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11 मई 2026
तो दोस्तों, आज शेयर बाजार में ऐसा गिरावट आया कि निवेशकों के होश उड़ गए। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लुढ़क गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाजार की कुल वैल्यू से करीब ₹4 लाख करोड़ हवा हो गए। ये पैसा नहीं डूबा, बल्कि एक्सचेंज की कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन से ₹4 लाख करोड़ की उड़ान भर दी।
क्या हुआ बाजार में?
सेंसेक्स 900-1300 अंक तक गिर गया। कई शेयर तो 10-10 फीसदी तक लुढ़क गए। निफ्टी 24,000 के अहम लेवल से नीचे चला गया ।
ज्वैलरी शेयर (टाइटन, कल्याण ज्वेलर्स, सेंको गोल्ड) 7-10% तक गिर गए
मेटल, आईटी, मिडकैप और स्मॉलकैप सब मिलाकर लाल निशान दिखा रहे थे
गिरावट की वजह क्या है? (एक के बाद एक ट्रिपल वार)
पहला वार: पीएम मोदी के भाषण का असर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लोग शादियों में एक साल तक सोना खरीदने से बचें, फॉरेन ट्रेवल कम करें, और कंपनियां "वर्क फ्रॉम होम" अपनाएं। यह सुनते ही बाजार सहम गया। निवेशकों को लगा कि सरकार अब सोने पर आयात शुल्क बढ़ा सकती है या फिर पेट्रोल-डीजल के दाम में बढ़ोतरी करेगी ।
दूसरा वार: ईरान-इजराइल जंग और महंगा कच्चा तेल
अमेरिका ने ईरान की शांति पेशकश को "पूरी तरह अस्वीकार्य" बताते हुए खारिज कर दिया । इसका नतीजा यह हुआ कि कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमत तेजी से बढ़कर 100-105 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई । भारत को 85% से अधिक तेल आयात करना पड़ता है। महंगा तेल मतलब बड़ा करेंट अकाउंट डेफिसिट, महंगाई और रुपए पर दबाव ।
तीसरा वार: विदेशी निवेशकों (FIIs) का पलायन
विदेशी संस्थागत निवेशक अमेरिकी डॉलर, चीन और दूसरे इमर्जिंग मार्केट्स की तरफ अपना पैसा निकाल रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2026 में अब तक FIIs ने करीब ₹2 लाख करोड़ से अधिक की बिकवाली कर दी है । रुपया कमजोर हो रहा है। रुपया 95 के पार पहुंच गया ।
निवेशकों पर क्या असर पड़ा?
लाखों रिटेल निवेशकों (खासकर मिडकैप और स्मॉलकैप में पैसे लगाने वालों) के पोर्टफोलियो में भारी कटौती देखने को मिली। अगर आपने शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग की है, तो पैसे जलने का दर्द हुआ होगा।
क्या यह स्थायी गिरावट है?
विशेषज्ञों की राय दो तरफ बंटी हुई है:
बुरी खबर: जब तक ईरान में जंग खत्म नहीं होती और तेल ₹6000-7000 प्रति बैरल से नीचे नहीं आता, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव और घबराहट रहेगी ।
राहत की बात: डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (म्यूचुअल फंड, LIC, SIP) बाजार में लगातार पैसा लगा रहे हैं। उन्होंने इस साल अब तक करीब ₹8 लाख करोड़ से अधिक लगाया है । इसलिए बाजार रातों-रात बर्बाद नहीं हुआ।
जरूरी सलाह
घबराइए मत। घबराकर पैसे न निकालिए। जिन्होंने 2-3 साल पहले SIP में पैसे लगाए थे, उनका रिटर्न शायद कम हुआ है, लेकिन खत्म नहीं हुआ। अब देखना यह होगा कि सरकार क्या करती है और ईरान में बात कहां जाकर रुकती है।


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