छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पुलिस ने एक ऐसा काम किया है, जिसने सचमुच 'पुलिस जनता की सेवक है' वाली कहावत को सही साबित कर दिया। पुलिस ने 'ऑपरेशन तलाश' नाम से एक विशेष अभियान चलाकर 237 लापता लोगों को खोज निकाला और उन्हें सुरक्षित उनके परिवारों से मिला दिया। यह काम जितना बड़ा है, उतना ही भावुक और मानवीय भी। आइए जानते हैं कि कैसे पुलिस की इस मुहिम ने सैकड़ों परिवारों की टूटी हुई उम्मीदों को फिर से जीवंत कर दिया।
क्या है 'ऑपरेशन तलाश'?
'ऑपरेशन तलाश' रायपुर पुलिस का एक अनोखा और दिल छू लेने वाला अभियान है, जिसे शुरू करने का मकसद सिर्फ एक था - उन लोगों को ढूंढना, जो कभी घर से निकले और फिर कभी लौटकर नहीं आए। यह अभियान पुलिस ने बहुत ही सोच-समझकर और प्लानिंग के साथ चलाया। सबसे पहले तो पुलिस ने लापता लोगों से जुड़े सारे पुराने और नए मामलों की लंबी फेहरिस्त तैयार की। फिर उन मामलों को अलग-अलग टीमों में बांटा गया। हर टीम को अलग-अलग इलाके की जिम्मेदारी दी गई और फिर शुरू हुई वो 'तलाश', जिसने आखिरकार 237 परिवारों की लंबी प्रतीक्षा खत्म कर दी।
237 की ये बड़ी संख्या क्या कहती है?
जब पुलिस ने आंकड़ा जारी किया - 237 लोग सुरक्षित मिले - तो यह सुनकर हर कोई हैरान रह गया। ये सिर्फ एक संख्या नहीं है। इन 237 नामों के पीछे 237 कहानियाँ हैं, 237 दर्द हैं, 237 टूटे हुए परिवार हैं, जो अब फिर से जुड़ गए। इन लापता लोगों में बच्चे भी हैं, महिलाएं भी और पुरुष भी। कोई महीनों से लापता था तो कोई सालों से। कई परिवार तो उस दर्द के आदी से हो गए थे कि उन्हें लगने लगा था कि अब उनका अपना कभी वापस नहीं आएगा। लेकिन पुलिस की इस पहल ने उनकी इस सोच को गलत साबित कर दिया।
पुलिस ने कैसे की इतनी बड़ी खोज?
यह पूछना लाज़मी है कि पुलिस ने आखिर ऐसा क्या किया कि जो लोग सालों से नहीं मिल रहे थे, वो अब ढूंढ निकाले गए? असल में पुलिस ने इसमें आधुनिक तकनीक का भरपूर इस्तेमाल किया। मोबाइल लोकेशन ट्रेस करने से लेकर डिजिटल फुटप्रिंट्स का विश्लेषण करने तक, हर तरीके को आजमाया गया। साथ ही, पुराने ज़माने की पुलिसिंग का भी सहारा लिया गया - चौक-चौराहों पर लगे सीसीटीवी कैमरे खंगाले गए, लोगों से पूछताछ की गई, और कई बार तो पुलिस वालों ने अपने पैरों से मैदान में उतरकर खोजबीन की।
सबसे अहम बात यह रही कि पुलिस ने अकेले काम नहीं किया। उन्होंने दूसरे जिलों और दूसरे राज्यों की पुलिस से भी समन्वय बनाया। जहाँ भी कोई सुराग मिला, वहाँ संपर्क साधा गया। एक तरह से यह पुलिस के लिए एक बहुत बड़ा ऑपरेशन था, जिसे उन्होंने बखूबी अंजाम दिया।
बच्चों और महिलाओं पर रहा खास ध्यान
इस अभियान में पुलिस ने सबसे ज्यादा संवेदनशीलता उन मामलों में दिखाई, जहाँ बच्चे या महिलाएं लापता थीं। ऐसे मामलों में इंसानी तस्करी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था, इसलिए पुलिस ने इन मामलों को सबसे पहले प्राथमिकता दी। कई नाबालिग बच्चों को जो घर से भाग गए थे या किसी गलत संगत में फंस गए थे, उन्हें सुरक्षित बरामद किया गया। ये वो मामले थे, जहाँ अगर समय रहते कार्रवाई नहीं की जाती तो बड़ा अनर्थ हो सकता था।
जब हुई परिवारों से मुलाकात – वो भावुक पल
आम लोगों और संगठनों ने की जमकर तारीफ
जैसे ही यह खबर सार्वजनिक हुई, रायपुर पुलिस को हर तरफ से सराहना मिलनी शुरू हो गई। आम लोगों ने ट्विटर और फेसबुक पर पुलिस की जमकर प्रशंसा की। स्थानीय सामाजिक संगठनों ने भी इस पहल को बेहद सकारात्मक बताया। लोगों को लगने लगा है कि अब पुलिस उनके दुख-दर्द को समझ रही है। यह भरोसा किसी भी समाज के लिए सबसे बड़ी पूंजी होती है, और रायपुर पुलिस ने ये पूंजी कमाने में कामयाबी पाई है।
अभियान जारी रहेगा, और भी लोगों की होगी तलाश
रायपुर पुलिस का कहना है कि 'ऑपरेशन तलाश' यहाँ खत्म नहीं होगा। अभी भी कई लोग ऐसे हैं, जो लापता हैं और उनके परिजन घंटों बैठकर उनकी राह देखते हैं। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि यह अभियान लगातार जारी रहेगा। जो 237 लोग मिले हैं, उन पर तो काम पूरा हो गया, लेकिन अब बाकी बचे मामलों पर भी उतनी ही तेजी से और गंभीरता से काम किया जाएगा। पुलिस ने लोगों से भी अपील की है कि अगर उनके आसपास कोई लापता है या उन्हें किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि की जानकारी हो, तो तुरंत पुलिस को बताएं। जनता और पुलिस की मिलीजुली कोशिश से ही इस तरह के अभियान सफल हो सकते हैं।
समाज के लिए एक सबक
इस पूरे ऑपरेशन ने यह साबित कर दिया है कि अगर किसी काम को ईमानदारी से किया जाए, तो उसकी सफलता निश्चित है। रायपुर पुलिस ने दिखा दिया कि जब वो चाहे, तो बड़ी से बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकती है। यह अभियान दूसरे जिलों और राज्यों की पुलिस के लिए भी एक मिसाल बन गया है।
रायपुर पुलिस का 'ऑपरेशन तलाश' न सिर्फ एक पुलिस अभियान था, बल्कि यह एक मिशन था - एक मानवीय मिशन। 237 लोगों को उनके परिजनों से मिलाने का यह कार्य अपने आप में बहुत बड़ा है। इसने सैकड़ों चेहरों पर मुस्कान लौटा दी। अब उम्मीद की जानी चाहिए कि पुलिस इसी तरह अपनी जिम्मेदारी निभाती रहेगी और अपने आने वाले अभियानों से भी इसी तरह लोगों का दिल जीतती रहेगी। अगर पुलिस और जनता के बीच का यह भरोसा बना रहे, तो फिर कोई भी समस्या बड़ी नहीं लगेगी। यही इस ऑपरेशन की असली सफलता है।

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