Sukma समेत कई क्षेत्रों में 20+ स्कूल प्रस्तावित—गांव के लोग खुद कर रहे हैं शिक्षा की मांग
छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में अब एक बड़ी सकारात्मक बदलाव की शुरुआत हो रही है। लंबे समय तक नक्सल प्रभावित रहे इलाकों में अब शिक्षा क्रांति की तैयारी चल रही है। सरकार ने यहां कई नए स्कूल खोलने की योजना बनाई है, जिससे हजारों बच्चों को पहली बार नियमित शिक्षा का अवसर मिलेगा।
खास बात यह है कि इस बार पहल सिर्फ सरकार की ओर से नहीं, बल्कि गांव के लोग खुद आगे आकर स्कूल खोलने की मांग कर रहे हैं। यह संकेत देता है कि क्षेत्र में लोगों की सोच बदल रही है और वे अब विकास और शिक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं।
इस योजना के तहत Sukma जैसे नक्सल प्रभावित जिलों में 20 से अधिक नए स्कूल खोलने का प्रस्ताव है। इन स्कूलों का उद्देश्य दूर-दराज के गांवों के बच्चों तक शिक्षा पहुंचाना है, जहां अब तक स्कूल की सुविधा या तो नहीं थी या बहुत सीमित थी।
पहले इन इलाकों में सुरक्षा कारणों और बुनियादी ढांचे की कमी के चलते स्कूल खोलना मुश्किल था। कई जगहों पर स्कूल भवन नहीं थे या शिक्षक पहुंच नहीं पाते थे। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं और सरकार शिक्षा को प्राथमिकता दे रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जो बस्तर जैसे क्षेत्रों को स्थायी रूप से बदल सकता है। जब बच्चों को पढ़ने का मौका मिलेगा, तो वे बेहतर भविष्य की ओर बढ़ेंगे और समाज में सकारात्मक बदलाव आएगा।
इस बदलाव को “रेड कॉरिडोर से एजुकेशन जोन” की ओर एक बड़ा कदम माना जा रहा है। जहां पहले हिंसा और डर का माहौल था, वहीं अब स्कूल, किताबें और शिक्षा की बात हो रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे अपने बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं ताकि वे बेहतर जीवन जी सकें। कई गांवों में लोगों ने खुद जमीन देने और स्कूल बनाने में सहयोग करने की इच्छा जताई है।
सरकार की योजना क्या है?
- दूरस्थ गांवों में छोटे-छोटे स्कूल खोलना
- स्थानीय युवाओं को शिक्षक के रूप में प्रशिक्षित करना
- स्कूल तक पहुंचने के लिए सड़क और परिवहन सुविधा बेहतर करना
- बच्चों को मुफ्त किताबें और जरूरी संसाधन देना

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