मोरबी सिरेमिक उद्योग को राहत: गैस संकट के बाद फिर पटरी पर लौटी फैक्ट्रियां

 

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वेस्ट एशिया संकट का असर, 2 लाख मजदूर प्रभावित—अब PNG से मिली नई उम्मीद

गुजरात का सिरेमिक हब Morbi हाल ही में एक बड़े ऊर्जा संकट से जूझ रहा था, लेकिन अब हालात धीरे-धीरे सामान्य होते दिख रहे हैं।

करीब 680 सिरेमिक यूनिट्स अब अपनी गैस सप्लाई को बदलते हुए Oman और Angola से आने वाली प्राकृतिक गैस पर शिफ्ट हो रही हैं।

क्या था पूरा संकट?

यह संकट सीधे तौर पर वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव और Strait of Hormuz में सप्लाई बाधित होने से जुड़ा है।

  • यह जलमार्ग भारत की ऊर्जा सप्लाई के लिए बेहद अहम है
  • सप्लाई बाधित होते ही गैस की कीमतें तेजी से बढ़ गईं
  • कीमतें $20 प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच गईं

इसका सीधा असर मोरबी के उद्योग पर पड़ा।

फैक्ट्रियां बंद, लाखों पर असर

ऊंची कीमतों के कारण:

  • कई सिरेमिक फैक्ट्रियों को मार्च के मध्य में बंद करना पड़ा
  • करीब 2 लाख मजदूरों पर असर पड़ा
  • उत्पादन पूरी तरह ठप होने की स्थिति बन गई

स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी इसका गहरा असर देखने को मिला।

अब कैसे हो रही है वापसी?

स्थिति को संभालने के लिए Gujarat Gas आगे आई और PNG (Piped Natural Gas) सप्लाई शुरू की।

  • गैस की कीमत घटाकर करीब ₹77 प्रति क्यूबिक मीटर कर दी गई
  • इससे उद्योग को बड़ी राहत मिली
  • फैक्ट्रियां फिर से चालू होने लगी हैं

उद्योग में फिर आई जान

नई गैस व्यवस्था के बाद:

  • उत्पादन धीरे-धीरे शुरू हो गया है
  • मजदूर वापस काम पर लौट रहे हैं
  • बाजार में सप्लाई सामान्य होने लगी है

Morbi का सिरेमिक उद्योग, जो देश और विदेश में अपनी पहचान रखता है, अब फिर से मजबूती की ओर बढ़ रहा है।

क्या सीख मिलती है?

यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि:

  • वैश्विक संकट का असर स्थानीय उद्योग पर कितना बड़ा हो सकता है
  • ऊर्जा सप्लाई में विविधता (diversification) कितनी जरूरी है
  • समय पर सरकारी और कॉर्पोरेट हस्तक्षेप कितना अहम होता है

निष्कर्ष

Morbi का यह उदाहरण बताता है कि संकट चाहे कितना भी बड़ा हो, सही रणनीति और सहयोग से उससे बाहर निकला जा सकता है।

PNG सप्लाई और नई गैस व्यवस्था ने उद्योग को नई जिंदगी दी है, और अब यह सेक्टर फिर से तेजी पकड़ने के लिए तैयार है।


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