UPI और बैंक ट्रांसफर में बदलाव की तैयारी: RBI का ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ क्या है और इसका आप पर क्या असर पड़ेगा

 



भारत में डिजिटल पेमेंट सिस्टम, खासकर UPI, पिछले कुछ सालों में बेहद तेजी से बढ़ा है। आज छोटे से छोटे लेन-देन से लेकर बड़े ट्रांजैक्शन तक, लोग आसानी से मोबाइल से पैसा भेज और प्राप्त कर रहे हैं। लेकिन इस तेजी के साथ ही डिजिटल फ्रॉड के मामले भी चिंताजनक रूप से बढ़े हैं। इसी खतरे को देखते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) अब एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है—जिसे “कूलिंग-ऑफ पीरियड” कहा जा रहा है।

क्या है कूलिंग-ऑफ पीरियड?

RBI के प्रस्ताव के अनुसार, यदि आप ₹10,000 से अधिक का बैंक-टू-बैंक ट्रांसफर (जैसे UPI या IMPS के जरिए) करते हैं, तो उस ट्रांजैक्शन में लगभग 1 घंटे की देरी हो सकती है। इस दौरान पैसा आपके अकाउंट से डेबिट तो हो जाएगा, लेकिन अंतिम रूप से ट्रांसफर होने से पहले आपको उसे रिव्यू करने और जरूरत पड़ने पर कैंसिल करने का मौका मिलेगा। 

यानी, जहां अभी पैसे तुरंत ट्रांसफर हो जाते हैं, वहीं भविष्य में बड़े ट्रांजैक्शन के लिए एक “रुकावट” दी जा सकती है—ताकि गलती या धोखाधड़ी को रोका जा सके।

RBI ऐसा क्यों करना चाहता है?

भारत में डिजिटल पेमेंट का उपयोग पिछले दशक में कई गुना बढ़ा है। लेकिन इसके साथ ही फ्रॉड के मामलों में भी भारी उछाल आया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में जहां लगभग 2.6 लाख फ्रॉड केस थे, वहीं 2025 तक यह संख्या बढ़कर 28 लाख से ज्यादा हो गई। 

इनमें से ज्यादातर धोखाधड़ी “सोशल इंजीनियरिंग” के जरिए होती है—जैसे फर्जी कॉल, डर या जल्दबाजी पैदा करके लोगों से खुद ही पैसा ट्रांसफर करवाना। क्योंकि UPI तुरंत काम करता है, इसलिए एक बार पैसा चला गया तो उसे वापस पाना मुश्किल हो जाता है।

यही वजह है कि RBI अब ट्रांजैक्शन की स्पीड को थोड़ा कम करके सुरक्षा बढ़ाना चाहता है।

यह बदलाव कैसे काम करेगा?

₹10,000 से ज्यादा के ट्रांसफर पर 1 घंटे का कूलिंग-ऑफ पीरियड लागू हो सकता है

इस दौरान ट्रांजैक्शन “पेंडिंग” रहेगा

यूजर चाहे तो इस समय में ट्रांजैक्शन को कैंसिल कर सकता है

यह देरी भेजने वाले, पाने वाले या दोनों के स्तर पर लागू हो सकती है 

इसका मतलब है कि अगर आपने गलती से गलत अकाउंट में पैसा भेज दिया या आपको बाद में शक हुआ, तो आपके पास उसे रोकने का मौका होगा।

और कौन-कौन से नए सुरक्षा उपाय हो सकते हैं?

RBI सिर्फ कूलिंग-ऑफ पीरियड ही नहीं, बल्कि कई और सुरक्षा फीचर्स पर भी विचार कर रहा है:

किल स्विच (Kill Switch):

अगर आपको लगे कि आपका अकाउंट खतरे में है, तो आप तुरंत सभी डिजिटल पेमेंट्स बंद कर सकेंगे।

सस्पिशियस अकाउंट पर लिमिट:

संदिग्ध खातों पर ट्रांजैक्शन की सीमा तय की जा सकती है।

ट्रस्टेड पर्सन सिस्टम:

₹50,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए बुजुर्ग या कम तकनीकी जानकारी वाले यूजर्स को किसी भरोसेमंद व्यक्ति की मंजूरी लेनी पड़ सकती है। 

ये सभी कदम मिलकर डिजिटल फ्रॉड को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

क्या इससे UPI की स्पीड पर असर पड़ेगा?

UPI की सबसे बड़ी खासियत उसकी “इंस्टेंट” स्पीड है। ऐसे में कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि हर ट्रांजैक्शन पर देरी लागू करना सही नहीं होगा।

कुछ विशेषज्ञों का सुझाव है कि सभी ट्रांजैक्शन पर एक जैसा नियम लागू करने के बजाय, रिस्क के आधार पर फैसले लिए जाएं—यानी सिर्फ संदिग्ध या बड़े ट्रांजैक्शन पर ही कूलिंग-ऑफ लागू हो। 

इससे सुरक्षा और सुविधा के बीच संतुलन बना रहेगा।

आम यूजर्स के लिए क्या मतलब है?

अगर RBI का यह प्रस्ताव लागू होता है, तो आम लोगों के लिए कुछ बदलाव देखने को मिलेंगे:

बड़े ट्रांजैक्शन में थोड़ी देरी होगी

गलती या धोखाधड़ी से बचने का मौका मिलेगा

डिजिटल पेमेंट पहले से ज्यादा सुरक्षित होंगे

खासकर नए या बुजुर्ग यूजर्स को अतिरिक्त सुरक्षा मिलेगी

हालांकि, छोटे ट्रांजैक्शन पर इसका असर कम या बिल्कुल नहीं हो सकता है।

निष्कर्ष :-

RBI का यह कदम डिजिटल पेमेंट सिस्टम को और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। भले ही इससे कुछ मामलों में थोड़ी असुविधा हो, लेकिन बढ़ते साइबर फ्रॉड को देखते हुए यह जरूरी भी है।

आज के समय में जहां तेजी ही सबसे बड़ी जरूरत बन गई है, वहीं सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। कूलिंग-ऑफ पीरियड इसी संतुलन को बनाए रखने की कोशिश है—ताकि आपका पैसा सुरक्षित रहे और आप डिजिटल पेमेंट का भरोसे के साथ इस्तेमाल कर सकें।

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