राज्यसभा में 8 नए सांसदों की एंट्री: खड़गे और तरुण चुघ समेत कई दिग्गजों ने ली शपथ

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चेयरमैन सी.पी. राधाकृष्णन ने दिलाई शपथ, संविधान की प्रति लेकर खड़गे ने हिंदी में किया शपथ ग्रहण


नई दिल्ली। संसद के उच्च सदन में सोमवार को एक अहम राजनीतिक पल देखने को मिला, जब आठ नवनिर्वाचित सांसदों ने शपथ लेकर अपने संसदीय सफर की औपचारिक शुरुआत की। इस सूची में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और बीजेपी के वरिष्ठ नेता तरुण चुघ जैसे प्रमुख नाम शामिल रहे, जिससे इस शपथ ग्रहण का महत्व और बढ़ गया।

कौन-कौन बने नए सदस्य?

खड़गे और तरुण चुघ के अलावा, जिन अन्य नेताओं ने शपथ ली, उनमें शामिल हैं:

  • जितेंद्र मेघजीभाई कंजारिया (गुजरात)
  • मानसिंह मेरामन परमार (गुजरात)
  • एम. नागराजा (कर्नाटक)
  • राजेंद्र हीरालाल जैन (महाराष्ट्र)
  • अधिकारिमयुम शारदा देवी (मणिपुर)
  • अलका सिंह (राजस्थान)

यह शपथ ग्रहण केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि यह देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में नए प्रतिनिधियों के शामिल होने का संकेत भी था। राज्यसभा के चेयरमैन सी.पी. राधाकृष्णन ने सभी नए सदस्यों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई और उनका सदन में स्वागत किया।

इस पूरे कार्यक्रम की एक खास बात यह रही कि मल्लिकार्जुन खड़गे ने शपथ अलग से चेयरमैन के चैंबर में ली, जबकि बाकी सात सांसदों ने राज्यसभा के मुख्य चैंबर में सामूहिक रूप से शपथ ग्रहण किया। यह व्यवस्था प्रोटोकॉल और परिस्थितियों के अनुसार की गई थी, जिसने समारोह को थोड़ा अलग बना दिया।

खड़गे और तरुण चुघ के अलावा जिन अन्य सांसदों ने शपथ ली, उनमें गुजरात से जितेंद्र मेघजीभाई कंजारिया और मानसिंह मेरामन परमार, कर्नाटक से एम. नागराजा, महाराष्ट्र से राजेंद्र हीरालाल जैन, मणिपुर से अधिकारिमयुम शारदा देवी और राजस्थान से अलका सिंह शामिल हैं। ये सभी अब अपने-अपने राज्यों का प्रतिनिधित्व करते हुए राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

शपथ ग्रहण समारोह के दौरान संसद का माहौल काफी गरिमामय और महत्वपूर्ण नजर आया। इस मौके पर राज्यसभा के उप-सभापति हरिवंश, सदन के नेता जे.पी. नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल मौजूद रहे। उनकी उपस्थिति ने इस कार्यक्रम की राजनीतिक अहमियत को और बढ़ा दिया।

मल्लिकार्जुन खड़गे का शपथ लेने का अंदाज भी चर्चा में रहा। उन्होंने हाथ में संविधान की प्रति लेकर हिंदी में शपथ ली, जो लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी वहां मौजूद रहीं, जिससे यह पल और भी खास बन गया।

राज्यसभा में नए सदस्यों की एंट्री केवल संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह नए विचारों, अनुभवों और दृष्टिकोण को भी साथ लाती है। आने वाले समय में ये सभी नेता कानून निर्माण, नीति निर्धारण और राष्ट्रीय मुद्दों पर बहस में अहम भूमिका निभाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यसभा में ऐसे अनुभवी और नए चेहरों का मिश्रण संसद की कार्यवाही को और प्रभावी बना सकता है। इससे नीतियों पर गहन चर्चा और बेहतर निर्णय लेने की संभावना बढ़ती है।

कुल मिलाकर, यह शपथ ग्रहण समारोह भारतीय लोकतंत्र की निरंतरता और मजबूती का प्रतीक है। नए सांसदों के साथ उच्च सदन में एक नया अध्याय शुरू हो चुका है, जो आने वाले समय में देश की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


सीधी बात:
राज्यसभा में नए चेहरों की एंट्री सिर्फ बदलाव नहीं, बल्कि लोकतंत्र की ताकत को आगे बढ़ाने वाला कदम है।

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