रायपुर। राजधानी के नगर निगम का कार्यभार अब IAS अधिकारी संबित मिश्रा ने संभाल लिया है। 2018 बैच के इस सिविल सर्वेंट को उनकी मेहनत, जमीनी सक्रियता और तकनीकी समझ के लिए जाना जाता है। सोमवार को उन्होंने पदभार ग्रहण कर लिया, और इसके साथ ही रायपुरवासियों को शहर में साफ-सफाई से लेकर जलभराव और ट्रैफिक जैसी उन्हीं पुरानी समस्याओं के हल की नई उम्मीद जगी है।
नए आयुक्त के सामने एक बड़ी चुनौती यह भी है कि रायपुर सिर्फ छत्तीसगढ़ की राजधानी भर नहीं, बल्कि तेजी से बढ़ता और फैलता हुआ महानगर है। यहां की आबादी और जरूरतें बढ़ रही हैं, लेकिन व्यवस्थाएं हमेशा उस गति से नहीं दौड़ पाई जितनी चाहिए। ऐसे में नए कमिश्नर से काफी कुछ अपेक्षित है।
बीजापुर से रायपुर तक – ‘फील्ड में धुरंधर’ अफसर
संबित मिश्रा ने अब तक अपने सफर में बीजापुर (नक्सल प्रभावित जिला), रायगढ़ नगर निगम, जशपुर और कोरबा जिला पंचायत जैसे अहम पदों को संभाला है। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उनके बीजापुर कलेक्टर वाले कार्यकाल की होती है।
वहां उन्होंने सिर्फ कुर्सी पर बैठकर हुक्म जारी नहीं किए, बल्कि गुरिल्ला इलाकों में पैदल जाकर आदिवासियों से मिले, उनकी दिक्कतें सुनीं और मौके पर निर्णय लिए। इसी वजह से उन्हें एक ‘फील्ड में धुरंधर’ अफसर का टैग मिला। अब जब वे रायपुर नगर निगम की कमान संभाल रहे हैं, तो लोग उनसे ऐसी ही सक्रियता और जमीनी समझ की उम्मीद कर रहे हैं।
शहर के सामने क्या-क्या है चुनौती?
राजधानी में आए दिन नगर निगम को लेकर तीन चीजों पर सबसे ज्यादा शिकायतें होती हैं – गंदगी, जलभराव और ट्रैफिक। बरसात आते ही कई कॉलोनियां तालाब में तब्दील हो जाती हैं। सफाई व्यवस्था पर हर दूसरे हफ्ते सवाल उठते हैं। अवैध निर्माण और अतिक्रमण ने शहर का चेहरा बदल दिया है, लेकिन बेहतरी की दिशा में नहीं।
इन सबके साथ एक और बड़ा मुद्दा है – कर संग्रहण और बकाया वसूली। ये वो टेढ़ी खीर है जिसमें हर पुराना आयुक्त फिसला है। देखना दिलचस्प होगा कि संबित मिश्रा इसे किस तरह से निपटाते हैं। उनकी छवि एक सख्त और प्रोफेशनल अफसर की रही है, जो आंकड़ों और तकनीक से खेलना अच्छी तरह जानते हैं।
तकनीक और मॉनिटरिंग पर होगी सियासी तैयारी?
खबर है कि नए कमिश्नर अब नगर निगम में कामकाज को पूरी तरह डिजिटल नजर से ट्रैक करने की तैयारी कर रहे हैं। यानी फील्ड में सफाई करने वाला कर्मचारी हो या सड़क बनाने वाला ठेकेदार – सबकी रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। ऑनलाइन शिकायत निवारण और तत्काल फीडबैक सिस्टम पर भी फोकस रहेगा।
अब भले ही ये सब सुनने में कागजी लगे, लेकिन अगर सच में अमल हुआ तो रायपुर जैसे भीड़भाड़ वाले शहर में यह बड़ा बदलाव ला सकता है। लोगों को पानी-सड़क-बिजली से जुड़ी समस्याओं के लिए अब चक्कर कम काटने पड़ेंगे – यह एक उम्मीद तो है ही।
नए नेतृत्व से क्या बदलेगा – आम रायपुर की राय
निगम के बाहर या चौक-चौराहों पर जब आम लोगों से बात की गई, तो उम्मीद के सुर सुनाई दिए। कई लोगों का कहना है कि “अब कोई ऐसा अफसर आए जो बीन बजाकर न बुलाए, बल्कि खुद आकर देखे।” वहीं व्यापारी संगठनों से जुड़े लोगों का मानना है कि अवैध कब्जे और अतिक्रमण हटेगा तो शहर की सूरत बदलेगी, नहीं तो सब सिर्फ news के लिए बयान होंगे।
एक बात तो तय है कि संबित मिश्रा बैकफुट पर खेलने वाले अधिकारी नहीं हैं। वह अपनी अलग पहचान बनाकर राजधानी में आए हैं। अब यह बहुत जल्दी पता चल जाएगा कि क्या रायपुर नगर निगम में सिर्फ फाइलें हिलेंगी या जमीन पर भी कुछ हिलेगा।
प्रशासनिक अनुभव, पंचायती राज की समझ
संबित मिश्रा ने जिला पंचायत सीईओ के तौर पर पंचायतों को मजबूत करने का काम किया है। उन्हें नगरीय और ग्रामीण – दोनों प्रशासन की अच्छी समझ है। इसका फायदा रायपुर को भी मिल सकता है, क्योंकि राजधानी का विस्तार निगम सीमा से लगे गांवों और सेक्टरों में तेजी से हो रहा है। शहर और उपनगरों का तालमेल बिठाना भी नए आयुक्त की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
रायपुर के लिए यह एक नए अध्याय की शुरुआत है। सभी की नजर इस बात पर है कि क्या IAS संबित मिश्रा सड़क, सफाई और पानी जैसे रोजमर्रा के मुद्दों को टटोल पाते हैं? क्या राजधानी की ढ़ांचागत तस्वीर बदलेगी? अगले कुछ महीने यह तय करेंगे कि उनकी नियुक्ति सिर्फ एक नाम भर है या रायपुर की तरक्की का एक नया मोड़।

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