छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाके ने एक बार फिर सरहद पर तैनात अपने वीरों को खो दिया है। दिल दहला देने वाली यह घटना कांकेर और नारायणपुर जिले की सीमा पर हुई, जहां IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) के धमाके में जिला रिजर्व गार्ड (DRG) के एक इंस्पेक्टर समेत कई जवानों ने अपनी निडरता का परिचय देते हुए मिट्टी की आन रखी। यह घटना उस वक्त घटी जब हमारे सुरक्षाकर्मी सर्च ऑपरेशन पर निकले थे, उनकी जिंदगी की आखिरी सुबह थी।
उस दिन जंगल में क्या हुआ? दर्द की कहानी
मिली जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा बलों की एक टीम कांकेर-नारायणपुर बॉर्डर के घने जंगलों में नक्सल विरोधी अभियान के तहत खोजबीन कर रही थी। हर वक्त सतर्क रहने वाले ये जवान डर को हजम कर चुके थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। जैसे ही वे जंगल में आगे बढ़े, जमीन के नीचे पहले से दबाए गए IED पर उनका पैर पड़ गया — फिर एक भयानक धमाके ने क्षेत्र को हिलाकर रख दिया।
विस्फोट इतना जबरदस्त था कि मौके पर ही अफरा-तफरी मच गई। DRG के जवान बुरी तरह घायल हो गए, एक इंस्पेक्टर तो वहीं दम तोड़ बैठे। अन्य जवानों ने अस्पताल पहुंचने के बाद या इलाज के दौरान आंखें मूंद लीं। उनकी आंखों में आखिरी वक्त भी अपने देश के लिए कोई शिकायत नहीं थी — बस एक अधूरा सपना रह गया, अपने परिवार के पास लौटने का।
नक्सलियों की साजिश: कायरतापूर्ण हमला, लेकिन सुनियोजित
जांच में यह बात साफ हुई है कि यह IED नक्सलियों द्वारा पहले से प्लांट किया गया था। ये लोग जानते हैं कि सुरक्षाबल सर्च ऑपरेशन पर जरूर निकलेंगे — और उसी भरोसे पर ये जमीन के नीची प्रेशर IED छुपा देते हैं। हल्का दबाव पड़ते ही यह धमाका करता है। कोई धमाकेदार मुठभेड़ नहीं, कोई आमना-सामना नहीं — सिर्फ गद्दारी भरी चोट। बस्तर संभाग के अंदरूनी इलाकों में ऐसे हथियार नक्सलियों का पहला हथियार बन चुके हैं।
यह घटना यह भी बताती है कि नक्सली अब भी सुरक्षाबलों को घायल करने की फिराक में हैं। वे बस्तर के उस हर हिस्से में मौजूद हैं, जहां कानून की आवाज अब भी पहुंच रही है।
पहले भी हो चुकी है इस तरह की घटनाएं, यह पहली नहीं
गौरतलब है कि यह पहला मामला नहीं है जब इस क्षेत्र में IED बरामद या विस्फोट हुआ हो। इससे पहले भी कांकेर और नारायणपुर क्षेत्र में कई बार सुरक्षाबलों ने सर्च ऑपरेशन के दौरान जमीन के नीचे गाड़े गए IED ढूंढ़े हैं और उन्हें निष्क्रिय किया है। लेकिन ये हमले बताते हैं कि नक्सलियों का नेटवर्क अब तक ढीला नहीं पड़ा है, वे अब भी बीहड़ों में सक्रिय हैं।
इलाके में मोर्चा संभाला गया, लेकिन दिल में दर्द है
घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अतिरिक्त बल जंगलों में उतार दिए गए हैं। हर कोने में तलाशी ली जा रही है — कहीं वे जवानी की कबरें फिर न खोद डालें। लेकिन यह मुश्किल है — घने जंगल, अनजान रास्ते, हर मौत के बाद दम घोंटने वाली खामोशी। पर हमारे जवान चुप हैं, पीछे हटने वाले नहीं।
