ईरान-पाकिस्तान बॉर्डर पर बड़ी कार्रवाई: आतंकियों की घुसपैठ नाकाम, कई ढेर

 

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ईरान ने अपनी दक्षिण-पूर्वी सीमा पर एक बड़ी कार्रवाई की है। यहाँ आतंकी संगठन 'जैश अल-अदल' के कई लड़ाकों ने पाकिस्तान की तरफ से घुसपैठ करने की कोशिश की, लेकिन ईरानी सुरक्षा बलों ने उन्हें सफल नहीं होने दिया। सुरक्षा बलों ने बताया कि इन आतंकियों को मार गिराया गया।

यह घटना ईरान के संवेदनशील प्रांत सिस्तान-बलूचिस्तान के रास्क इलाके में हुई। यह क्षेत्र पहले से ही आतंकी गतिविधियों के लिए बदनाम है। अधिकारियों के मुताबिक, आतंकी ईरान के अंदर घुसकर हमला करना चाहते थे, लेकिन सुरक्षा बलों ने समय पर उन्हें नाकाम कर दिया।

जैश अल-अदल कौन है?

'जैश अल-अदल' एक उग्रवादी संगठन है, जो 2012 में बना था। यह संगठन खासतौर पर ईरान के दक्षिण-पूर्वी इलाकों में सक्रिय है। ये अक्सर:

  • ईरानी सुरक्षा बलों पर हमले करते हैं

  • सीमा चौकियों को निशाना बनाते हैं

ईरान इस संगठन को आधिकारिक तौर पर आतंकी संगठन मानता है।

इस सीमा पर तनाव क्यों है?

ईरान और पाकिस्तान के बीच की यह सीमा लंबे समय से बेहद संवेदनशील रही है। इसके कई कारण हैं:

  • यह सीमा काफी छिद्रपूर्ण (porous) है, यानी यहाँ से घुसपैठ करना आसान होता है

  • ईरान कई बार पाकिस्तान पर आतंकियों को पनाह देने का आरोप लगाता रहा है (हालाँकि पाकिस्तान इन आरोपों से इनकार करता है)

इन्हीं वजहों से दोनों देशों के बीच समय-समय पर तनाव बढ़ता रहता है और कई बार सेना भी एक-दूसरे के खिलाफ कार्रवाई करती है।

पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएँ

यह पहली बार नहीं है जब ऐसा कुछ हुआ हो। सिस्तान-बलूचिस्तान क्षेत्र में पहले भी:

  • पुलिस चौकियों पर हमले

  • सुरक्षा बलों की हत्या

जैसी घटनाएँ हो चुकी हैं।

निष्कर्ष – क्या है इसका मतलब?

ईरान का यह कार्रवाई करना साफ दिखाता है कि उसकी सीमा पर सुरक्षा को लेकर कितनी गंभीर स्थिति है। हालाँकि यह कोई नई घटना नहीं है, बल्कि इस सीमा पर लंबे समय से चल रहे संघर्ष का एक हिस्सा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ईरान और पाकिस्तान के बीच बेहतर तालमेल नहीं बनेगा और सीमा पर सुरक्षा को और मजबूत नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसी घटनाएँ होती रहेंगी।

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जैश अल-अदल कौन है?

जैश अल-अदल एक आतंकी संगठन है। अरबी में इसके नाम का मतलब होता है “इंसाफ की सेना।” इसका गठन लगभग 2012 में हुआ था और यह एक सुन्नी समूह है।

यह संगठन मुख्य रूप से ईरान के दक्षिण-पूर्वी प्रांत सिस्तान-बलूचिस्तान में काम करता है। यह इलाका पाकिस्तान की सीमा से सटा हुआ है।

ये क्या करते हैं?

ये संगठन ज़्यादातर ईरान की सुरक्षा बलों, जैसे सीमा रक्षकों और पुलिस पर हमले करता है। ईरान ने इसे आधिकारिक तौर पर एक आतंकी संगठन घोषित कर रखा है।

ये क्या दावा करते हैं?

जैश अल-अदल कहता है कि वह ईरान में रहने वाले बलूच अल्पसंख्यक लोगों के अधिकारों के लिए लड़ रहा है। वे कुछ समस्याओं का हवाला देते हैं, जैसे:

  • उनके पास पर्याप्त राजनीतिक ताकत नहीं है

  • नौकरियों और विकास के मामले में उनकी अनदेखी होती है

  • एक शिया-बहुल देश में उन्हें धार्मिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है

ईरानी अधिकारी क्या कहते हैं?

ईरान और कई विशेषज्ञ इन दावों को खारिज करते हैं। वे इस संगठन के हिंसक कृत्यों की ओर इशारा करते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमले करना

  • लोगों का अपहरण करना

  • पुलिस थानों पर हमले करना

  • सीमा पार करके हमले करना

ये संगठन टिका कैसे रहता है?

जिस इलाके में ये सक्रिय हैं, वहां की ज़मीन बहुत ऊबड़-खाबड़ है और सीमा चोरी-छिपे पार करने के लिए आसान है (जिसे पोरस बॉर्डर कहते हैं)। इस क्षेत्र में गरीबी और अवसरों की कमी जैसी पुरानी समस्याएं भी हैं। ये स्थितियां इस संगठन को अपना उग्रवाद जारी रखने में मदद करती हैं।

इससे क्या फर्क पड़ता है?

इस संगठन की गतिविधियों की वजह से ईरान और पाकिस्तान के बीच तनाव बना रहता है और पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती है।



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