4 साल से सक्रिय नेटवर्क का दावा, 3–5% कमीशन लेकर भारत में कथित एजेंट्स तक पहुंचाता था फंड
नई दिल्ली/जयपुर। देश की सुरक्षा एजेंसियों को एक अहम कामयाबी हाथ लगी है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े कथित फंडिंग नेटवर्क का खुलासा करते हुए राजस्थान सीआईडी इंटेलिजेंस ने महाराष्ट्र के औरंगाबाद से रफीक चांद शेख नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में जो जानकारी सामने आई है, उसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता भी बढ़ा दी है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, रफीक कोई आम व्यक्ति नहीं था, बल्कि वह पिछले करीब चार वर्षों से एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा बनकर काम कर रहा था। आरोप है कि वह ISI के निर्देश पर भारत में मौजूद कथित पाकिस्तानी जासूसों तक पैसे पहुंचाने का काम करता था। यह फंडिंग नेटवर्क बेहद सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा था, जिससे लंबे समय तक इस पर किसी का ध्यान नहीं गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे नेटवर्क में आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा था। एजेंसियों का दावा है कि रफीक विभिन्न बैंक खातों के जरिए पैसे ट्रांसफर करता था और इसके बदले उसे 3 से 5 प्रतिशत तक कमीशन मिलता था। यह कमीशन कथित तौर पर बिटकॉइन के माध्यम से उसके खाते में भेजा जाता था, जिससे लेन-देन को ट्रैक करना और भी मुश्किल हो जाता था।
फिलहाल इंटेलिजेंस एजेंसियां इस पूरे फंडिंग नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि पैसा आखिर कहां से आ रहा था, किन चैनलों के जरिए भारत में प्रवेश कर रहा था और किन-किन लोगों तक पहुंचाया जा रहा था। माना जा रहा है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।
जांच के सिलसिले में एजेंसियां रफीक को औरंगाबाद लेकर गई हैं, जहां उसके संपर्कों, ठिकानों और लेन-देन से जुड़े सबूतों की तस्दीक की जा रही है। मौके पर जांच के जरिए एजेंसियां उन कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही हैं, जो इस नेटवर्क को पूरी तरह उजागर कर सकती हैं।
प्रारंभिक जानकारी में यह भी सामने आया है कि रफीक एक पोल्ट्री फार्म चलाता था। एजेंसियों का मानना है कि वह इसी कारोबार की आड़ में अपनी गतिविधियों को छिपाकर संचालित कर रहा था, ताकि किसी को उस पर शक न हो। इस तरह के “कवर बिजनेस” का इस्तेमाल अक्सर ऐसे नेटवर्क में किया जाता है, जिससे गतिविधियां सामान्य दिखें।
अधिकारियों के अनुसार, रफीक कथित तौर पर पाकिस्तानी हैंडलर्स के सीधे संपर्क में था और उनके निर्देशों के आधार पर पूरे नेटवर्क को संचालित करता था। अगर यह दावा सही साबित होता है, तो यह भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से एक गंभीर मामला बन सकता है।
जांच एजेंसियां इस गिरफ्तारी को बड़ी सफलता मान रही हैं। उनका मानना है कि रफीक से पूछताछ के जरिए न केवल इस फंडिंग नेटवर्क की परतें खुलेंगी, बल्कि ISI से जुड़े अन्य संदिग्ध एजेंट्स और स्लीपर सेल्स तक भी पहुंच बनाई जा सकेगी।
हालांकि, एजेंसियों ने साफ किया है कि मामला अभी जांच के अधीन है और सभी तथ्यों की पुष्टि की जा रही है। आने वाले दिनों में इस केस से जुड़े और बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।
सीधी बात:
एक गिरफ्तारी ने खोल दी बड़े नेटवर्क की परत—अब जांच बताएगी कि यह जाल कितना गहरा है।

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