मुख्यमंत्री के निर्देश पर शुरू हुई यह अनूठी पहल, गरीब से गरीब परिवार के बच्चों को मुफ्त में दिला रही है हार्ट का इलाज और ऑपरेशन
रायपुर। एक बच्चे का तंदुरुस्त दिल उसके उज्ज्वल भविष्य की नींव होता है, लेकिन कई बार जन्म से ही दिल में कोई खामी (जन्मजात हृदय रोग) बच्चे की सेहत पर गहरा असर डाल सकती है। ऐसे में समय पर पहचान और सही इलाज ही एकमात्र विकल्प होता है। इसी ज़रूरत को समझते हुए, रायपुर जिला प्रशासन ने एक अनोखी और जीवन बचाने वाली पहल शुरू की है - ‘प्रोजेक्ट धड़कन’। यह प्रोजेक्ट बच्चों के दिल की बीमारियों को जड़ से खत्म करने का काम कर रहा है।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद हुई शुरुआत
प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के विशेष निर्देश पर रायपुर प्रशासन ने यह बीड़ा उठाया। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन ने श्री सत्य साई हॉस्पिटल के साथ मिलकर इस परियोजना को धरातल पर उतारा। इसका उद्देश्य बिल्कुल साफ था – हर उस बच्चे तक पहुँचना, जिसे दिल की बीमारी हो सकती है, चाहे वह शहर की चकाचौंध में रहता हो या फिर दूरदराज के गाँव की मिट्टी पर पैदा हुआ हो।
‘प्रोजेक्ट धड़कन’ की सबसे खास बात यह है कि इसमें केवल जाँच ही नहीं, बल्कि पूरा इलाज और ऑपरेशन तक मुफ्त किया जाता है। यह वो पहल है, जो किसी गरीब माँ-बाप को यह सोचकर परेशान नहीं होने देती कि उनके बच्चे का ऑपरेशन कैसे होगा।
637 बच्चों की एक साथ हुई दिल की जाँच
अपनी इसी कड़ी में, जिला प्रशासन ने हाल ही में एक और बड़ा स्वास्थ्य शिविर लगाया। यह शिविर केवल रायपुर शहर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके दायरे में आसपास के कई बड़े इलाकों को शामिल किया गया। अभनपुर, आरंग, धरसीवां और तिल्दा जैसे क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी इलाकों के आंगनबाड़ी केंद्रों को भी इस मुहिम से जोड़ा गया।
यहाँ विशेष टीमों ने पहुँचकर बच्चों की सेहत की बारीकी से जाँच की। स्क्रीनिंग टीमों ने अकेले इस अभियान के तहत 637 बच्चों के दिल की जाँच की। डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ ने बच्चों की प्रारंभिक जाँच कर यह पता लगाया कि किन बच्चों को आगे के उपचार की ज़रूरत है। यह कोई आम जाँच नहीं थी, बल्कि एक सुनियोजित अभियान था, जिसमें बच्चों की स्टेथोस्कोप से लेकर जरूरत पड़ने पर ईसीजी और इको तक की सुविधा उपलब्ध कराई गई।
97 हज़ार से अधिक बच्चे हो चुके हैं स्क्रीन, 18 के हुए ऑपरेशन
यह कोई नई शुरुआत नहीं है। ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ पिछले कुछ समय से लगातार ऐसे शिविर लगाता आ रहा है। जब से यह परियोजना शुरू हुई है, तब तक जिला प्रशासन ने जो आँकड़ा पेश किया है, वह चौंकाने वाला और सराहनीय दोनों है। अब तक जिले में 97 हज़ार से अधिक बच्चों की दिल की जाँच की जा चुकी है।
यह संख्या दिखाती है कि किस तरह से एक प्रशासनिक पहल एक बड़े स्वास्थ्य संकट का समाधान बन सकती है। इन 97 हज़ार बच्चों में से कुछ ऐसे भी मिले, जिनकी स्थिति गंभीर थी। प्रशासन ने तुरंत कमर कसी। इनमें से 14 बच्चों को दवाओं और अन्य प्रबंधन से ठीक किया गया, जबकि 18 गंभीर बच्चों का मुफ्त में ऑपरेशन कराया गया। ये ऑपरेशन पूरी तरह से नि:शुल्क थे, जिससे इन बच्चों के परिवारों पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ा।
गरीब परिवारों के लिए वरदान है ‘प्रोजेक्ट धड़कन’
बात जब बच्चों के दिल के ऑपरेशन की आती है, तो निजी अस्पतालों में लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं। एक औसत परिवार के लिए इतना बड़ा खर्च उठा पाना नामुमकिन होता है। ऐसे में यह प्रोजेक्ट उन परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। कलेक्टर डॉ. गौराव सिंह की सोच साफ है – कोई भी बच्चा पैसे के अभाव में इलाज से वंचित न रह जाए।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और आशा सहियों को भी इस अभियान से जोड़ा गया है। वे गाँव-गाँव जाकर पता लगाती हैं कि किस बच्चे को दिल की बीमारी के लक्षण हो सकते हैं। फिर उन बच्चों को स्क्रीनिंग के लिए लाया जाता है। यह सुनियोजित मैकेनिज्म बताता है कि जिला प्रशासन केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि वास्तव में ज़मीनी स्तर पर काम कर रहा है।
शहर-गाँव का कोई भेदभाव नहीं
‘प्रोजेक्ट धड़कन’ की एक और बड़ी उपलब्धि यह है कि इसने शहर और गाँव के बीच की स्वास्थ्य दूरी को कम किया है। जहाँ एक तरफ रायपुर शहर के बच्चे इस सुविधा का लाभ उठा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ तिल्दा, आरंग और धरसीवां जैसे कस्बों और उससे भी दूर गाँवों में बैठे बच्चे भी अब जाँच और इलाज का लाभ ले रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अभी तक जितने भी बच्चों की स्क्रीनिंग हुई है, उनमें से अधिकतर उन क्षेत्रों से हैं, जहाँ पहले कभी हार्ट जैसी गंभीर बीमारी की कोई जाँच सुविधा नहीं थी। माता-पिता को अब अपने बच्चे को लेकर महंगे शहरी अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे हैं। स्वास्थ्य टीमें और मोबाइल वैन उनके दरवाजे तक पहुँच रही हैं।
क्यों है ज़रूरी यह अभियान?
हृदय रोग, खासकर जन्मजात हृदय रोग, अगर समय पर न पकड़ में आए तो बच्चे की जान भी जा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, हर हज़ार बच्चों में से 8 से 10 बच्चे किसी न किसी तरह के हृदय दोष के साथ पैदा होते हैं। इनमें से कई गंभीर मामलों में तुरंत ऑपरेशन की ज़रूरत होती है।
‘प्रोजेक्ट धड़कन’ ऐसे ही बच्चों को चिन्हित करके उनका जीवन बचाने का काम कर रहा है। 18 सफल ऑपरेशन और 14 बच्चों का बिना ऑपरेशन के सफल उपचार इस बात का सबूत है कि यह योजना सही दिशा में काम कर रही है। प्रशासन का कहना है कि यह अभियान और भी तेज किया जाएगा और आने वाले दिनों में डेढ़ लाख से अधिक बच्चों को स्क्रीनिंग के दायरे में लाया जाएगा।
यह केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक ‘मानवीय प्रयास’ है, जो हर बच्चे सुरक्षित भविष्य के संकल्प को साकार कर रहा है।

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