भारत ने रचा इतिहास: हाइपरसोनिक स्क्रैमजेट इंजन का 20 मिनट से अधिक सफल परीक्षण

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भारत ने एक बार फिर रक्षा तकनीक के क्षेत्र में बड़ा कारनामा कर दिखाया है। DRDO की हैदराबाद स्थित प्रयोगशाला DRDL ने एक्टिवली कूल्ड फुल स्केल स्क्रैमजेट कम्बस्टर का दूसरा सफल और बेहद लंबी अवधि का परीक्षण कर लिया है.

यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि अब तक यह तकनीक सिर्फ अमेरिका, रूस और चीन के पास ही थी। आइए, समझते हैं कि यह Scramjet आखिर है क्या और भारत के लिए क्यों है इतना जरूरी.

Scramjet क्या है? (बिल्कुल सरल भाषा में)

Scramjet का पूरा नाम है – सुपरसोनिक कम्बशन रैमजेट। यह एक इंजन है जो हाइपरसोनिक स्पीड (आवाज की गति से 5 गुना यानी Mach 5 से ज्यादा) पर काम कर सकता है.

आम रॉकेट को चलाने के लिए ऑक्सीजन का टैंक साथ ले जाना पड़ता है, जिससे वजन और लागत बढ़ जाती है। लेकिन Scramjet हवा से ही ऑक्सीजन लेता है और उसे अपनी तेज रफ्तार (सुपरसोनिक स्पीड) से दबाकर ईंधन जलाता है.

इसका सीधा फायदा यह है कि इंजन हल्का, कम खर्चीला, लेकिन बेहद ताकतवर हो जाता है।

परीक्षण इतना खास क्यों है?

DRDL ने जिस कम्बस्टर (Combustor) का परीक्षण किया है, वह एक्टिवली कूल्ड है। यानी इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह 1000 डिग्री सेल्सियस से अधिक के भयंकर तापमान को भी अपने अंदर कंट्रोल कर सकता है.

परीक्षण 1200 सेकंड यानी 20 मिनट से अधिक समय तक चला। हाइपरसोनिक तकनीक में इतना लंबा और सफल परीक्षण होना अपने आप में एक ऐतिहासिक घटना है.

यहां तक कि चीन का प्रसिद्ध "Starfall-2" स्क्रैमजेट परीक्षण भी केवल 600 सेकंट का था। प्रौद्योगिकी में कूदते हुए, भारत का परीक्षण चीन से दोगुना लंबा था।

भारत के हाइपरसोनिक मिसाइल प्रोग्राम को मिलेगा बूस्ट

यह सफलता सीधे तौर पर भारत के हाइपरसोनिक मिसाइल कार्यक्रम से जुड़ी है। इस तकनीक से बनी मिसाइलें:

  • बेहद तेज होंगी (Mach 6 यानी 7,400 किमी/घंटा से ज्यादा)

  • बेहद सटीक (प्रिसिजन) होंगी

  • दुश्मन के रडार और डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में सक्षम होंगी

मान लीजिए, दिल्ली से कोई मिसाइल छूटती है, तो वह मुंबई तक सिर्फ 7 मिनट में पहुंच सकती है। इतनी रफ्तार को रोक पाना लगभग असंभव है.

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अभी परीक्षण केवल जमीन पर हुआ है। उड़ान परीक्षण अभी बाकी है, जो अगले लगभग दो वर्षों में हो सकता है।

दुनिया के टॉप क्लब में ले लिया भारत को

इससे पहले, केवल अमेरिका, रूस और चीन के पास ही हाइपरसोनिक स्क्रैमजेट तकनीक थी। इस सफल परीक्षण के साथ भारत भी इस elite club में शामिल हो गया है.

खास बात यह है कि यह तकनीक 100% स्वदेशी है। इससे सिद्ध हो गया है कि अब भारत अत्याधुनिक रक्षा तकनीक में दुनिया के किसी से पीछे नहीं है।

भविष्य की रणनीति

DRDO के वैज्ञानिक अब इस तकनीक को विकसित करके इसे BrahMos-II जैसी सुपरसोनिक मिसाइलों में लगाने की योजना बना रहे हैं, ताकि उनकी रफ्तार और घातकता और भी बढ़ जाए.

इतना ही नहीं, इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलों के अलावा स्पेस शटल और हाइपरसोनिक विमानों में भी किया जा सकता है.

निष्कर्ष – तैयार हो जाइए ‘आज के बाद’ के युद्ध के लिए

भारत ने मिसाइल तकनीक में एक ऐसी छलांग लगा दी है, जिसे पचाना दुनिया के लिए मुश्किल होगा. अब यह तकनीक जितनी जल्दी सेनाओं तक पहुंचेगी, उतनी ही जल्दी भारत की रणनीतिक ताकत कई गुना बढ़ जाएगी.

सीधी बात – अब हम दुश्मन को उसके घर में ही घुसकर मार सकते हैं, और उसके पास रोकने का कोई जरिया भी नहीं होगा। यह सफलता Atmanirbhar Bharat और Made in India का सबसे कामयाब मॉडल है.

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