी कलेक्टरों को इमरजेंसी निर्देश जारी किए हैं – 108 संजीवनी एक्सप्रेस, 102 महतारी एक्सप्रेस और मुक्तांजलि वाहनों को प्राथमिकता पर डीजल दिलवाया जाए।

क्यों है इतनी जरूरी ये सेवा?

108 और 102 एंबुलेंस सेवाएं छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में मरीजों की जान बचाने का जरिया हैं। जिन गांवों में सरकारी अस्पताल नहीं है, जहां सड़कें ठीक नहीं हैं, वहां गंभीर मरीज, दुर्घटना पीड़ित और गर्भवती महिलाएं इन्हीं वाहनों पर निर्भर रहते हैं। डीजल न मिले तो ये वाहन हिलेंगे नहीं। और यह सीधे मतलब है – मौत के आंकड़े बढ़ना। यही वजह है कि विभाग ने अलर्ट जारी करते हुए साफ कहा है – डीजल कम हो, लेकिन इन वाहनों के लिए रिजर्व रखा जाए।

बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़ – कई जिलों में डीजल तंगी

डीजल की मार अब पूरे राज्य में नहीं, लेकिन कई जिलों में बुरी तरह से महसूस की जा रही है। बिलासपुर, रायगढ़, कोरबा, जांजगीर-चांपा जैसे जिलों में हालात बिगड़ते दिख रहे हैं। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि कई पेट्रोल पंपों पर तो डीजल का स्टॉक ही खत्म हो गया। जहां उपलब्ध है, वहां कतारें लगी हुई हैं। ट्रक चालक घंटों खड़े हैं, ट्रक खड़े हैं, माल ढुलाई अटकी है। छोटे कारोबारियों का काम ठप हो गया है।

पंपों पर खेल? अरोरा पेट्रोल पंप का वीडियो वायरल

हालात और गंभीर तब हो गए जब बिलासपुर के अरोरा पेट्रोल पंप का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया। वीडियो में आरोप लगाया जा रहा है कि पंप संचालक चुनिंदा लोगों को ही डीजल दे रहे हैं। आम ग्राहक को कह दिया जाता है कि स्टॉक खत्म है, लेकिन पीछे से तस्करी जारी है। यह वीडियो वायरल होते ही लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन पंप संचालकों की ओर से अभी तक कोई सफाई नहीं आई है।

यह घटना साफ कर देती है – संकट भी है और उस पर नफरत भी बढ़ रही है।

ट्रांसपोर्ट ठप, किसान परेशान

डीजल संकट ने राज्य के परिवहन व्यवस्था को बुरी तरह से प्रभावित किया है। ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अनुसार कई छोटे ऑपरेटरों के वाहन खड़े होने की कगार पर हैं। रोजाना लाखों का नुकसान हो रहा है। खासकर लंबी दूरी के ट्रक चालकों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। उनका कहना है – "डीजल के बिना ट्रक कैसे चलेगा?"

वहीं दूसरी तरफ किसानों की चिंता अलग है। खेतों में बोई गई फसल को मंडी तक पहुंचाने के लिए भी डीजल की दरकार होती है। महंगाई और अब डीजल का संकट – किसान और भी मुश्किल फंसता जा रहा है।

प्रशासन का बयान – स्थिति नियंत्रण में है? लेकिन जमीन कुछ और कहती है

प्रशासन अभी भी यही कह रहा है कि हालात काबू में हैं। लेकिन जब आप बिलासपुर के किसी पंप पर जाएंगे, तो वहां की कतार और चेहरों की परेशानी कुछ और ही कहती है। एंबुलेंस ड्राइवरों की भी जुबान एक है – "हमें डीजल को लेकर बार-बार टेंशन हो रही है। अगर कभी मौके पर रिस्पांस देर से हुआ तो गंभीर परिणाम हो सकते हैं।"

स्वास्थ्य विभाग ने यह तो तय कर दिया है कि एंबुलेंस को प्रायोरिटी दी जाए, लेकिन जब पंपों पर तेल ही नहीं है, तो प्रायोरिटी का क्या फायदा?

विशेषज्ञों की चेतावनी – अगर यूं ही चला तो बड़ा गेम होगा बिगड़

विशेषज्ञ कह रहे हैं कि डीजल संकट सिर्फ ट्रांसपोर्ट या एंबुलेंस तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर अगले हफ्ते बाजार में दिखने लगेगा। सब्जी, दूध, राशन, सीमेंट, निर्माण – हर चीज की सप्लाई चेन बाधित होगी। जब ट्रक नहीं चलेंगे, तो माल कैसे पहुंचेगा? और जब माल नहीं पहुंचेगा, तो कीमतें बढ़ेंगी। यह वही लौटकर आएगा – महंगाई और मुश्किल

राज्य की अर्थव्यवस्था काफी हद तक सड़क परिवहन पर निर्भर है। इसलिए डीजल संकट को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। अगर अगले 2-3 दिन में स्थिति नहीं सुधरी, तो राज्य काफी बड़े टकराव की ओर बढ़ता दिख रहा है।

अब क्या होगा? जनता की उम्मीदें, प्रशासन की तैयारी

फिलहाल प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों में न आएं और जरूरत से ज्यादा स्टॉक न करें। साथ ही, एंबुलेंस सेवाओं और जिला स्तरीय परिवहन की निगरानी तेज कर दी गई है। लेकिन असली सवाल यही है – आखिर डीजल की सप्लाई क्यों लड़खड़ा गई?

ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि आपूर्ति में बाधा आई है, और यदि समय रहते इसे नहीं सुलझाया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ सकती है। 108 और 102 सेवाओं को सबसे पहले हर जिले में प्राथमिकता लिस्ट में रखा गया है, लेकिन पंपों पर डीजल न हो तो बात अधूरी है।

संकट गहराया, चुप्पी तोड़ने का समय आ गया है

डीजल की समस्या अब सिर्फ एक खबर नहीं रह गई है। वह दस्तक दे रही है हर उस दरवाजे पर, जहां जिंदगी को रफ्तार देने के लिए ईंधन जरूरी है। जब एंबुलेंस की चिंता होने लगे, जब अस्पताल जाने का रास्ता पेट्रोल पंप पर अटके, तो समझ लेना चाहिए कि संकट बड़ा है।

प्रशासन को अब इस मुद्दे को गंभीरता से लेना होगा। दोषियों पर कार्रवाई हो, वितरण व्यवस्था को सुचारु किया जाए, और सबसे ज्यादा ध्यान 108-102 को बचाने में लगाया जाए। लोगों की उम्मीदें अब सिर्फ इस बात पर टिकी हैं कि अब अगले 24 घंटे में कुछ बदलाव होता है या फिर संकट और गहराता है।

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