सुरक्षाबल उन नक्सलियों की तलाश में लगे हैं, पता लगाने की कोशिश में कि आखिर इस हमले के पीछे कौन सा समूह है। क्या यह पुराना खेल है, या कोई नया खतरा जन्म ले रहा है? सवाल बहुत हैं, लेकिन जवाब जल्दी नहीं मिलते।
सरकार और अधिकारियों की प्रतिक्रिया — शोक, लेकिन वादा भी
राज्य सरकार और पुलिस अधिकारी इस घटना पर गहरा शोक जता रहे हैं। शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी गई है। उनके परिवारों को हर संभव मदद देने का वादा किया गया है — लेकिन क्या वो वादे उन खाली कुर्सियों को भर पाएंगे? यह सवाल शहीद के घर में हर रोज गूंजेगा।
अधिकारियों का कहना है कि अब रणनीति और मजबूत की जाएगी, अभियान तेज किया जाएगा। नक्सलियों के खिलाफ यह जंग अब और सशक्त होगी। सुरक्षाबल पूरी मजबूती के साथ जवाब देगा — यह संदेश जरूर गया है।
नक्सल प्रभावित इलाके — खतरा अभी बरकरार
बस्तर संभाग के कांकेर, नारायणपुर, बीजापुर, सुकमा — ये नाम सुनते ही एक गंभीर सन्नाटा फैल जाता है। यहां के जंगल सिर्फ पेड़-पौधों के नहीं, बल्कि हरियाली के बीच दफन इंतजार के भी हैं। हर दिन यहां नक्सली किसी न किसी वारदात को अंजाम देते हैं।
सुरक्षाबल लगातार ऑपरेशन चला रहे हैं। लेकिन जंगल का घनापन, मौसम की बेरुखी और डर का माहौल — सब कुछ उनके खिलाफ काम करता है। IED ब्लास्ट नक्सलियों का सबसे नीच हथियार है। न सामने लड़ने की हिम्मत, न नियमों की परवाह।
सुरक्षा बलों का संकल्प — शोक में संभलना
इन चुनौतियों के बावजूद हमारे सुरक्षाबल नहीं थके हैं। हाल के कई अभियानों में नक्सलियों को बड़ा नुकसान पहुंचाया गया है, उनके ठिकाने ढहाए गए हैं। बल का मनोबल कमजोर नहीं होने दिया जाएगा। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए लगातार प्रयास जारी रहेंगे, और हर शहीद की शहादत का बदला लिया जाएगा।
शहीद के घर — वो शाम जो लौटकर नहीं आती
आज शहीद हुए जवानों के घरों में मातम है। किसी के बेटे का देह मिला है, तो किसी के पिता का। जो आंखें कल तक राह देख रही थीं, वो आज सूनी हो चुकी हैं। पर हर घर में एक गर्व भी है — कि उनके अपने ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए दम तोड़ा। वे यूं ही नहीं गए, वे अमर हो गए।
स्थानीय लोगों ने भी इस घटना की निंदा की है, और बिना किसी स्वार्थ के उन वीर जवानों को सलाम किया है, जिनकी वजह से वे रात को चैन से सो पाते हैं।
यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा
कांकेर-नारायणपुर बॉर्डर पर हुआ यह IED ब्लास्ट हमें फिर से याद दिलाता है — नक्सल प्रभावित इलाकों में खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है। हमारे जवान वहां डटे हैं, चाहे कितनी भी मुश्किलें हों। ये वीर सच में वतन के वीर हैं।
हां, इनका जाना निस्संदेह दर्दनाक है। लेकिन यह भी सच है कि उनकी शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी। उनके बलिदान से यह लड़ाई और प्रखर होगी। यह संदेश नक्सलियों तक पहुंच जाना चाहिए — हर शहीद के खून से एक नई बयार उठती है, एक नया जज्बा जन्म लेता है, और भारत मां के ये जांबाज कभी हार नहीं मानते।
जय हिंद। शहीदों को शत-शत नमन।

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